बिहार समेत 25 राज्यों के कलाकारों ने किया 4 घण्टे का सांकेतिक उपवास

आरा. गुरुवार को बिहार समेत 25 राज्यों के कलाकारों ने ऑल इंडिया थियेटर काउंसिल(AITC) के बैनर तले 4 घण्टे का उपवास कर सरकार का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बाद कलाकारों की सरकार द्वारा उपेक्षा को लेकर जिला मुख्यालय आरा में भी यह सांकेतिक उपवास किया गया. लॉक डाउन में जिस तरह मजदूरों से लेकर आम नागरिक तक की घरेलू स्थिति बद से बदतर हो गयी उससे भी बुरी स्थिति कलाकारों की हो गयी. सरकारी योजनाओं से लेकर स्वास्थ्य,चिकित्सा और भयावह परिस्थितियों में जो जनता से लेकर सरकारी बाबुओ की बातों को प्रचारित और प्रसारित करने का काम करते थे, आज वे तमाम कलाकार हाशिये पर हैं. ऑल इंडिया थियेटर काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक मानव ने कहा कि सरकार ने भले ही 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित कर दिया है लेकिन कलाकारों का उसमे कोई जिक्र नही है. यही नही जिन कलाकारों ने कोरोना महमारी के पहले जिन सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का काम किया था उनका पारिश्रमिक भी अबतक कलाकारों को विभागों की ओर से नही दिया गया. जिसको लेकर काउंसिल ने आपत्ति जताया. काउंसिल ने कलाकारों के लिए कई मांगो को सरकार के सामने रखा. बताते चलें कि जिला मुख्यालय में चले इस मुहिम में देश के लगभग 25 राज्यों के कलाकारों ने सुबह 7 बजे से 11 बजे तक “मेरी भी सुध लो सरकार” कार्यक्रम के माध्यम से सांकेतिक उपवास रख अपनी पीड़ा का इजहार किया.माँगें-१) जिलावार कलाकारों की रोस्टर सूची बनाई जाय2) डिग्री प्राप्त व प्रशिक्षित कलाकारों को सरकारी

Read more

अफवाहों पर लगाम लगाते पेंटिंग्स

आरा,11 मई. कला किसी भी काल के लिए सशक्त माध्यम रहा है. जब अफवाहें अपना जड़ जमाना शुरू करती हैं तो कला ही एक ऐसा माध्यम है जो इन बुराई रूपी जड़ो को उखाड़ फेंकती है और समाज को सच्चा पथ दिखाती है. सोशल मीडिया पर पेंटिंग्स ने कुछ ऐसा ही रंग दिखाया है. वर्तमान समय में जहां पूरा देश कोरोना वायरस से पीड़ित है वही एक और वायरस ने समाज में घर कर लिया है. यह वायरस है गलत अफवाह, जो  covid-19 से भी तेजी से फैल रहा है.  अफवाह रुपी यह वायरस सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत तेजी से फैल रहा है. दरअसल यह अफवाह आरोग्य सेतु एप्प को लेकर है.भारत सरकार ने भारतवासियों से  covid-19 से बचने और जागरूकता के लिए आरोग्य सेतु अनिवार्य रूप से डाउनलोड करने को कहा है. इस एप्प को डाउनलोड करने के बाद ब्लूटूथ ऑन रखना पड़ता है. इस एप्प को लेकर अफवाह यह फैल रही है कि इसके ब्लूटूथ और जीपीएस ऑन रखने के कारण डाटा असुरक्षित है. हालांकि भारत सरकार ने इस संदर्भ में पहले ही बता दिया है कि किसी भी व्यक्ति के निजी जानकारी को किसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा. बावजूद इसके यह अफवाह तेजी से फैल रहा है. ऐसे बेतुके अफवाहों को रोकने के लिए भोजपुर जिला के नोडल अफसर डॉ कृष्ण चंद्र चौधरी ने स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी दी है. भ्रांतियों को फैलने से रोकने के लिए एचडी जैन कॉलेज के स्वयंसेवक, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में सोशल मीडिया के माध्यम

