पटना फिल्म फेस्टिवल के दौरान कलाकारों ने किया विरोध प्रदर्शन

काली पट्टी बाँध किया विरोध,दर्शकों को दिया पर्चा 

स्थानीय कलाकारों को सूचीबद्ध करने के एवज में दो हजार रुपये की राशि वसूली जा रही है.




वर्तमान नीतियों व कार्यप्रणाली के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से काला बिल्ला बांध कर विरोध-प्रदर्शन

स्थानीय कलाकारों की घोर उपेक्षा,फिल्म निगम का आरोपों से इंकार 

अश्लील और विशुद्ध व्यावसायिक भोजपुरी फिल्मों का प्रदर्शन सरकारी खजाने का अपव्यय

बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की वर्तमान नीतियों व कार्यप्रणाली के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से काला बिल्ला बांध कर विरोध-प्रदर्शन किया गया. बड़े ही शालीनता के साथ लोगों को पर्चा दिया गया.बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम द्वारा आयोजित ”पटना फिल्म फेस्टिवल” के दौरान स्थानीय कलाकारों की घोर उपेक्षा की जा रही है.कलाकार साझा संघ से जुड़े कलाकारों को इस महोत्सव में आमंत्रित न किया जाना निगम की पक्षपातपूर्ण नीति को दर्शाता है.फिल्म निर्माण की योजना शिथिल पड़ चुकी है जिससे स्थानीय कलाकारों को अपने ही राज्य में उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है और निगम लगातार फिल्म महोत्सवों के आयोजन में व्यस्त है.इन महोत्सवों के आयोजन के दौरान सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग किया जा रहा है. अश्लील और विशुद्ध व्यावसायिक भोजपुरी फिल्मों का प्रदर्शन सरकारी खजाने का अपव्यय है.

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निगम के द्वारा स्थानीय कलाकारों को सूचीबद्ध करने के एवज में दो हजार रुपये की राशि वसूली जा रही है.साथ ही अब तक इस निगम के द्वारा कितने कलाकारों को सूचीबद्ध किया गया है और कितने कलाकारों को निगम के द्वारा निर्मित फिल्मों में काम करने का अवसर मिला है, इसकी कोई जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है.

विदित हो कि पूर्व में भी निगम द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित ‘A’ श्रेणी की फ्रेंच फिल्म के संबंध में मुख्य सचिव, बिहार सरकार से शिकायत की जा चुकी है.इस मामले में मुख्य सचिव द्वारा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया जा चुका है.
कलाकार साझा संघ बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की पक्षपातपूर्ण और स्थानीय कलाकार विरोधी नीतियों का विरोध करता है और मांग करता है कि निगम की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाई जाए.साथ ही फिल्म-निर्माण की गतिविधि को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे कलाकारों को अधिक से अधिक निगम के द्वारा निर्मित फिल्मों में काम करने का अवसर प्रदान किया जाए ताकि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को समुचित अवसर मिल सके.”

 

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साथ ही रविंद्र भवन में कार्यक्रम आयोजित हुआ पर आज तक रविंद्र नाथ ठाकुर की प्रतिमा पर एक भी पुष्प से सम्मान न दिया जा सका. इतने संकीर्ण मानसिकता से फिल्म महोत्सव का आयोजन कई सवालों को जन्म देती है. बहरहाल! कलाकार साझा संघ के सदस्यों ने रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर निगम के कृत्यों के लिए माफी मांगी.

इस विरोध प्रदर्शन में पचास से अधिक कलाकार आए जिसमे मुख्य थे – रौशन, हीरालाल, रास राज,बबलू गांधी, विवेक, प्रवीण सप्पू, विशेन्द्र, कुंदन, उत्तम, अदिति सिंह, पल्लवी विश्वास, अभिनव पांडेय, विकास कुमार, अरुण, आदिल रशीद, राजेश राजा, सुभाष, मनोज राणा, सत्या, निधि, खुशबु, कोमल.