नन्हे फ़िल्म मेकरों से रौनक होगा भोजपुर


2 दिनों में बच्चों ने शूट किए 50 लघु फिल्में

आरा, 19 जनवरी. लगता है आने वाले समय मे भोजपुर जिला नन्हे फ़िल्म मेकरों से देश-दुनिया मे छाने वाला है. बच्चों को मिट्टी का लोंदा कहा गया है,मतलब उन्हें जैसा गढ़िए वे वैसा बन जाते है. बच्चों में क्रिएटिविटी के जरिये उनके अंदर कुछ अनोखा करने का प्रयास किया पिछले दो दिनों में कुछ फ़िल्म मेकरों ने आरा में. क्रिएटिव कार्यशाला के जरिये 2 दिनों में 50 फ़िल्म बच्चों से बनवाने की उनकी पहल तो पहले ऐसा लगा कि क्रिएटिविटी की ही अग्निपरीक्षा हो लेकिन दो दिनों में जो रिजल्ट आया सचमुच वे इस अग्निपरीक्षा पर खरे उतरे. बच्चों ने इस अग्निपरीक्षा पार कर सबको अचंभित कर दिया है. फ़िल्म मेकिंग व कविता लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन मशहूर कवि व लेखक निलय उपाध्याय ने प्रार्थना के बाद विद्यालय के समस्त बच्चों को सम्बोधित करते हुए जल संकट और गंगा जैसी पवित्र व जीवनदायिनी नदी के संकट और संरक्षण पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक जल के दोहन ने जमीन के ऊपर के जल स्रोतों को खत्म कर अंदर के जमा जलों में भी सेंध कर दिया है और पृथ्वी के अंदर की परतों तक वहाँ पहुंच गए है जहाँ आर्सेनिक की चट्टानें है. RO का जल आर्सेनिक खत्म नही करता और लगातार चट्टानों को बढ़ने से ऑक्साइड इस जल के साथ मिलकर उसे जहरीला बनाता है और हम इसे ही पी रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर एक ब्यक्ति प्रतिदिन 3 बार शौच जाता है तो 36 लीटर पानी खत्म होता है मतलब देश की आबादी अगर 1 अरब भी मां लें तो प्रतिदिन 36 अरब लीटर पानी बर्बाद हो रहा है.उन्होंने कहा कि ये अय्याशी कब तक चलेगी? उपस्थित लोग स्तब्ध थे और सचमुच इस बारे में चिंतन उनके चेहरे पर दिखने लगी. उनके चिंतन के बाद बच्चों ने वाटर वेस्ट पर भी एक लघु फ़िल्म बनाई.




गंगा जगाओ अभियान और जॉ पाल स्कूल आरा के तत्वावधान में कविता लेखन व फ़िल्म मेकिंग की दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन बच्चों के बीच सबसे पहले प्रदर्शित हुई क्रिएटिव टीम द्वारा बनाई गई फ़िल्म “वर्तुल”. फ़िल्म के पर्दे पर अपने आप को देख बच्चे एक अनोखी दुनिया मे चले गए. चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान के साथ उनका आत्मविश्वास नई ऊर्जा की उडान लेता दिखा.

कार्यशाला के दूसरे दिन भी बच्चों ने शेष बची हुई 25 फिल्मो को शूट किया. बच्चों ने ये सभी फ़िल्म मोबाइल कैमरे की मदद से शूट की. इसतरह दो दिनों में बच्चों ने 50 फिल्मो को कम्प्लीट किया. जिसमे कवितायें भी शामिल हैं. बच्चों द्वारा सभी शूट की गई फिल्मो को 20 जनवरी को दोपहर जॉ पॉल स्कूल, धनुपुरा के सभागार में प्रदर्शित किया जाएगा जिसे देखने के लिए पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और संस्कृति कर्मियों को आमंत्रित किया गया है. इस मौके पर कार्यशाला में शामिल बच्चों के परिजन भी शामिल होंगे.

आरा से अपूर्वा व सत्य प्रकाश सिंह की रिपोर्ट