बिहार की झोली में 13 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

संगीत नाटक अकादमी अवार्ड में हृषिकेश सुलभ, सुमन झा, रंजना कुमारी झा, मैथिली ठाकुर और सुदीपा घोष प्रमुख दिसंबर में  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ये पुरस्कार दिल्ली में दिए जाएंगे विशेष अलंकरण समारोह: छत्तीसगढ़ की तीजन बाई व ममता चंद्राकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित संगीत, नाटक और नृत्य के क्षेत्र में पिछलेतीन साल के लिए घोषित संगीत नाटक अकादमी अवार्ड में बिहार के 13 कलाकारों का चयन हुआ है. इनमें चर्चित नाटककार और रंगकर्मी हृषीकेश सुलभ, ठुमरी गायिका कुमुद झा दीवान, लोकगायिका रंजना झा और मैथिली ठाकुर भी शामिल हैं. संगीत नाटक अकादमी (दिल्ली) के सचिव अनीश पी राजन ने शुक्रवार शाम साल 2019, 2020 और 2021 के अवार्ड की अधिसूचना जारी की. हृषीकेश सुलभ को नाट्य लेखन, नीलेश्वर मिश्र को अभिनय, मिथिलेश राय को निर्देशन के लिए अकादमी अवार्ड मिलेगा. 13 कलाकारों में पांच बेटियां हैं. वरीय पुरस्कारों में कुमुद झा दीवान और रंजना झा और बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की सूची में भरतनाट्यम की कलाकार सुदीपा घोष, लोकनृत्य के सुपरिचित नाम जितेन्द्र चौरसिया, मैथिली ठाकुर व अभिनेत्री रूबी खातून शामिल हैं. 90 वर्षीय अभिनेता, निर्देशक गणेश प्रसाद सिन्हा, 75 वर्षके अभिनेता-निर्देशक सुमन कुमार, लोकगीतों के जाने-मानेनाम भरत सिंह भारती और ध्रुपद गायक रघुवीर मलिक का चयन अमृत अवार्ड के लिए किया गया है. युवा पुरस्कार के लिए 25 हजार जबकि संगीत नाटक अकादमी और अमृत अवार्ड धारियों को एक-एक लाख रुपये, ताम्र पत्र और अंगवस्त्र दिए जाएंगे. संगीत नाटक अकादमी ने 86 कलाकारों के लिए भारत की आजादी के

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अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बिहार को लेकर ये क्या कह दिया!

बिहार के अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए एक्टर फिल्म बाजार में बिहार पवेलियन का उद्घाटन सचिव, कला, संस्कृति और युवा विभाग बंदना प्रेयषी ने किया किया स्वागत बिहार फिल्म नीति पर विचार-विमर्श के लिए सचिव ने किया आमंत्रित 20 से 28 नवंबर 2022 तक गोवा में चल रहा है 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव बिहार सरकार द्वारा हाल ही में की गई पहल, बेहतर सुरक्षा परिदृश्य, तेजी से कनेक्टिविटी के बारे में भी बताया, जिससे बिहार में फिल्म उद्योग आकर्षित हो. उन्होंने रचनात्मकता को राज्य में बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समर्थन का आश्वासन दिया और आगामी बिहार फिल्म नीति पर विचार-विमर्श के लिए त्रिपाठी को अपनी अगली बिहार यात्रा पर पटना आमंत्रित किया. बंदना प्रेयषी,आईएएस, सचिव, कला, संस्कृति और युवा विभाग, बिहार सरकार ‘अनछुए रमणीक स्थानों और फिल्म निर्माण की अपार संभावनाओं वाले बिहार, को पहले ही फिल्म बाजार में भाग लेना चाहिए था’. फिल्म उद्योग के जाने-माने कलाकार पंकज त्रिपाठी ने 20 से 28 नवंबर 2022 तक गोवा में चलने वाले 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम द्वारा आयोजित फिल्म बाजार में बिहार पवेलियन का उद्घाटन करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की.पंकज त्रिपाठी, जो कि बिहार से ही ताल्लुक रखते हैं, ने कड़ी मेहनत, प्रतिभा और जमीन से जुड़े अभिनय कर फिल्म जगत क्षेत्र में अपना और बिहार का नाम रौशन किया है. बंदना प्रेयषी, आईएएस, सचिव, कला, संस्कृति और युवा विभाग, बिहार सरकार ने इस अवसर पर पंकज त्रिपाठी को गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया. बिहार पवेलियन

