रेलवे के फ्यूचर प्लानिंग का हिस्सा बनी भोजपुरी पेंटिंग

भोजपुर के कलाकारों की छोटी मगर ऐतिहासिक जीत, भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे ने दिया सम्मान

भोजपुरी पेन्टिंग का चित्रांकन पूर्व मध्य रेलवे के अन्तर्गत आने वाली भोजपुरी भाषी रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों पर भविष्य के लिए विचाराधीन




39वें दिन रेलवे ने दिया मोर्चा को दिया पेंटिंग कराने के लिए लिखित आश्वासन

आरा,9 जुलाई. 39 दिनों से भोजपुरी पेंटिंग के सम्मान के लिए रेलवे परिसर में आंदोलकारी कलाकारों के लिए आज का ऐतिहासिक तो साबित हुआ लेकिन रेलवे द्वारा इस मांग को भविष्य के लिए विचारणार्थ लिखित आदेश किसी लॉलीपॉप से कम नही. लिखित आदेश जहाँ रेलवे पर विश्वास करने का आंदोलनकारियों के लिए एक मोहरा है वही रेलवे के लिए भी यह आंदोलन समाप्त करने की रणनीति जरूर है पर आश्वासन उसके गले की हड्डी बन सकती है.

निर्धारित समय के अनुसार रोजाना की तरह गुरुवार को 39वें दिन भी सुबह से ही आरा रेलवे स्टेशन पर कलाकारों एवं संस्कृतिकर्मियों का भारी जमावड़ा आंदोलन को तीव्र धार देने के लिए जमा था. जहाँ आन्दोलनकारी कलाकारों ने रेलवे परिसर में 9.30 बजे से आन्दोलन अपने रंगारंग कार्यक्रम के साथ जारी रखा. लोकगीतों,जनगीतों और नुक्कड़ नाटक के जरिये रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वालों का,कलाकारों ने उनके ट्रेन आने तक उन्हें धरना-स्थल पर जरूर रोके रखा. दोपहर 12.30 बजे रेलवे अधिरकरियो का सबको बेसब्री से इंतजार था. वरीय मंडल अभियंता अमित गुप्ता को मोर्चा की ओर से पुनः भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे स्टेशन पर अंकन के लिए एक लिखित आवेदन दिया गया जिसके बाद उसके प्रतिउत्तर में रेलवे ने एक पत्र मोर्चा के सचिव को जारी करते हुए लिखा कि “भोजपुरी पेन्टिंग का चित्रांकन पूर्व मध्य रेलवे के अन्तर्गत आने वाली भोजपुरी भाषी रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों पर कराये जाने के में आपका प्रस्तान भविष्य में रेलवे बोर्ड एवं गूर्व मध्य रेल मुख्यालग हाजीपुर द्वारा समय-समय पर दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप विचाराधीन होगा.”

इस पत्र के मिलने के बाद मोर्चा के लोगों में खुशी की लहर तो जरूर है लेकिन आधे से ज्यादा लोग इस बात से नाराज हैं कि रेलवे ने भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में भोजपुरी पेंटिंग के लिए खुले रूप से अभीतक मन नही बनाया है. जिसको लेकर कल आमजन की बैठक भी मोर्चा करने वाला है. उसके बाद आए जनता के प्रस्ताव के बाद मोर्चा आगे की रणनीति तय करेगा. पर फिलहाल कल के लिए आन्दोलन को मोर्चा स्थगित रखेगा. वरीय मंडल अभियंता अमित कुमार ने आन्दोलन कर रहे कलाकारों के बीच सभी से मुलाकात कर सार्वजनिक रूप से बाते रखीं. इस बीच उन्होंने मीडिया द्वारा पूछे जाने पर कहा कि रेलवे और आंदोलनकारी कलाकारों के बीच कम्युनिकेशन गैपिंग थी जिसे वार्ता के जरिये हमने भरने का काम किया है और आगे भी इस दिशा में रेलवे बोर्ड एवं पूर्व मध्य रेल मुख्यालय हाजीपुर द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे.