Read more

उषा गांगुली के निधन से रंग जगत मर्माहत

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित प्रख्यात रंगकर्मी उषा गांगुली का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उषा गांगुली ने अपनी आखिरी सांस कोलकाता में ली. करीबियों के अनुसार उषा गांगुली का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. उषा गांगुली रीढ़ की हड्डी की समस्या से लंबे वक्त से परेशान थीं. उषा गांगुली का जन्म 1945 में राजस्थान में हुआ था, जबकि उनकी पढ़ाई कोलकाता में हुई. रंगमंच में उषा गांगुली के अतुल्य योगदान के चलते उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।  साल 1976 में उषा ने ‘रंगकर्मी’ नामक एक संस्था का गठन कर महाभोज, होली, रुदाली, कोट मार्शल जैसे नाटकों के मंचन किया. अपने नाटकों के लिए उषा हमेशा याद रखी जाएंगी. उषा गांगुली का पहला नाटक ‘मिट्टी की गाड़ी’ था. उषा गांगुली कोलकाता के एक कॉलेज में हिंदी की शिक्षिका भी थीं. उषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है. उन्होंने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था. बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया और देश विदेश में ख्याति अर्जित की. उषा गांगुली के निधन पर बिहार के रंगकर्मियों ने भी शोक व्यक्त किया है .निर्माण कला मंच के संजय उपाध्याय ने कहा कि उनके देहावसान से समस्त रंग-विरादरी, सांस्कृतिक-समाज, एवं साहित्यिक-महकमा बेहद मर्मांन्तिक है. उषा दी के रूप में मशहूर उषा गांगुली को निर्माण कला मंच,पटना की तरफ़ से सादर श्रद्धांजलि देते हैं. नाटककार हृषिकेश सुलभ

Read more

कोरोना प्रभावित ग्रामीण कलाकारों को मिलेगी आर्थिक मदद

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग देगा बिहार के ग्रामीण कलाकारों को प्रोत्‍साहन कोरोना संकट के बीच बिहार के कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग ने ग्रामीण कलाकारों की मदद की पहल की है. कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि यह बिहार के उन कलाकारों के लिए है जो ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं और अपनी आजीविका हेतु पूर्ण रूप से कला लोक कला के प्रदर्शन पर निर्भर हैं. इसे लेकर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग युवा विभाग ने एक पत्र जारी किया है. इस बारे में मंत्री ने बताया कि आधार कार्ड में दर्ज पता ग्रामीण क्षेत्र तय करने का आधार होगा. इसके तहत बिहार की कोई भी प्रदर्शनकारी लोक कला, लोक वाद्य यंत्र, वादन, एकल नृत्य, एकल लोकगायन आदि सम्मिलित किया जा सकता है. पत्रता के संबंध में तथा प्राथमिकताएं तय करने के संबंध में निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार बिहार सरकार के कला संस्कृति एवं युवा विभाग का होगा. किसी भी तरह के फिल्मी गीतों अथवा फिल्मी गीतों पर आधारित नृत्य का वीडियो इस योजना के लिए वैध नहीं होगा. प्रमोद कुमार ने कलाकारों से अपील की है कि वह कोरोना महामारी की रोकथाम हेतु सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम जागरूकता तथा इस महामारी के संबंध में संबंधित बचाओ उपायों से संबंधित अपनी कला प्रस्तुति का 15 से 20 मिनट का वीडियो अपने स्थान पर रहकर तैयार कर विभाग द्वारा जारी ईमेल आईडी culturebihar@gmail.com पर अटैच या अपलोड कर भेजें. कला संस्कृति एवं खेल मंत्री ने विभागीय पत्र के हवाले से कहा कि प्रस्तुति की रिकॉर्डिंग के समय