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64 योगिनियों पर है आधारित अनिता की कलाकृति

पांच दिनों में दिखी योगिनी के विभिन्न स्वरूपसामाजिक संस्कृति की बहुस्तरीय भावना को दर्शाती एकल चित्र प्रदर्शनीश्याम शर्मा ,मिलन दास ,अनिल बिहारी अजय पाण्डेय चंद्रभूषण श्रीवास्तव ,मजहलाई ने आयोजन को सराहा राजधानी पटना में पांच दिनों अनीता कुमारी की चित्र श्रृंखला योगिनी को दर्शकों को खूब प्रशंसा मिली. चित्रकला में अपना स्थान ख़ास बनाने वाली अनीता कुमारी की एकल चित्र प्रदर्शनी में पौराणिक महत्ता की योगिनी को प्रस्तुत किया है. ललित कला अकादमी में आयोजित इस एकल चित्रकला प्रदर्शनी का में अब तक कई चित्रकार शिरकत कर चुके हैं. प्रसिद्ध कलाकार मिलन दास अनिल बिहारी दर्शक के रूप में आए इनके साथ-साथ पटना आर्ट कॉलेज के प्राचार्य अजय पाण्डेय ,सहायक प्रोफेसर चंद्रभूषण श्रीवास्तव और मजहलाई एवं कलाकार संजय सिंह अमित कुमार,और कॉलेज के छात्र छात्राएं भी शामिल हुए. मिलन दास एवं अन्य बिहारी ने प्रदर्शित चित्रों को सराहा और उसकी बारीकियों पर भी चर्चा की. वहीँ मिलन दास ने कहा कि इनकी पेंटिंग में जो सबसे ख़ास बात है वह है संयोजन जो किसी भी चित्रकार को अपनी ओर आकर्षित करता है. वहीँ आर्ट कॉलेज प्रोफेसर चंद्रभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि समकालीन समाज की झलक इन चित्रों में दिखती है. अमरेश कुमार,रश्मि सिंह,जितेंद्र मोहन,रामू कुमार संजय कुमार,प्रमोद रजक समेत तारकेश्वर और संगीता सिन्हा  चित्रकारों ने अनीता की पेंटिंग को सराहा.   अनीता ने बताया कि योगिनी एक प्रतीकात्मक चिन्ह है जिस पर काम करते हुए मैं अपने कामों में आनंद की प्राप्ति करती हूँ. नारी समाज की पवित्र प्रतीक है क्योंकि पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द घूमती है. मेरी कला

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पटना पुस्तक मेले में  जाली ‘रेत समाधि’ बेचते दो विक्रेता गिरफ्तार

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित है मशहूर कथाकार गीतांजलि श्री का उपन्यास  आधिकारिक प्रकाशक राजकमल प्रकाशन की शिकायत पर पुलिस ने उठाया कदम बुकर मिलने के बाद से ही इस उपन्यास की जाली प्रतियां छापी और बेची जा रही हैं बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को दो पुस्तक विक्रेता  मशहूर कथाकार गीतांजलि श्री के बहुचर्चित उपन्यास ‘रेत समाधि’ की जाली प्रतियां बेचते हुए गिरफ्तार किए गए. दोनों विक्रेताओं को यहां के गांधी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले से गिरफ्तार किया गया. स्थानीय पुलिस ने यह कार्रवाई राजकमल प्रकाशन समूह के पटना शाखा कार्यालय के प्रबंधक वेद प्रकाश की शिकायत पर की.   ‘रेत समाधि’ अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास है. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह उपन्यास हिंदी सहित किसी भी भारतीय भाषा की पहली कृति है जिस ने यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल किया है.  राजकमल प्रकाशन समूह के पटना शाखा कार्यालय के प्रबंधक वेद प्रकाश ने बताया कि राजधानी के गांधी मैदान में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ‘रेत समाधि’ की जाली प्रतियों के बिकने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस के पास शिकायत की थी. जिसके बाद शनिवार को गांधी मैदान पुलिस थाना के दो अधिकारियों, थाना प्रभारी कुंती कुमारी और उप निरीक्षक अरुण कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय पुस्तक मेले से एंजेल बुक हाउस, रायपुर (छत्तीसगढ )  और आर्यन बुक सेलर, दिल्ली के स्टाल संचालकों को गिरफ्तार किया गया. मौके पर एंजेल बुक हाउस के संचालक प्रकाश मंडल के पास से रेत समाधि की नौ जाली प्रतियां भी बरामद की गयीं. जबकिआर्यन बुक

