एप्प बनाएं और जीतें 50 लाख रुपये

नई दिल्ली : दुनिया के लिए मेक इन इंडिया एप्प विकसित करने का एक अभिनव अवसर! AmritMahotsav ऐप इनोवेशन चैलेंज 2021 में भाग लें, और आप जीत सकते हैं 50 लाख की राशि । 16 श्रेणियां के अंतगर्त बनने वाले एप्प को आप my gov पर जाकर या नीचे दिए लिंक पर खुद को रजिस्टर कर सकते हैं । https://innovateindia.mygov.in/app-innovation-challenge/केवल भारतीय उद्यमी और स्टार्ट-अप सूचीबद्ध के रूप में विभिन्न श्रेणियों में अपनी प्रविष्टियां जमा करने के पात्र हैं। हाई स्कूल और कॉलेज के छात्रों को भी भागीदारी के लिए माना जा सकता है क्योंकि इनमें से अधिकांश छात्र, विशेष रूप से जो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हैं, उभरते हुए उद्यमी हैं और प्रौद्योगिकी के आगामी रुझानों के अनुकूल होने वाले पहले व्यक्ति हैं। इसके अलावा, प्रतिभागियों को प्रत्येक टीम में 4 से अधिक प्रतिभागियों वाली टीमों में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अंतिम तिथि है 30 सितम्बर 2021 अमृत ​​महोत्सव ऐप इनोवेशन चैलेंज 2021 में निम्नलिखित 16 श्रेणियां शामिल हो सकती हैं: संस्कृति और विरासतस्वास्थ्यशिक्षासामाजिक मीडियाइमर्ज टेककौशलसमाचारखेलमनोरंजनकार्यालयस्वास्थ्य और पोषणकृषिव्यापार और खुदराफिनटेकमार्गदर्शनअन्यइन अनुप्रयोगों की पहचान करने के अलावा, प्रतिभागी इन ऐप्स को अधिक अनुकूलनीय और सभी के लिए उपयुक्त बनाने के लिए अपने विचारों में पिच कर सकते हैं, और प्रौद्योगिकी में प्रगति को बनाए रखने के लिए उभरती हुई तकनीकों को शामिल करने के तरीकों को शामिल कर सकते हैं, जिसके लिए व्यवसायों को अगले कुछ वर्षों के लिए एक दृष्टि की आवश्यकता होती है। प्रतिभागियों को उन ऐप्स की तलाश करने का भी सुझाव दिया

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कोविड ‘डिमेंशिया’ को तेज करेगा-क्लाइव कुकसन

वर्तमान में लगभग 55 मिलियन लोग मनोभ्रंश के साथ जी रहे हैं, नई दिल्ली : वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोविड ‘मनोभ्रंश महामारी’ को तेज करेगा। विशेषज्ञ इशारा करते हैं कि वायरस कुछ रोगियों में दीर्घकालिक मस्तिष्क क्षति का कारण भी बन सकता है। वर्तमान में लगभग 55 मिलियन लोग मनोभ्रंश के साथ जी रहे हैं, यह आंकड़ा दशक के अंत तक तक बढ़ने की भविष्यवाणी की गई है।लंदन में क्लाइव कुकसन द्वारा वैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि कोरोनोवायरस के मस्तिष्क पर अपक्षयी प्रभाव “मनोभ्रंश की महामारी” में आग में घी डालने का काम करेगा जो दशक के अंत तक को प्रभावित करेगा। डिमेंशिया संघों के वैश्विक महासंघ, अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल ने समस्या के पैमाने को बेहतर ढंग से समझने और इससे निपटने के तरीकों की सिफारिश करने के लिए एक विशेषज्ञ कार्य समूह का अनावरण किया।अब तक के तमाम अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस और इसके म्यूटेशन के कारण संक्रमितों के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसका असर कम समय या फिर लंबे वक्त के लिए भी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित एक तिहाई रोगियों ने कई तरह के तंत्रिका संबंधी लक्षणों का अनुभव किया। इसके दीर्घकालिक प्रभाव के तौर पर भविष्य में लोगों को स्ट्रोक जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है। एडीआई के मुख्य कार्यकारी पाओला बारबारिनो ने कहा, “हम लोगों को अनावश्यक रूप से डराना नहीं चाहते हैं, लेकिन दुनिया भर के कई डिमेंशिया विशेषज्ञ

