आत्मबल को बढ़ाता बाबू ‘कुँवर’ का शौर्य

By om prakash pandey Apr 26, 2018

“आत्मबल” को ‘सम्बल’ देता 80 की उम्र का नायक

युवाओं में “आत्मबल” को बढ़ाएगा बाबू वीर कुंवर सिंह के संघर्ष की कहानी : मुख्यमंत्री




बाबू वीर कुंवर सिंह का 160वां विजयोत्सव सफलतापूर्वक संपन्‍न

पटना, 26 अप्रैल. बाबू वीर कुंवर सिंह के 160वें विजयोत्सव पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र के बापू सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्‍होंने बाबू वीर कुंवर से जुड़े चार पुस्‍तकों ( 1857 : कुंवर सिंह का लांग मार्च, शौर्य के 160 वर्ष : वीर कुंवर सिंह, कुंवर सिंह और वीर कुंवर सिंह चित्रकथा) का लोकार्पण किया. इस मौके पर देश के विभिन्न हिस्से से आए बुद्धिजीवियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि  राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ही यह निर्णय लिया था कि बाबू वीर कुंवर सिंह के 160वें विजयोत्सव पर राजकीय समारोह का आयोजन किया जाएगा. उसी सिलसिले में 23 अप्रैल से त्रिदिवसीय कार्यक्रम चल रहा है. आज राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है, यह अपने आप में विशिष्ट है.

CM ने पिछले वर्ष चंपारण शताब्दी समारोह की चर्चा करते हुए कहा कि10-11 अप्रैल को बापू के विचारों पर राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के बुद्धिजीवियों, लेखकों एवं विचारकों ने उसमें हिस्सा लिया था. इसमें स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित भी किया गया था. बापू जहां-जहां गए थे, सभी जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. गांधी जी का पेशी के वक्त कोर्ट में दिया गया वक्तव्य, जिसका पूरे देश पर असर पड़ा था, इन सब चीजों पर चर्चा हुई थी. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि 30 वर्षों के अंदर ही देश आजाद हुआ. घर-घर तक दस्तक देकर साहित्य के माध्यम से बापू के विचारों को पहुंचाया जा रहा है. बापू के विचारों को अगर 10 से 15
प्रतिशत लोग आत्मसात कर लें तो समाज और देश बदल जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2017 में 350वां प्रकाश पर्व मनाया गया एवं दिसंबर 2017 में शुकराना समारोह का आयोजन किया गया. इससे देश एवं दुनिया से आए सिख श्रद्धालुओं की बिहार के प्रति अच्छी भावना बनी. आजादी की पहली लड़ाई में बाबू वीर कुंवर सिंह की भूमिका की सीमित चर्चा होती है. देश में उनकी भूमिका की विस्तृत चर्चा नहीं होती है. अगस्त 1857 में 9 महीने के लौंग मार्च के बाद 22 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह जगदीशपुर लौटे थे. वर्तमान सड़क मार्ग से यह दूरी 2380 किलोमीटर है, जबकि आज की तरह पहले सड़कें नहीं हुआ करती थीं. अतः यह दूरी उबड़-खाबड़ रास्ते के द्वारा उससे दुगनी हो जाएगी. लौंग मार्च के दौरान कुंवर सिंह देश के विभिन्न क्षेत्रों में गए. लौंग मार्च की चर्चा से यह अभिप्राय है कि कुंवर सिंह ने बिहार के बाहर जो देश भर में किया, उसकी चर्चा आवश्यक है. बाबू वीर कुंवर सिंह ने अनेक जगहों पर अंग्रेजों से युद्ध लड़ा और उनकी पकड़ में नहीं आए, इसके लिए उन्होंने छापामार युद्ध की रणनीति को अपनाया. आजादी की पहली लड़ाई में कुंवर सिंह की भूमिका पर कुछ पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है. नई पीढ़ी इसके द्वारा पूरी बातों को जानेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी इच्छा है कि इस संगोष्ठी से खास बात निकलकर सामने आए और उन सब चीजों को पाठ्यक्रम में शामिल कर बिहार के स्कूलों में बच्चों को कुंवर सिंह के बारे में जानकारी दी जाए. जिस तरह बापू के विचारों को कथावाचन के माध्यम से स्कूलों में बच्चों को बताई जा रही है. पढ़ने के दौरान ही अगर बच्चों को इन सब चीजों को सीखने का मौका मिलेगा तो यह बहुत अच्छी बात है. जब कुंवर सिंह शासन चला रहे थे तो सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की थी. उन्होंने हर तबके का सहयोग प्राप्त किया. उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में जिस तरह का संघर्ष किया, उसे नई पीढ़ी को जानने की जरुरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन का संदेश जाना महत्वपूर्ण है तभी सब लोगों के बीच प्रेम और सद्भाव का माहौल बरकरार रहेगा. समाज में कटुता एवं तनाव का माहौल खत्म कर प्रेम, शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनाए रखने की उन्होंने सबसे अपील की.