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युवा रचनाकार अनूप की कविता ‘पुरुष’

पुरुष मैं पुरुष हूँऔर मैं भी प्रताड़ित होता हूँमैं भी घुटता हूँ पिसता हूँटूटता हूँ, बिखरता हूँभीतर ही भीतररो नहीं पाता, कह नहीं पातापत्थर हो चुका,तरस जाता हूँ पिघलने को,क्योंकि मैं पुरुष हूँ ! मैं भी सताया जाता हूँजला दिया जाता हूँउस “दहेज” की आग मेंजो कभी मांगा ही नहीं था,स्वाह कर दिया जाता हैमेरे उस मान सम्मानको तिनका तिनकाकमाया था जिसे मैंनेमगर आह भी नहीं भर सकताक्योंकि पुरुष हूँ ! मैं भी देता हूँ आहुति“विवाह” की अग्नि मेंअपने रिश्तों कीहमेशा धकेल दिया जाता हूँरिश्तों का वज़न बांध करज़िम्मेदारियों के उस कुँए मेंजिसे भरा नहीं जा सकतामेरे अंत तक भीकभी दर्द अपना बता नहीं सकताकिसी भी तरह जता नहीं सकताबहुत मजबूत होने काठप्पा लगाए जीता हूँक्योंकि मैं पुरुष हूँ ! सुना है जब मन भरता हैतब वो आंखों से बहता है“मर्द होकर रोता है”“मर्द को दर्द कब होता है”टूट जाता है मन सेआंखों का वो रिश्तासब कुछ देकर बन नहीं पाता फरिश्ताक्योंकि मैं पुरुष हूँ ! –अनूप नारायण सिंह

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सहजतावाद के पुरोधा कवि थे सोमदेव

मिथिला की गढ़ी थी नई परिचिति मैथिली और हिंदी भाषा के थे नामी साहित्यकार शाहाबाद के आरा के रहने वाले थे उनका मूल नाम गौरी शंकर प्रसाद था पग पग पोखरि माछ मखान सरस बोल मुस्की मुख पान विद्या वैभव शांति प्रतीक सरितांचल श्री मिथिला थीक संजय मिश्र,दरभंगा मिथिला की ये परिभाषा गढ़ने वाले साहित्यकार सोमदेव नहीं रहे. ये कविता लोग सुनते आए हैं लेकिन अधिकांश को नहीं पता कि मिथिला को इस तरह स्मरण करने वाले उनके अपने साहित्यकार सोमदेव ही ठहरे. जीवन की आपा धापी में व्यस्त लोगों को पता न चला कि कब ये कविता जन स्मृति में दरभंगा की पहचान बन गई. लापरवाही इतनी कि बिरले ही जानते हों कि सोमदेव शाहाबाद जिले के थे. 05 मार्च 1934को उनका जन्म श्रीवास्तव परिवार में हुआ. उसके बाद मातृक (ननिहाल) दरभंगा जिले के जयंतीपुर दाथ गांव का नेओरी टोला। दरभंगा में ही बस जाना हुआ। मैथिली के शीर्ष साहित्यकारों में शुमार हुए. मैथिली के अलावा हिंदी साहित्यकार के रूप में ख्याति अर्जित की. साल 2022 के 14 नवंबर को उनका देहांत हुआ और पटना के बांस घाट पर अंतिम संस्कार. ये अपने पीछे पुत्र हर्षवर्धन और डा. अमित वर्धन सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं. उनका मूल नाम गौरी शंकर प्रसाद था. मैथिली साहित्य में सस्पेंस, थ्रिलर और जासूसी कथावस्तू का दृढ़तम समावेश उन्होंने किया. होटल अनारकली और चनोदाय नामक उपन्यास से मैथिली साहित्यकाश में छा गए. काल ध्वनि नामक कविता संग्रह के जरिए उन्होंने सहजतावाद नामक नई विधा को स्थापित किया. द्रौपदी – बीसम शताब्दी, आगि