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जेपी और लोहिया के विचार नहीं हटाये जा सकते -लालू

दिल्ली- लोहिया और जेपी के विचारों को अब जेपी विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाये जाने पर छात्रों की तीखी प्रतिक्रिया मिल रही है वहीं राजद के मुखिया ने इस खबर पर ट्वीट कर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा है कि जयप्रकाश जी के नाम पर अपनी कर्मभूमि छपरा में 30 वर्ष पूर्व जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।अब उसी यूनिवर्सिटी के सिलेबस से संघी बिहार सरकार तथा संघी मानसिकता के पदाधिकारी महान समाजवादी नेताओं जेपी-लोहिया के विचार हटा रहे है।यह बर्दाश्त से बाहर है।सरकार तुरंत संज्ञान लें । इधर पाठ्यक्रम से लोहिया और जेपी के विचार हटाने पर छात्र संघ भी आंदोलन के मूड में हैं ।

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जारी होगा 125 रुपया का सिक्का

पटना: “इस्कॉन (ISKCON) की स्थापना करने वाले और हरे कृष्ण भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक माने जाने वाले श्री भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 125 रुपये का विशेष स्मृति सिक्का जारी करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ये सिक्का जारी करेंगे। इसके पहले भी नेता जी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती पर भी 125 रुपये का विशेष स्मृति सिक्का जारी किया गया था ।

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आज से माध्यमिक शिक्षक पद के लिए करें आवेदन

32,714 पदों पर नियोजन के लिए आवेदन आज से बिहार में छठे चरण के नियोजन के तहत माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में 32714 पदों के लिए 18 अगस्त से 17 सितंबर तक आवेदन लिए जाएंग. जो अभ्यर्थी पहले आवेदन कर चुके हैं उन्हें आवेदन देने की जरूरत नहीं है. 30 जून 2019 की तिथि तक राज्य के उच्च माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालयों में सर्वाधिक रिक्तियां दरभंगा में 2804 और पटना में 2058 हैं. औरंगाबाद, पूर्वी चंपारण, भोजपुर, समस्तीपुर, नवादा, गया, नालंदा व रोहतास में एक-एक हजार से ज्यादा रिक्तियां हैं. सर्वाधिक रिक्तियां 19389 उच्च माध्यमिक स्कूलों में हैं जबकि माध्यमिक स्कूलों में रिक्तियों की संख्या 13325 हैं. कौन कर सकते हैं आवेदनइस नियोजन प्रक्रिया में पूर्व निर्धारित एसटीइटी-2011 में पास अभ्यर्थी जो 26 सितंबर 2019 तक नियुक्ति संबंधी जरूरी अर्हता रखते हों वे ही आवेदन के लिए योग्य होंगे. एसटीइटी 2011 पास अप्रशिक्षित अभ्यर्थी जो बीएड सत्र 2016-18 तक में नामांकित और पास हों और उनका रिजल्ट 26 नवंबर तक प्रकाशित हो चुका हो वे भी आवेदन कर सकते हैं.संशोधित नियमों के आलोक में माध्यमिक शिक्षक के समाजिक विज्ञान विषय के लिए इतिहास या भूगोल की तरह अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र में भी प्रतिष्ठा होने पर पांच अंक जोड़ने का निर्णय भी लिया गया है. नये शेड्यूल के अनुसार 18 से 29 सितंबर तक औपबंधिक मेधा सूची तैयार की जाएगी. 5 अक्टूबर तक औपबंधित मेधा सूची का अनुमोदन और 8 अक्टूबर तक औपबंधिक मेधा सूची का प्रकाशन किया जाएगा. 11 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आपत्तियां दे सकते हैं.

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जंगल पुकारते हैं ….जंगल गाथा

