सिर्फ एक गीत ने जगदीशपुर की परम्परा को तोड़ने का किया काम !

कश्मीर मांगोगे तो चीर देंगे …इस गीत ने बाबू वीर कुंवर सिंह की धरती जगदीशपुर में अपना अलग ही रंग दिखा दिया. उक्त गीत पर एक समुदाय के कुछ लोगों ने बजाने की आपत्ति को लेकर प्रशासन से शिकायत की. प्रशासन ने उस गीत को बंद कराने की कवायद की .किसी प्रकार से दोनों समुदाय के लोगों समझा बुझा कर गाना बंद करा दिया गया. आज बुधवार को मूर्ति विसर्जन और ताजिये के निकालने का दिन था. सुबह से ही मूर्ति विसर्जन में में लोग भारी संख्या में शामिल हो रहे थे. दुकानदारों ने भी अपनी दुकाने बंद कर मूर्ति विसर्जन में शामिल हो गए. लोग इतनी संख्या में जुटे कि जगदीशपुर के लोगों को अंदाजा नहीं हुआ और कई मार्ग जाम हो गए.

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दूसरी ओर सुबह में ही ताजिया को नगर भ्रमण करते हुए किला मैदान में जाकर रुकना था और वहां कुछ देर प्रदर्शन के बाद वापस अपने चौक पर रखा जाना था. दोपहर में पुनः वही ताजिया मातमी जुलूस के साथ नगर भ्रमण करते हुए किला मैदान होते हुए कर्बला पर पहलाम के लिए जाता लेकिन कुछ मार्ग के जाम रहने के कारण ऐसा नहीं हो सका. इसी बात को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोग गुस्से में आ गये कि वे ताजिया को चौक से कर्बला तक नहीं ले जा सके. स्थानीय प्रशासन के ढूलमूल्र एव उदासीन रवैया के कारण उनलोगों ने काली पट्टी बाँध कर विरोध करने लगे.इस बात की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी भोजपुर,आरक्षी अधीक्षक  अभियान मोहम्मद साजिद एवं स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचकर लोगों को ताजिया निकालने का अनुरोध किया लेकिन उन लोगों ने एक नहीं सुनी और  स्थानीय प्रशासन के उदासीनता के आक्रोश में हाथ पर काला बिल्ला बांधकर मौन जुलूस के साथ मिट्टी दफनाने कर्बला चले गए. इस घटना के बाद से दोनों समुदाय के लोग बरसों से चली आ रही हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक जगदीशपुर नगर पर कलंक लगने की बात कह रहे हैं.       

 

 

 

 

 

 

रिपोर्ट -जगदीशपुर से दिलीप ओझा