इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन में हमला, कई घायल

‘हिंसा के विरुद्ध संस्कृतिकर्मी ‘ संगठन ने घटना की निंदा की 

सबके लिए एक सुन्दर दुनिया कार्यक्रम में मारपीट और तोड़फोड़ 




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भारतीय जान नाट्य संघ (इप्टा) के चौदहवें राष्ट्रीय अधिवेशन पर किये गए हिंसक  हमले की रंगकर्मियों-कलाकारों के साझा मंच ‘हिंसा के विरुद्ध   संस्कृतिकर्मी ‘ कड़े शब्दों में निंदा करता है.ये हमला सृजनात्मक स्वतंत्रता पर लगातार हो रहे हमले की सबसे ताज़ा कड़ी है.ज्ञात हो कि 2 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए देश की सबसे पुरानी रंगसंस्था ‘ इप्टा’ पर हमला   में नाटक के  माध्यम से सामाजिक बदलाव एवं देश की साझी विरासत व् गंगा-जमुनी तहजीब को बचाने के पैरोकारों  विध्वंसात्मक आक्रमण है. देश के चर्चित फ़िल्मकार एम्.इस सथ्यू ने अपने भाषण में  भारत – पाकिस्तान  के  बीच युद्ध बदले शांति  स्थापित करने के बात की. संघ गिरोह के संगठन ‘भारत स्वाभिमान संघ’ के आसामाजिक तत्वों ने अधिवेशन के मुख्य मंच पर चढ़ कर हंगामा  एवं मारपीट करना  शुरू  कर दिया जिसमें एक रंगकर्मी का सिर फट गया और  कई रंगकर्मियों  की भी बेरहमी से  पिटाई की गयी.

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा संरक्षित संघी गिरोह के द्वारा किया गया यह  सुव्यवस्थित हमला भारत के महान रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाटकों पर हमले तकलीफ  को याद कराता है. चंद दिनों पूर्व  हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा दिवंगत लेखिका महाश्वेता देवी के नाटक ‘द्रौपदी’  पर भी प्रतिबंध लगाना भी सृजन व् असहमति के अधिकार को दबाने के फासीवादी प्रवृत्ति का सूचक है.’हिंसा के विरुद्ध संस्कृतिकर्मी ‘ पिछले दो-ढाई वर्षों से लेखको-कलाकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं.सत्ता  संरक्षित साप्रदायिक व् उन्मादी तत्वों अपने से असहमत हर व्यक्ति को राष्ट्रद्रोही घोषित कर उन्माद का वातावरण फैलाया जा रहा है.पुरे  देश में अभी युद्धोन्माद का जो माहौल पैदा किया जा रहा है उसमें युद्ध के बदले शांति की बात करने वालों को पाकिस्तान भेजने की अंधराष्ट्रवादी धमकी दी जाने लगती  है.

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इप्टा देश में जन पक्षधर रंगकर्म करने वाली आज़ादी के पहले से सक्रिय रहने वाली नाट्य संस्था है जिसका देश के सांस्कृतिक विकास में अतुलनीय योगदान है.’इप्टा’ के राष्ट्रीय अधिवेशन पर हमला आज़ादी के आंदोलन की उस महान विरासत पर हमला है.साझा मंच  मध्यप्रदेश की सरकार से मांग करती है कि अविलम्ब हमलावरों को गिरफ़्तार कर कड़ी सज़ा दी जाय.हिंसा के विरुद्ध  संस्कृतिकर्मी (रंगकर्मियों -कलाकारों का साझा मंच)  केंद्र सरकार से  अपील  करती है कि  ऐसे उन्मादीऔर नकली राष्ट्रवादियो पर तत्काल अंकुश लगाया. अनीश अंकुर, जयप्रकाश, रमेश सिंह, सिकंदर-ए-आज़म, मृत्युंज शर्मा, राजन कुमार सिंह,   निवेदिता झा, जावेद् अख्तर, मोना झा, परवेज़ अख्तर, कुणाल, सुरेश कुमार हज्जू,  गौतम गुलाल ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है .