किसकी हुई “चांदी”, और कौन हुआ “पस्त” ?

ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की हुई चांदी,
5 साल से लंबित बैंक मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
पटना, 26 अप्रैल. बुधवार का दिन बैंक कर्मचारियों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया. वर्षों से लंबित ग्रामीण बैंक कर्माचारियों के पेंशन का मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के हित में निर्णय सुना मामले का पटाक्षेप कर दिया. माननीय न्यायालय ने इस मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय को आधार मानते हुए भारत सरकार की विशेष अवकाश याचिका सं० 39288/12 को निरस्त कर दिया और भारत सरकार को इसे लागू करने के लिये तीन महीने का समय दिया है. नवम्बर 2012 से लंबित पड़े इस मामले का निर्णय जस्टिस जोसेफ कुरियन एवम शान्तागौड़ा ने दिया है.




ज्ञात हो कि मार्च 2011 में कर्नाटक हाइकोर्ट ने बैंकिंग उद्योग में लागू की गई 1993 की पेंशन स्कीम को समान नीति के तहत लागू करने के आदेश दिया था, लेकिन तत्कालीन भारत सरकार ने ग्रामीण बैंक के लिए शर्तो को नियम में डाल दिया गया था जिसके तहत loss वाली ग्रामीण बैंक पेंशन लाभ से बाहर हो गयी थी. भारत सरकार ने पेंशन कोष बनाने के लिए सभी स्टाफ से लगभग ₹- 3 लाख लेने की भी शर्त रखी थी जो 1993 की स्कीम में नही था. बुधवार 25 अप्रैल को कोर्ट के आये आदेश के बाद भारत सरकार को अब उन सभी कर्मचारियों को पेंशन देना पड़ेगा जो सेवारत या सेवानिवृत्त हो चुके है. इसके साथ ही उन सभी 56 ग्रामीण बैंको और उनके कर्मचारियों को बिना अतिरिक्त धनराशि दिए पेंशन समानता का संवैधानिक हक प्राप्त होने का रास्ता प्रखर हो गया है. नेशनल फेडरेशन ऑफ RRB ऑफिसर(AIRRBEA) के अध्यक्ष सगुण शुक्ला ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है तथा कर्मचारियों ने भी इस फैसले के आने के बाद खुशी ब्यक्त किया है.

पटना नाउ के लिए ओ पी पांडेय की रिपोर्ट