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आचार्य सोमदेव को विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग में दी गई श्रद्धांजलि

सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के थे अच्छे विद्वान गुरु आचार्य सोमदेव का जाना शून्य पैदा कर गया विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के द्वारा प्रो रमेश झा की अध्यक्षता में आचार्य सोमदेव के निधन के अवसर पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सभी शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया. आरम्भ में आचार्य सोमदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करते हुए प्रो रमेश झा ने कहा की सोमदेव मैथिली एवं हिन्दी भाषा के अच्छे विद्वान थे. उन्होंने महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय में कई दशकों तक विद्यार्थियों को हिन्दी के यसस्वी प्राध्यापक के रूप में भी अपनी परिचिति बनाये हुए थे. प्रो दमन कुमार झा ने कहा कि वे मेरे गुरु थे. वर्ग मे पढ़ाने  के साथ साथ बहुत सारी संस्मरण सुनाते रहते थे. कभी पोथी लेखन प्रसंग, कभी कवि सम्मलेन प्रसंग,तो कभी जीवन दर्शन प्रसंग. उनसे बहुत सारी बातें मुझे सीखने को मिली. कई बार उनके निवास पर भी जाने का अवसर मिला. हरबार पुत्रवत स्नेह प्राप्त हुआ. दरभंगा अध्ययन क्रम में मैंने जिन जिन व्यक्तित्व से शिक्षा पाई उनमें अब तक बचे गुरु आचार्य सोमदेव का जाना मेरे लिए शून्य पैदा कर गया. प्रो अशोक कुमार मेहता ने उन्हें मैथिली के रचनाकार के रूप में याद किया. उन्होंने कहा की वे सहजतावाद के प्रणेता थे. उनकी कविता, कथा एवं उपन्यास सदैव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहेगी. मंचीयकवि के रूप में वे हमेशा आकर्षण के केंद्र में रहे. काव्य प्रस्तुति में उनकी आंगिक और वाचिक समन्वय मनोहरी रहता था. उनका जाना मैथिली साहित्य के लिए

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देश के विभिन्न हिस्सों के पारम्परिक व्यंजनों का स्वाद लोगों ने चखा

जॉ पॉल्स हाई स्कूल में हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया बाल दिवस समारोह छात्र -छात्राओं ने लगाया फ़ूड स्टाल देश के प्रथम प्रधानमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी जवाहर लाल नेहरू के 133 वीं जयंती और राष्ट्रीय बाल दिवस के मौके पर जॉ पॉल्स स्कूल के धनुपरा स्थित कैंपस में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम और छात्र/छात्राओं द्वारा मेले का आयोजन किया गया.  इस मेलें में स्कूल के बच्चों के द्वारा कई फूड और गेम्स के स्टॉल भी लगाए गए. इस बार के मेले का थीम देश के अलग अलग हिस्सों के पारम्परिक व्यंजनों को रखा गया था. बच्चों ने देश के अलग अलग राज्यों और इलाकों के फूड स्टॉल्स लगाए जिसका लुत्फ पैरेंट्स और समारोह में आए गणमाण्य लोगों ने उठाया.इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के साथ साथ स्कूल के टीचर्स ने भी अपनी अपनी प्रस्तुति दी. बच्चों और टीचर्स द्वारा दी गई प्रस्तुतितियों को कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने सराहा. बाल दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मिथिलेश कुमार, एसीजीएम, आरा, प्रो. (डॉ.) कैलाश कुमारी सहाय, आदिति गुप्ता, सब जज – पीरो और डॉ कुमार जीतेंद्र थे. कार्यक्रम की शुरुआत जॉ पॉल्स स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. रमेश प्रताप शाही ने स्वागत भाषण से की. स्कूल की डायरेक्टर डॉ. मधु सिन्हा और स्कूल की मैनेजिंग डायरेक्टर पंखुड़ी सिन्हा ने भी बच्चों को अपने भाषण से प्रोत्साहित किया. स्कूल के सेक्रेटरी श्री प्रदीप कुमार सिन्हा ने भी बच्चों का मनोबल बढ़ाया.कार्यक्रम के दौरान स्कूल के डिप्टी-डायरेक्टर शंभुनाथ मिश्र, मधु सिंह, रंजू शुक्ला सहित स्कूल के प्रबंधन समिति,

