पॉलीथिन के कारण ‘गया के DM’ हाई-कोर्ट तलब

विश्व धरोहर के इको सिस्टम पर हाई कोर्ट चिंतित, गया DM हुए तलब
पटना हाईकोर्ट ने लिया प्रणय प्रियंवद की खबर पर संज्ञान

पटना, 28 जून. अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में पॉलीथिन के कारण विश्व धरोहर और ईको सिस्टम पर पड़ रहे प्रभाव को हाई कोर्ट ने गम्भीरता से लिया है. बताते चलें कि पॉलीथिन के इस्तेमाल से मन्दिर परिसर के अंदर स्थित मुचलिंद झील के इको सिस्टम को हो रहे नुकसान पर एक हिंदी दैनिक समाचारपत्र के पटना के प्रधान संवाददाता प्रणय प्रियंवद ने खबर प्रकाशित की थी जिसपर पटना हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गया के डीएम को 9 जुलाई को कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश दिया है. महाबोधि मंदिर परिसर व उसके आसपास पॉलीथिन इस्तेमाल को रोकने के लिए एक निश्चित योजना के साथ गया डीएम को कोर्ट में हाज़िर होने को कहा गया है. न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन व न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने 23 जून को प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचारपत्र की खबर को जनहित का मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और यह आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी.




क्या है मामला ?

बोधगया का महाबोधि मंदिर बिहार की पहली विश्व धरोहर है. यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है. जहाँ पूरे विश्व से पर्यटक आते हैं. महाबोधि मंदिर परिसर में स्थित मुचलिंद झील के बीच में बुद्ध की मूर्ति स्थापित है. मूर्ति में एक विशाल नाग की मूर्ति बुद्ध की रक्षा करता दिखता है. कहा जाता है कि बुद्ध जब ध्यान में लीन थे तो प्रचंड आंधी और बारिश ने उन्हें घेर लिया.

जब बुद्ध मूसलाधार बारिश में फंस गए तो सांपों के राजा मुचलिंडा अपने घर से बाहर निकले और फिर उन्होंने आंधी-बारिश से बुद्ध की रक्षा की. इस झील की घेराबंदी तो की गई लेकिन लोग मछलियों को मूढ़ी खिलाने के लिए इसमें मूढ़ी डालते हैं.

मूढ़ी के साथ-साथ मुढ़ी वाली पॉलीथिन भी इसी मे डाल देते हैं. इससे झील में प्रदूषण फैलता रहता है. वे इस बात को भूल जाते हैं कि पॉलीथिन से तालाब गन्दा होगा और इको सिस्टम प्रभावित होगा. साथ ही सुरक्षा के लिए रहने वाले गार्ड और स्टाफ भी इस पर ध्यान नही देते.

पटना नाउ के लिए ओ पी पांडेय की रिपोर्ट