उन्होंने कहा कि वीर कुंवर सिंह के संघर्ष की कहानी से युवाओं में आत्मबल बढ़ेगा. कुंवर सिंह ने नर-नारी समानता की बात की थी. जिसे  याद करते हुए उन्होंने राज्य में नारी सशक्तिकरण के लिए किये अनेक कामो की चर्चा की. जिसमें महिलाओं को नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण, प्राथमिक शिक्षक के नियोजन में 50 प्रतिशत का आरक्षण, लड़कियों की शिक्षा में सुधार के लिए साइकिल योजना एवं पोशाक योजना चलायी गई. CM ने कहा कि राज्य में बालिका शिशु मृत्यु दर में सुधार के लिए काम करना है. बेटी की भी उतनी ही चिंता करनी है, जितना बेटे की. बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ एवं शराबबंदी के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कन्या उत्थान योजना के तहत लड़की के जन्म लेने पर
2,000 रुपए की राशि दी जाएगी. एक साल में आधार से लिंक करने पर 1,000 रुपये, संपूर्ण टीकाकरण कराने पर दो साल में 2000 रुपये की राशि उपलब्ध करायी जाएगी. पोशाक योजना के लिए सभी वर्ग की बालिकाओं की राशि बढ़ा दी गई है. 12वीं उत्तीर्ण अविवाहित लड़कियों को 10,000 रूपये की राशि प्रदान की जाएगी. जबकि ग्रैजुएट उत्तीर्ण चाहे विवाहित हो या अविवाहित उन्हें
25,000 रुपए की राशि प्रदान की जाएगी. 7वीं से 12वीं कक्षा की लड़कियों को सेनेटरी नैपकिन के लिये दी जाने वाली राशि 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दी गई है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोशाक के लिए मिलने वाली राशि 250 रूपए से बढ़ाकर 400 रुपए कर दी गई है. हमारी नई पीढ़ी चाहे लड़का हो या लड़की खूब पढ़े, आगे बढ़े.

कॉलेज से पार्क तक बाबू कुँवर के नाम
चर्चाओं के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि डुमरांव के एग्रीकल्चर कॉलेज का नाम वीर कुंवर सिंह के नाम पर रखा गया है. हार्डिंग पार्क का नाम “वीर कुंवर सिंह आजादी पार्क” किया गया, जिसमें वीर कुंवर सिंह की मूर्ति लगायी गई है. इसके चारो तरफ उनकी जीवनगाथा संक्षिप्त रुप में लिखी गई है. आजादी पार्क में उनकी संघर्ष गाथा का टेराकोटा म्यूरल लगाया गया है. इसे पूरे पार्क में लगाया जाना है. पूरे पार्क में और वृक्षारोपण किया जाना है. नई पीढ़ी इन सब चीजों से प्रेरणा लेगी. अपने नायकों की भूमिका के बारे में जानेगी.