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नारी समाज की पवित्र प्रतीक है ‘योगिनी’ : अनीता कुमारी

योगिनी चित्र शिल्प एक कहानी कहता है : पद्मश्री श्याम शर्मा सामाजिक संस्कृति की बहुस्तरीय भावना को दर्शाती एकल चित्र प्रदर्शनी का आयोजन नारी समाज की पवित्र प्रतीक है पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द है घूमती दुनिया को अपने कैनवस पर समेटना चाहती हूं मैं एकल प्रदर्शनी -15 नवम्बर से 20 नवम्बर 2022  का आयोजन पटना में आये दिन कोई न कोई चित्र प्रदर्शनी का आयोजन होता ही रहता है कभी समूह में तो कभी एकल. देश में अपना स्थान ख़ास बनाने वाली अनीता कुमारी की एकल चित्र प्रदर्शनी में योगिनी को प्रस्तुत किया है.ललित कला अकादमी में आयोजित इस एकल चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन देश दुनिया के प्रख्यात चित्रकार श्याम शर्मा किया.उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है.  उन्होंने कहा कि अनीता कुमारी के चित्र ने सृजन से लेकर कई अवस्थाओं का चित्रण किया है जिसमें कला के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट दिखता है। योगिनी एक योग है मतलब जोड़ना मतलब योगी। षोडशमातृकाएं या 64 योगिनियों की कल्पना है। ये सभी भारतीय चित्र परंपरा के अनुसार है। इनके चित्रों में कथात्मक का गुण है जो अपनी कहानी कहती है। योगिनी को आज के संदर्भ में प्रस्तुत करना ही कलात्मकता है। अनीता ने बताया कि योगिनी एक प्रतीकात्मक चिन्ह है जिस पर काम करते हुए मैं अपने कामों में आन्नद की प्राप्ति करती हूँ. नारी समाज की पवित्र प्रतीक है क्योंकि पूरा समाज नारी के इर्द-गिर्द घूमती है. मेरी कला 21वीं

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लेखकों पाठकों की नई पीढ़ी बनाने में जुटा राजकमल प्रकाशन

किताब उत्सव के सफल आयोजन के अवसर पर राजकमल प्रकाशन की पटना शाखा में हुई प्रेस काँफ़्रेंस बिहार के पुस्तक प्रेमी पाठकों और लेखकों से मिला प्यार किताब उत्सव की अपार लोकप्रियता एवं बिहार के पुस्तक प्रेमी पाठकों और लेखकों से मिले प्यार एवं यादों साझा करने के लिए आयोजित प्रेस काँफ़्रेस में राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने कहा है कि राजकमल पूरी जिम्मेदारी से लेखकों और पाठकों की नई पीढ़ी का निर्माण करने में जुटा है. स्तरीय पुस्तकों के प्रकाशन के जरिये वह विगत पिचहत्तर वर्ष से हिंदी पाठकों की बौद्धिक उन्नति का निरंतर सहयोगी बना हुआ है और आगे की यात्रा में भी अपनी इस भूमिका को बनाए रखेगा. अशोक महेश्वरी ने कहा कि राजकमल अपने पचहत्तरवें वर्ष में देश के प्रमुख शहरों में किताब उत्सव आयोजित कर रहा है. भोपाल और बनारस के बाद हमने पटना में यह आयोजन किया. भोपाल में किताब उत्सव सात दिन का और  बनारस में पांच दिन का था, पर पटना में हमने नौ दिनों का किताब उत्सव मनाया. यह पटना के आप तमाम लोगों के अपनापन और सहयोग के बिना संभव नहीं हो पाता, हम आपके अत्यंत कृतज्ञ हैं. एक सवाल के जवाबमें राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष ने कहा, अपने 75वें वर्ष में राजकमल अपने व्यापक लेखक पाठक पुस्तक प्रेमी समुदाय की भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूरे दम ख़म से काम कर रहा है। भविष्य के लिए हमारी कई योजनाएँ हैं जिनका मूल उद्देश्य है घर घर तक स्तरीय पुस्तकें पहुँचाना, अधिक से अधिक लोगों को उनकी पसंद और बौद्धिक ज़रूरत के अनूरूप किताबें मुहैया कराना। हरेक उम्र और

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