Read more

रंगनगरी आरा हुआ रंगमय, कलाकारों से पटा शहर

17 राज्यों के कलाकारों ने निकाला रँगजुलूस, रंग बिरंगी वेशभूषा और कलाओं ने सबको मोहा आरा, 5 मार्च. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव 2020 चौथे दिन शहर में भारत के 17 राज्यों से आयी नाट्य दलों ने रंगयात्रा निकाला जो जैन स्कूल से होते हुए गोपाली चौक, जेल रोड, शिवगंज, बस पड़ाव भिखारी ठाकुर नुक्कड़ स्थल के पास पहुँचा. जहाँ देश के कोने कोने से आये कलाकारों ने भिखारी ठाकुर के के मूर्ति पर माल्यार्पण किया और वहाँ से पुनः शिवगंज आते हुए मठिया, महावीर टोला, शहीद भवन और V-मार्ट होते हुए जैन स्कूल आकर समाप्त हुआ. रँगजुलूस का नेतृत्व आरा रंगमंच के कलाकरों के साथ जैन स्कूल कमिटी और श्री आदिनाथ ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने भी किया. इस रँगजुलूस मे मुंबई से आई भोजपुरी अभिनेत्री व टेली कलाकार श्यामली श्रीवास्तव ने जब आगन्तुक कलाकारों के साथ पैदल मार्च कर उनके कदम से कदम मिलाया तो देखने वाले हैरान हो गए. बता दें श्यामली आरा की ही बेटी है और आरा के रंगमंच पर उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत की थी. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव 2020 के चौथे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन रितेश कुमार सिंह प्रदेश सचिव युवा जदयू, मुख्य अतिथि अमित केसरी समाजसेवी, विशिष्ट अतिथि डॉ पी सिंह सर्जन, बचपन प्ले स्कूल डायरेक्टर अभिमन्यु सिंह, विशिष्ट अतिथि मनोज सिंह ( एन आर आई समाजसेवी भारतीय संघ दुबई के उपाध्यक्ष) व उदय सिंह (गन्ना आयुक्त बिहार) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. अपने सम्बोधन में उद्घाटनकर्ता रितेश कुमार सिंह

Read more

‘चांदी के जूते’ ने गुदगुदाया, ‘दुःख-दरिया’ ने भरा आंखों में सैलाब

शताब्दी समारोह के दूसरे दिन ‘दुख दरिया’ और ‘चांदी के जूते’ ने दिया ब्यापक सन्देश आरा. जैन स्कूल शताब्दी समारोह सह भोजपुर नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रम के साथ 4 नाटकों का मंचन सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत “नमो नमो” गाने पर जैन स्कूल के बच्चो ने सामूहिक नृत्य के जरिये किया. संस्कृतिक सन्ध्या की दूसरी प्रस्तुति हर्षिता विक्रम ने ‘रंग सारी गुलाबी चुनरियां रे’ लोकगीत पर कर अपना जलवा बिखेर दिया. उसके बाद असम के कलाकारों के द्वारा लोक नृत्य बिहू की प्रस्तुति ने आयोजन स्थल पर उपस्थित सभी लोगों के अंदर सांस्कृतिक ऊर्जा भर दी. सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद नाटकों का दौर चला. दूसरे दिन की सन्ध्या 4 नाटकों का मंचन किया गया. DMC एक्टिंग अकादमी आरा के कलाकारों के द्वारा रंजीत कपूर लिखित नाटक ‘चांदी का जूता’ किया गया. यह नाटक देश के कोने कोने से आये कलाकारों के प्रदर्शन मात्र के लिए था. यह नाटक प्रतियोगिता में नही था. नाटक का निर्देशन ओपी कश्यप ने किया था,संगीत राजा बसंत बहार,हर्षिता विक्रम व उनके साथी कलाकार का था. प्रकाश परिकल्पना ओपी पांडेय व आलोक सिंह का था. नाटक की मुख्य भूमिका में ओपी कश्यप ने बेहतरीन अभिनय किया और अपने अभिनय से दर्शकों को लोट-पोट कर दिया. वही मुनीम और लड़की के बाप में रोल में अंकित ने शानदार अभिनय से खूब तालियां बटोरी. नाटक का सूत्रधार बना , बहु बनी अदिति राज, और माँ के रोल में स्मृति भारती ने दर्शकों के बीच अपनी बेहतरीन अदाकारी का परिचय दिया. अन्य कलाकारो में मुकेश,

