घर में शौचालय होता तो बच जाती जान..

शौच के लिए निकली स्कूली छात्रा की गैंग रेप के बाद हत्या

पुलिस ने पांच युवकों को लिया हिरासत मेंunnamed-4




एक और बदकिस्मत लड़की ने घर में शौचालय नहीं होने का दंश झेला और दरिंदों ने उसकी जान ले ली. घर से रोज की तरह सुबह शौच के लिए निकली नवीं की छात्रा जब काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की. पटना के फुलवारी शरीफ के परसा बाजार थाना इलाके में हुए इस सनसनीखेज मामले में लड़की का शव घर के पास के ही एक खेत से बरामद हुआ. दरिंदों ने हत्या के बाद छात्रा के शव को धान के पानी भरे खेत में छिपा दिया था.  सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने धान के खेत से अर्धनग्न हालत में पड़े शव को कब्जे में करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया . परिजनों ने छात्रा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया है . पुलिस ने इस मामले में आस पास गांव के पांच युवकों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है . मामला परसा बाजार थाना अंतर्गत शाहपुर गांव का है.

????????????????????????????????????

स्थानीय विधायक श्याम रजक परिजनों को ढांढस बंधाने शाहपुर गाँव पहुंचे. उन्होंने आला पुलिस अधिकारियो से बात कर कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.  अखिल भारतीय नव निर्माण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार ने सरकार से अविलम्ब हत्यारों की गिरफ्तारी कर फ़ास्ट ट्रैक से सजा दिलाने और दस लाख मुआवजा देने की मांग की है .

 

शौचालय होता तो नहीं जाती जान…

प्रधानमंत्री की बृहत एवं महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अगर आशा कार्यकर्त्ता रेणु देवी को मिलता तो आज उसकी बेटी दरिंदों का शिकार नहीं होती . यह कहना है मृतक के परिजनों का. शाहपुर गांव का यह दुर्भाग्य ही है कि लगभग तीन सौ की दलित आबादी वाला ये गांव प्रधानमंत्री की शौचालय योजना से कोसों दूर है . इसी गाँव की एक आशा कार्यकर्त्ता जहां एक तरफ ग्रामीणों में प्रधानमंत्री की शौचालय योजना को सफल बनाने के लिए गांव-गांव घूम कर लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए जागरूक कर रही है वही उसकी अपने घर में ही शौचालय नहीं है. शाहपुर गांव के लोगों ने बताया कि इस गांव में शौचालय बनाने के लिए कई अधिकारी आए और सर्वे का काम भी हुआ. शौचालय बनाने के लिए अधिकारियों ने कहा कि अपने पैसे से शौचालय का निर्माण करो और फोटो खींच कर आवेदन दो तब सरकार राशि देगी. ग्रामीणों ने रोषपूर्वक कहा कि वे आर्थिक रुप से  इतने सक्षम नहीं हैं कि अपने पैसे से शौचालय का निर्माण करा सकें .

 

रिपोर्ट- फुलवारी से अजीत