लेखक : गुंजन सिन्हा जंगल गाथा पुस्तक के बारे में…..यह गाथा है एक महाविनाश की – मेहनतकश मजदूरिन से वेश्या बनी बिरसी मुन्डाइन की, किसान से कैदी बने धनेसर उरांव की, तीन पीढ़ियों से विस्थापन झेल रहे सुघड़ खरवार की, बंजर बना दिए गए घनघोर जंगलों की, निरीह जंगली जानवरों की जो बिला वजह मारे गए, उन तितलियों की जो जंगली पगडंडियों पर गोल बना बैठती थीं, मंडल, कुटकू, कोयल, कोइना, हरया, कारो नदियों की.……जंगल पुकारते हैं. कभी अपने नैसर्गिक स्पर्श से हमें स्वस्थ कर देने के लिए, कभी अपने घाव, कष्ट, अपना क्षत-विक्षत अस्तित्व दिखाने के लिए. ..निजी अनुभवों और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित यह किताब जंगलों और उनसे जुड़े मुद्दों की बात करती है, जैसे – जंगलों का नाश, जानवर, अविकास, अंधविश्वास, आदिवासी, नक्सल, आबो-हवा, विस्थापन, डायन-हत्या, प्रकृति का निर्मम दोहन और इन सब के बीच मानव मन को चंगा करने की जंगलों की जादुई शक्ति.यह किताब उनके लिए है जिन्हें जिंदगी कोई भारी भरकम पुस्तक पढ़ने नहीं देती. उन्हें भी जंगल पुकारते हैं. यह पुकार कभी पिकनिक पर जाने की इच्छा के रूप में जगती है, कभी यूँही एक आवारगी जगाती है. इंसान के अन्दर यह खास आवारगी उसकी भटकन है, अपनी उदास रूह की तलाश में. आदिम इन्सान की रूह शहर और सभ्यता के रोजमर्रे में कहीं खो गई है.इस पुस्तक को पढ़ कर आपको जंगल की याद आएगी. अत्याचारों का शोर सुनाई देगा और उसके बीच किसी कोयल की कूक, किसी आमापाको की हूक भी सुनाई देगी. और सबसे बढ़ कर सुनाई

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विश्वविद्यालय में सोमवार से बढ़ेगी चहल-पहल

कैंपस हो रहा सैनिटाइज, नज़र अकादमिक काउंसिल की बैठक पर आरा,11 जुलाई. अनलॉक-4 के बाद अब विश्वविद्यालय सोमवार से खुलने जा रहा है. हालांकि अभी छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत ही रहेगी और कोरोना प्रोटोकॉल का भी पालन करना होगा. इसके लिए विवि प्रशासन ने कमर कस ली है. कैंपस को पूरे तरीके से साफ करके सैनिटाइज किया जा रहा है. कोरोना 2 में इस बार विवि के कुलसचिव सहित कई शिक्षक-कर्मचारी अपनी जान से हाथ धो बैठे. कोरोना को लेकर अभी भी विवि में दहशत का माहौल है. कई छात्र संगठनों और शिक्षकों ने विवि में विशेष कोरोना टीकाकरण कैम्प लगाने की मांग की है. 13 और 14 को अकादमिक कौंसिल और परीक्षा समिति तथा सिंडिकेट की प्रस्तावित बैठक पर सबकी नजरें टिकी होंगी. विवि में सम्बद्धता रद्द हुए कॉलेजों के छात्रों की डिग्री निर्गत करने का मामला गर्म रहने की उम्मीद है. ज्ञात हो कि कई छात्र विवि का चक्कर काट रहे हैं क्योंकि विगत कई सत्रों से छात्रों को अंक पत्र और डिग्री नहीं दी जा रही है. अब छात्रों की मुश्किल और भी बढ़ गयी है क्योंकि अब उन्हें पंजीकरण शाखा से भी सत्यापन करवाने के लिए दौड़ना पड़ रहा है. मगध विवि से आये प्रभारी कुलपति द्वारा वहां की इस व्यवस्था को यहां लागू करने से सभी में रोष है। इसके अलावा विवि में लंबित पड़े परीक्षाओं की तिथि घोषित करने की भी आशा है. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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पीएचडी में अनियमितता, राजभवन पहुंचा मामला