Read more

जैन स्कूल के शताब्दी समारोह का हुआ आगाज

कई शिक्षाविदों सहित देश के कई प्रदेश से आये कलाकारों ने दी प्रस्तुति पहले दिन 3 नाटकों का हुआ मंचन आरा. श्री आदिनाथ ट्रस्ट एवं हर प्रसाद दास जैन स्कूल शताब्दी समारोह का आगाज रविवार को धूमधाम से हुआ. भोजपुर नाट्य महोत्सव से हुआ या नाट्य महोत्सव 01-05 मार्च तक जैन स्कूल के प्रांगण में ही चलेगा. रविवार से प्रारंभ हुए इस महोत्सव का उद्घाटन VKSU के वाइस चांसलर प्रोफेसर देवी प्रसाद तिवारी एवं प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष आलोक चंद्र जैन ने किया. VC ने अपने संबोधन भाषण में का शिक्षण संस्थानों की दयनीय होती व्यस्था पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि माता पिता बच्चों को जन्म देते हैं तो उनका सबसे बड़ा कर्तव्य और धर्म अपने बच्चों को समुचित शिक्षा देना होता है. बच्चों की प्रारंभिक पाठशाला माता-पिता और उसका घर ही होता हैं जहां उनके चरित्र का निर्माण होता है. यदि प्रारंभ से ही बच्चों पर ध्यान दिया गया तभी नैतिकता का विकास होगा. वही आलोक चंद्र जैन ने कहा कि पुराने जमाने में भोजपुर में स्कूल नहीं होने के कारण कई लोग नहीं पढ़ पाते थे. उन्हें जिले के बाहर जाना पड़ता था. ऐसे मौके पर दानवीर हर प्रसाद दास जैन ने जैन स्कूल खोलने के लिए जमीन देकर जैन स्कूल जैसा शिक्षण संस्थान खुलवाया. यहां से पास हुए बच्चे आज देश-विदेश में जिले का नाम रौशन कर रहे हैं इस मौके पर VKSU के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रो. रणविजय कुमार सिन्हा ने कहा कि देश में जो शाश्वत कर्म पंडित मदन मोहन मालवीय

Read more

हड़ताली कला शिक्षकों ने कर डाला अनोखा विरोध

आरा. आज अपनी मांगो को लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर आहुत हड़ताल के दौरान , आरा जे पी स्मारक के समक्ष चल रहे धरने में, ललित कला शिक्षको ने रचनात्मक भुमिका निभाई. चित्रकार शिक्षकों ने मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के शोषणकारी छवि व अपनी मांगो के लिए आंदोलन करते शिक्षकों को कार्टून के रुप में बनाया. कार्टून में सरकार के शोषणकारी नीतियों को व्यंगात्मक रुप में चित्रित किया गया हैं. सरकार किस तरह शिक्षकों के मानवीय और संवैधानिक अधिकारों को कुचल रही है यह कार्टून में बनाया गया. कार्टून में यह भी दिखाया गया कि शिक्षक अपने अधिकार हासिल कर के रहेंगे. कार्टून में , वेतन दो सम्मान दो वर्ना गद्दी छोड़ दो , वेतन चोर गद्दी छोड़ , जैसे नारे तथा राज्य कर्मी का दर्जा दो , जीपीएफ का लाभ दो आदि मांगों को लिखा गया था. कार्टून बनाने वालों में , राकेश कुमार , रौशन राय , राज कुमार , प्रकाश कुमार वर्मा , आर पी निराला आदि कला अधयॎपक थे. पटना नाउ ब्यूरो

Read more

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष : मातृभाषा जोड़ती है, तोड़ती नहीं

आज स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय आरा में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में एक समारोह का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता भोजपुरी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ नीरज सिंह ने की. मुख्य अतिथि के रूप में डी के कॉलेज, डुमराँव की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ उषा रानी एवं एस बी कॉलेज, आरा की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ पूनम कुमारी उपस्थित थी. भोजपुरिया माई के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ. सबसे पहले छात्रों ने अपनी बातें रखी. अंग्रेजी विभाग की छात्रा ज्योति ने मातृभाषा के प्रेम पर प्रकाश डाला. वहीं अंग्रेजी विभाग के ही छात्र हरीश ने कहा कि आज कुछ लोग भोजपुरी बोलने में हीन भावना के बोध से ग्रस्त हो जाते हैं, यह गलत बात है. छात्र उत्सव राज ने मातृभाषा भोजपुरी में घुस रही अश्लीलता की समस्या पर अंकुश लगाने की चर्चा की. दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ किस्मत कुमार सिंह ने भोजपुरी में व्याकरण निर्माण की आवश्यकता जताई. अल-हफ़ीज़ कॉलेज के हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ जवाहर पांडेय ने कहा कि मातृभाषा भोजपुरी को लोग बोली का दर्जा देकर इसकी सीमा को सीमित कर रहे हैं, जो अच्छी बात नहीं. शोध छात्र रवि प्रकाश सूरज ने मातृभाषा के महत्त्व पर चर्चा करते हुए याद दिलाया कि 22 फरवरी को ही भोजपुरी की पहली फ़िल्म ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो’ आई थी. अध्यक्षता कर रहे डॉ नीरज सिंह ने मातृभाषा को संकीर्ण दायरे से बाहर निकालकर उसके महत्त्व को स्थापित करने की बात की. उपस्थित लोगों में डॉ चन्द्रशेखर सिंह, सुभाष चन्द्र सिंह,

Read more