हर हाल में बस्ते का बोझ कम करें स्कूल- CBSE

बच्चों को हो रही है बीमारियाँ rimg0024-650x250

बच्चे पढ़ने आते हैं न कि बीमार होने 




नियम का कड़ाई से पालन करें स्कूल 

अभिभावकों पर नहीं डालना है अतिरिक्त बोझ

बैग को रीपैक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए 

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) ने देशभर के सभी सी.बी.एस.ई. स्कूलों में  पढऩे वाले बच्चों को बस्ते के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए स्कूलों  को पत्र जारी करके बच्चों के बस्तों का बोझ कम करने के सुझाव दिए हैं. सी.बी.एस.ई. की ओर से स्कूलों को जारी पत्र में कहा गया कि बस्ते का बोझ विद्यार्थियों पर लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में अभिभावकों पर बिना कोई  अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले इस समस्या का समाधान किया जाए. बोर्ड इस बारे में पहले भी वर्ष 2006, 2007 व  2008 में बस्ते में से किताबें कम करने के सुझाव जारी कर चुका है. इतना ही नहीं बच्चों के कंधों पर पडऩे वाले बस्ते के बोझ को पूरी तरह से खत्म करने के लिए बोर्ड ने पहले भी स्कूलों को अपने यहां लॉकर की सुविधा शुरू करने का सुझाव दिया था लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई लिहाजा आज भी बच्चे भारी बस्ते का भोज अपने कंधे पर लटकाए कई बीमारियों के जाल फंसने को मजबूर है. बोर्ड ने सभी CBSE विद्यालयों को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द बस्ते का बोझ कम करें .

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स्कूलों को सुझाव

1-भारी स्कूल बैग के बोझ से होने वाले खतरे के बारे में बच्चों को जागरूक किया जाए. इसके लिए बच्चों को प्रार्थना सभा के अलावा एक्टीविटीज करवाई जाएं.

2-बच्चों को रोज अपना बैग रीपैक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि वह अनावश्यक किताबें और कापियां घर रख कर आएं.

3-स्कूल बैग का वजन सुनिश्चित करने के लिए रोज स्कूल बैग की जांच की जाए.

4-स्कूल में पीने योग्य साफ  पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि बच्चे अपने साथ लेकर आने वाली पानी की भारी बोतल से परहेज करें. रोज स्कूल में पीने के पानी की जांच की जाए.

5-टाइम टेबल को इस तरह से तैयार करें कि बच्चों को रोजाना सभी किताबें स्कूल लाने की जरूरत ही न रह जाए.

6-खेल के दौरान पहने जाने वाले कपड़े लाने की बजाय उन्हें स्कूल ड्रैस में खेलने दिया जाए.

7-बच्चों को दी गई असाइनमैंट और प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए अलग से समय दिया जाए.

8-घर से करके लाने के लिए दिए जाने वाले प्रोजैक्ट और असाइनमैंट को ग्रुप बनाकर स्कूल में ही बच्चों को पूरा करने के लिए कहा जा सकता है.

9-आठवीं क्लास के बच्चों के लिए जो पुस्तकें जरूरी हैं उन्हें वही लाने की सलाह दी जाए. अनावश्यक किताबें उन्हें न लगवाई जाएं.

10-पहली और दूसरी क्लास के बच्चों को होमवर्क न दिया जाए . इससे उन्हें बैग लाने की जरूरत नहीं रहेगी.

क्या कहते हैं अभिभावक

इन मुद्दों पर जब अभिभावकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन ही नियम को गंभीरता से लागू करे. निखिल के डी वर्मा ने बाताया कि पेरेंट्स तो अपने बच्चों की बेहतरी के लिए ही स्कूल भेजते हैं अब विद्यालय प्रशसन को ही देखना है कि बच्चे कैसे ख़ुशी ख़ुशी पढाई कर रहे हैं और वो कितना स्वस्थ हैं. बस्ते का बोझ उनके लिए आज कई संकट खड़े कर रहा है .आज जब डिजिटल माध्यमों से पढाई हो रही है तो बोर्ड ऐसे कारगर कदम क्यों नहीं उठा रहा है जिससे बच्चे को भारी स्कूल बैग से मुक्ति मिल जाए.

शिक्षकों के लिए सुझाव

1-प्रिंसिपलों द्वारा शिक्षकों को समझाना चाहिए कि वे बच्चों को किसी किताब को न लाने की वजह से सजा न दें. जरूरत से ज्यादा किताबें लाने से उन पर बोझ बढ़ता है.

2- टीचर्स को किताबों से पढ़ाने के अलावा दूसरे तरीके अपनाने और ढंूढने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

3-शिक्षक स्टूडैंट्स को ज्यादा कापियां लाने की बजाय लूज शीट लाने के लिए प्रेरित करें और टैस्ट कापी की बजाय खाली पेपर पर टैस्ट लें.

4-छात्रों को दो-दो की जोड़ी बनाकर आपस में किताबें बांट कर लाने के लिए प्रेरित किया जाए. इससे उनके बस्ते का बोझ कम होगा.

माता-पिता के लिए सुझाव

1-पेरैंट्स-टीचर मीटिंग के दौरान माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें हल्के और दो तनी वाले स्कूल बैग खरीदने के लिए सुझाव दिए जाएं.

2-प्राइमरी क्लास के बच्चे जब अपना बैग रिपैक करें तब माता-पिता उसकी निगरानी करें ताकि वह अनावश्यक स्टोरी बुक और अपने खिलौने न ले जाएं जिससे उनका बैग भारी हो.

3-बच्चों को अक्सर स्कूल बैग में फालतू की चीजें रखने का शौक होता है इसलिए उन्हें स्कूल बैग की सफाई के लिए प्रेरित किया जाए.

4-बच्चों के बैग का उनके कंधों की बजाय पीठ पर अधिक वजन होना चाहिए.