सीटों से ज्यादा हैं स्टूडेंट,नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण छात्रों को कोर्स वर्क में किया गया है फेलविभाग हेड प्रो रणविजय को कारण बताओ नोटिस के बाद भी कार्यशैली में सुधार नहीं4 पेपर के एग्जाम को 12 दिनों में पूरा कियापरेशान छात्रों ने बीच में ही छोड़ा कोर्स, बाहर राज्यों में लिया नामांकन आरा, 11 जुलाई. पीजी हिंदी विभाग के पीएचडी सत्र 2019 में दाखिला लिए हुए छात्रों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कुलपति प्रो राजेन्द्र प्रसाद के पास छात्रों तथा प्रोफेसरों की शिकायत पहुंचने के बाद विभाग के हेड प्रो रणविजय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि उसके बाद भी विभाग की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ है और हाल ही में कुलपति द्वारा जवाब-तलब किये जाने के बाद बिना पीजीआरसी की बैठक नियमपूर्वक सम्पन्न कराए ही सम्बंधित संचिका पर कमिटी सदस्यों द्वारा गुपचुप तरीके से हस्ताक्षर कराए जाने का मामला प्रकाश में आया है. जिसकी शिकायत विभाग के प्राध्यापक और सीनेटर प्रो दिवाकर पांडेय ने कुलपति और राजभवन लिखित रूप में भेजकर कुलाधिपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि विभाग का स्थायी सदस्य होने के बावजूद कोई सूचना उन्हें नहीं दी जाती है ना ही किसी प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनायी जाती है. ज्ञात हो कि पूर्व में पीएचडी रेगुलेशन 2009 के तहत हिंदी विभाग में बहुत से छात्रों का नामांकन करवा लिया गया लेकिन ना ही कोर्स वर्क पूरा हुआ ना ही उनकी परीक्षा ली गयी. बाद में विद्वत परिषद में मामला उठने

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आ गया नया आदेश: 12 जुलाई से खुल जाएंगे ये शिक्षण संस्थान

बिहार में सरकार की नई गाइडलाइन आज आ गई है। सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी है. सरकार ने कुछ कॉलेज और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को खोलने की छूट के अलावा कोई बड़ी छूट लोगों को नहीं दी है. तमाम पाबंदियां फिलहाल लागू रहेंगी और यह पाबंदियां अब 7 जुलाई से 6 अगस्त तक के लिए सरकार ने लागू की हैं . मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब बिहार में 11वीं कक्षा के ऊपर तक के स्कूल कॉलेज और शिक्षण संस्थान 50%अटेंडेंस के साथ खुल सकेंगे. उन्होंने फिर भी याद दिलाया है कि लोगों को सावधान रहना जरूरी है. सरकारी दफ्तरों में उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलेगा जो टीका लगवा चुके हैं. होटल और रेस्टोरेंट में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 50% लोग भोजन कर सकेंगे. pncb

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कार्डबोर्ड पर जब कुंचियों ने शब्दों को दिया रंग तो बागी बन गयी तख्तियाँ

19वें दिन भी आन्दोलन जारी,भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मिला समर्थन AITA ने वेबिनार के जरिये किया आन्दोलन का समर्थन आरा : 19 जून. भोजपुरी पेंटिंग के सम्मान के लिए भोजपुर संरक्षण मोर्चा द्वारा 19वें दिन भी आन्दोलन जारी रहा. कलाकारों ने 19वें दिन पेंटिंग के तरीके को बदल शब्दों में रंग दिया और स्टेशन परिसर आरा में स्थिर प्रदर्शन किया. 18 दिनों से भोजपुरी कला की कलाकृत्तियों को उकेरने वाली कुंचियों ने शब्दों के आकार को गढ़ा और उसे नारे का रूप दिया. कार्डबोर्ड पर चित्रकारों ने इसे पहले लिखा और फिर उसे तख्तियों की तरह हाथों में ले शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया. ये लिखे थे नारे:“भोजपुरी संस्कृति जिंदाबाद,” “भोजपुरी कला संस्कृति को मान दो”, “हमको हमारा स्थान दो भोजपुरी कला संस्कृति की उपेक्षा बंद करो”, “हमको यह अभिमान है जारी यह अभियान है,” भोजपुरी कला का सम्मान करें”, “मान बढ़ाव शान बढ़ाव भोजपुरी के अभिमान बढ़ाव” आदि नारों को भोजपुरी कला संरक्षण मोर्चा से जुड़े चित्रकारों ने कार्डबोर्ड पर अंकित किया और उसके बाद मोर्चा के सभी सदस्यों ने स्थिर प्रदर्शन किया. बताते चलें कि शुक्रवार को रेलवे की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों से मिलकर उन्हें ट्रायल के लिए पेंटिंग बनाने का मौखिक प्रस्ताव रखा था लेकिन आंदोलनकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने बोला कि जबतक कोई भी लिखित प्रस्ताव हमें नही मिलता न तो पेंटिंग सम्बन्धी कार्य ही होगा और न ही आन्दोलन रुकेगा. वरिष्ठ चित्रकार और मोर्चा के कोषाध्यक्ष कमलेश कुंदन ने कहा कि पूरे शाहाबाद के रेलवे प्लेटफॉर्म पर

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