राज्य सरकार के विकास को गिनाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हर क्षेत्र में विकास हो रहा है. राज्य का बजट 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये के करीब हो गया है. सड़क, हर घर तक बिजली, हर घर में नल का जल, हर घर शौचालय, हर गांव तक पक्की नली-गली उपलब्ध कराया जा रहा है. नई पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए 4 लाख रूपए का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है. युवाओं को हुनरमंद बनाने की कोशिश की जा रही है. महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. न्याय के साथ विकास किया जा रहा है लेकिन जब तक सामाजिक कुरीतियां जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा दूर नहीं होंगी, सोच में बदलाव नहीं आएगा, आपस में झगड़ते रहेंगे तब तक विकास का कोई मायने नहीं है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि महानायकों के जीवन से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए. आज की संगोष्ठी से जो नतीजा निकलेगा, उसकी कहानी बनाकर बच्चों तक अगर पहुंचा देंगे तो इसका कितना असर पड़ेगा. उन्होने कहा कि संगोष्ठी का जो मकसद है, वो लोगों तक पहुंचे और समाज में प्रेम, शांति एवं सद्भाव का माहौल बना रहे.

कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री ने बाबू कुंवर सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया. इस अवसर पर कलाकारों द्वारा वीर कुंवर सिंह की जीवनी पर आधारित गीत प्रस्तुत किया गया. मुख्यमंत्री का स्वागत कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने पुष्प-गुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर किया. वीर कुंवर सिंह, शोध एवं सेवा संस्थान द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत बड़ी माला पहनाकर, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर किया गया. कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा प्रकाशित चार पुस्तकों- ‘वीर कुंवर सिंह के जीवन पर आधारित पुस्तक’, ‘1857 कुंवर सिंह का लौंग मार्च’, ‘कुंवर सिंह के जीवन पर आधारित चित्रकथा’,‘विजयोत्सव 2018 स्मारिका’ का विमोचन मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया.

सभा को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह, कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, आधुनिक भारतीय इतिहास के विद्वान एवं प्रतिकुलपति, अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली प्रो0 सलिल मिश्रा, लेखक एवं निदेशक, रुटलेज प्रकाशन, नई दिल्ली डॉ0 शशांक सिन्हा ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री गौतम सिंह, पूर्व मंत्री मिथिलेश सिंह, विधायक कविता सिंह, विधायक अशोक सिंह, विधान पार्षद राणा गंगेश्वर सिंह, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी,
विधान पार्षद संजय सिंह, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव कला, संस्कृति एवं युवा विभाग चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव पर्यटन विभाग पंकज कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं शोध संस्थान, पटना श्रीकांत,
उपसचिव तारानंद वियोगी, संजय सिन्‍हा, संजय कुमार, विभा सिन्‍हा और मीडिया प्रभारी रंजन सिन्‍हा अन्य अधिकारीगण, विशिष्ट अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

संगोष्ठी में शौर्यगाथा ने किया देशभक्ति का संचार

वहीं बापू सभागार में आयोजित संगोष्‍ठी में ख्‍याति प्राप्‍त इतिहासकार प्रो0 सलिल मिश्रा, डॉ पी के शुक्‍ला, डॉ शशांक सिन्‍हा, डॉ रश्मि चौबे, प्रो. आई के चौधरी, प्रो. निहार नंदन सिंह, प्रो रत्‍नेश्‍वर मिश्र, डॉ अशोक अंशुमान ने बाबू वीर कुंवर सिंह पर आयोजित व्‍याख्‍यान में भाग लिया और उनकी वीरता के बारे में विस्‍तार से चर्चा की. इसके अलावा सांस्‍कृतिक संध्‍या में श्री कृष्‍ण मेमोरियल हॉल पटना में सविता सिंह नेपाली, भरत सिंह भारती, सत्‍येंद्र कुमार संगीत, मोर्हरम राठौर, अजीत झा, डॉ नीतू, कुमारी नवगीत ने बाबू वीर कुंवर की शौर्य गाथा से श्रोताओं को सराबोर कर दिया. इन कलाकारों ने एक के बाद एक कई शानदार प्रस्‍तुति दी, जिसने हॉल में उपस्थित तमाम दर्शकों में देशभक्ति का संचार कर दिया. वहीं, बाबू वीर कुंवर सिंह पार्क में विजयोत्‍सव के अंतिम दिन भी 25 मिनट के भव्‍य लेजर शो का भव्‍य आयोजन किया गया, जिसमें बाबू कुंवर की सिंह की वीरता को लेजर लाइट और साउंड के माध्‍यम से दिखाया गया.

पटना नाउ के लिए ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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