आन्दोलन फिलहाल स्थगित

शनिवार की सुबह स्थानीय रेलवे स्टेशन पर भोजपुरी पेंटिंग को अंकित करने के लिए मोर्चा को रेलवे द्वारा स्थान निर्धारित किया जाएगा. रेलवे द्वारा पत्र मिलने के बाद मोर्चा द्वारा आरा रेलवे स्टेशन पर चल रहे आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है. अगले कुछ दिनों में आरा रेलवे स्टेशन पर भोजपुरी चित्रकला के सौंदर्य से लोग परिचित होंगें. भोजपुरी पेंटिंग के लिए भोजपुर, बक्सर, सारण सहित विभिन्न जिलों के रंगकर्मियों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों आदि का यह संघर्ष आखिरकार रंग लाया. गुरुवार के धरना को सफल बनाने में संस्कृतिकर्मी पुष्पेंद्र सिंह,मुक्तेश्वर उपाध्याय,मनोज मीत,डॉ वेद प्रकाश सागर, धनजी पांडेय, चैतन्य कुमार,किशन सिंह, रतन देवा, मनोज कुमार सिंह, संजय नाथ पाल, शालिनी श्रीवास्तव, रूपा कुमारी, पल्लवी प्रियदर्शिनी, सोनम कुमारी गुप्ता, आकांक्षा प्रियदर्शिनी,रुख़सार प्रवीण,मीरा कुमारी पांडेय,गुड़िया कुमारी,अनिल सिंह, रविंद्र भारती,अशोक मानव,भास्कर मिश्र,कमलेश कुंदन, रौशन राय, विजय मेहता,कृष्णेन्दु,ओ पी पांडेय, साहेब कुमार, कमल कुमार राय,मनोज श्रीवास्तव,सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, रौशन राय,महबूब आलम,मनीष कुमार पांडेय, अनिल राज,राम कुमार पांडेय, सुशील सिंह, विकास उपाध्याय, अमरेंद्र पांडेय, लालजी प्रसाद, रविशंकर निराला,अखिलेश चंद्रा आदि ने उल्लेखनीय योगदान दिया.

अहिंसक और कला के जरिये विरोध प्रदर्शन रंग लाया

बिना किसी कला और संस्कृति का अपमान किये 39 दिनों के संघर्ष ने भोजपुर जनपद को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई है. यह जीत भले ही कागज पर छोटी लगे लेकिन यह मिल के उस पत्थर के समान है जहाँ से कोई दूरी मापने की शुरुआत होती है. बिना किसी हिंसा,तोड़फोड़ और मारपीट के बगैर लोकतांत्रिक तरीके से अहिंसा के बल पर कला के माध्यम से विरोध प्रदर्शन कर कलाकारों ने हासिल किया है. बावजूद इसके 5 कलाकरों की गिरफ्तारी और फिर बेलबॉण्ड पर उन्हें रिहा करना रेल प्रशासन के हताश का प्रतीक है. यह जीत रेलवे द्वारा भोजपुरी पेंटिंग को अवसर मिलने से इस पेंटिंग की महत्ता साबित होती है.

भावी योजनाओं को लेकर आज करेगा मोर्चा बड़ी बैठक

ज्ञातव्य है कि आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर चार पर मधुबनी पेंटिंग किया गया है. स्थानीय कलाकारों की यह माँग थी कि भोजपुरी पेंटिंग को भी बराबरी का दर्जा देकर आरा रेलवे स्टेशन पर अवसर दिया जाए. मोर्चा द्वारा विभिन्न विधाओं के कलाकारों एवं संस्कृतिकर्मियों के हितार्थ और रेलवे स्टेशन पर भविष्य की कार्ययोजना को निर्धारित करने के लिए शुक्रवार को संध्या 3 बजे से वीर कुँवर सिंह स्टेडियम में एक आवश्यक बैठक का आयोजन किया गया है.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट