साहित्यकार गीतांजलि श्री को ‘रेत की समाधि’ के लिए मिला बुकर पुरस्कार

हिंदी भाषा की पहली रचना को मिला यह सम्मान बुकर पुरस्कार पाने वाली पहली हिंदी पुस्तक टॉम्ब ऑफ सैंड रेत की समाधि उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया कथानक की मार्मिकता से निर्णायक मंडल मोहित उषा किरण खान ,हृषिकेश सुलभ ने बताया महान उपलब्धि टॉम्ब ऑफ सैंड प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है. गुरुवार को लंदन में एक समारोह में लेखिका ने कहा कि वह ‘बोल्ट फ्रॉम द ब्लू’ से पूरी तरह से अभिभूत थीं.सुप्रसिद्ध लेखिका गीतांजलि श्री को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से नवाजा गया है. उन्हें यह पुरस्कार टॉम्ब ऑफ सैंड (रेत की समाधि) के लिए दिया गया है. रेत की समाधि हिंदी की पहली किताब है जिसे यह सम्मान हासिल हुआ है. रेत की समाधि उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया है. यह पुस्तक दुनिया की 13 रचनाओं में शामिल थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की सूची में शामिल किया गया था. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टॉम्ब ऑफ सैंड प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है. गुरुवार को लंदन में एक समारोह में लेखिका ने कहा कि वह ‘बोल्ट फ्रॉम द ब्लू’ से पूरी तरह से अभिभूत थीं. उन्होंने 50,000 जीबीपी का अपना पुरस्कार लिया और पुस्तक के अंग्रेजी अनुवादक डेजी रॉकवेल के साथ इसे साझा किया. गीतांजलि श्री ने कहा कि मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकती हूं. कितनी

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ओपन थियेटर में होगा आज गंगा-स्नान

आज शाम छह बजे से होगी दो दिवसीय मंचन की शुरुआत, परिवार में उपेक्षित वृद्धजनों पर आधारित है नाटक, देगा सकरात्मक संदेश रंगमंच से जुड़े कलाकारों के साथ नवोदित कलाकार भी दिखाएंगे समाज को आईना आरा,27 मई. वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में भिखारी ठाकुर रचित सुप्रसिद्ध नाटक ‘गंगा स्नान’ का मंचन आज शाम छह बजे से होने के साथ ही दो दिवसीय मंचन की शुरुआत हो जायेगी. कोरोना काल के समय से जिले वासियों के मन में बने नकारात्मक माहौल को एक मनोरंजक प्रस्तुति के माध्यम से सकारात्मकता में बदलने के प्रयास में नाटक का मंचन किया जा रहा है. प्रभाव क्रिएटिव सोसायटी के बैनर तले हो रहे नाटक के मंचन में ग्रामीण समाज में गंगा स्नान करने के महत्व को दिखाया गया है. गंगा स्नान मन और शरीर के शुद्धिकरण के लिए तो सभी जाते हैं लेकिन कैसे वे जीवन की मैली व्यवस्था में घिरे होते हैं जो स्नान से साफ नहीं हो सकता. गंगा स्नान के समय जगह-जगह गंगा किनारे मेला लगता है धर्म के साथ ठगों का भी किस प्रकार आराजकता मेले में फैले रहता है जो धर्म और दूसरी चीजों पर वहां गए लोगों को लूटते हैं. गंगा स्नान नाटक में एक परिवार को गंगा स्नान के लिए जाते दिखाया गया है, जिसमें एक बूढ़ी मां है जो परिवार द्वारा उपेक्षित है. इस नाटक में भिखारी ठाकुर ने गंगा स्नान के माध्यम से परिवार में बुज़ुर्गों की उपेक्षा को दिखाया है. नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनोज सिंह कर रहे हैं. वहीं गीत संगीत के माध्यम से

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भोजपुरी की वो पत्रिका जो 43 साल से हो रही है प्रकाशित

भोजपुरी के बढ़ते दायरे की साक्षी है पाती पत्रिकापाती भोजपुरी पत्रिका के सौवें अंक का लोकार्पण आरा, 23 मई. भोजपुरी को भले ही कोई 8वी अनुसूची में शामिल ना करे, भले ही इसे जाहिलों वाला भाषा समझे या इसे संवैधानिक मान्यता न दे लेकिन इसकी मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस भाषा में जहां 8 व्याकरण की किताबें और कई साहित्यकारों की सैकड़ों किताबें हैं वही एक पत्रिका ऐसी है जो लगातार 43 वर्षों से प्रकाशित होते आ रही है. पत्रिका 43 वर्षों से लगातार भोजपुरिया भाषा जानने वालों के बीच आ रही है. 43 साल से अनवरत प्रकाशित हो रही भोजपुरी की चर्चित पत्रिका पाती के सौवें अंक का लोकार्पण आज भोजपुरी विभाग के दुर्गा शंकर प्रसाद सिंह नाथ सभागार में सम्पन्न हुआ. मौके पर भोजपुरी के साहित्यकार और साहित्य प्रेमियों का जुटान हुआ जिनमें समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ अवध बिहारी सिंह, साहित्यकार रामयश अविकल, सुमन कुमार सिंह, कथाकार कृष्ण कुमार के अलावे भोजपुरी विभाग के शोधार्थी राजेश कुमार, संजय कुमार, रवि प्रकाश सूरज, सोहित सिन्हा, धनन्जय कटकैरा आदि शामिल थे. समारोह की शुरुआत में पाती पत्रिका के लोकार्पण के बाद भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पांडेय ने कहा कि किसी भोजपुरी पत्रिका का सौंवां अंक प्रकाशित होना भोजपुरी भाषा के मजबूत होते जाने का परिचायक है. कथाकार कॄष्ण कुमार ने कहा कि पाती पत्रिका ने अनगिनत साहित्यकारों के निर्माण में योगदान दिया है जिसे भुलाया नहीं जा सकता. रसायनशास्त्र के शिक्षक संजय कुमार सिंह ने कहा कि साहित्य की रचना वैसी होनी चाहिए जैसा समाज

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चित्रकार राकेश दिवाकर के निधन से ललित कला अकादमी में भी छाया शोक

पटना, 19 मई. चित्रकार राकेश कुमार दिवाकर के निधन से कला के क्षेत्र में मायूसी छा गई है. उनके निधन से न सिर्फ भोजपुर जिला बल्कि शाहाबाद और प्रदेश के लोग भी सदमे में हैं. बिहार राज्य के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकार तथा कला शिक्षक राकेश कुमार दिवाकर के अकस्मिक निधन से बिहार का कला जगत विचलित है. बुधवार को सुबह उनके निधन की खबर से जहां सोशल मीडिया पर दिनभर हलचल रहा वही बिहार ललित कला अकादमी में भी एक शोक सभा आयोजित की गयी. अकादमी के सभी कर्मियों ने इनके निधन पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए कहा बिहार ने अपने लाल को खो दिया है,जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है. कला के विभिन्न विद्याओं पर उनकी काफी पकड़ थी. दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए उपस्थित सभी कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखा. इस अवसर पर दीपक कुमार, सूरज कुमार, देवपूजन कुमार, ओमकार नाथ, विजय कुमार, मिथिलेश कुमार, चन्दन कुमार कुमारी शिल्पी रानी, मन्दु कुमार, सुरेन्द्र राम के साथ बड़ी संख्या में कलाकार एवं कला प्रेमी उपस्थित थे. PNCB

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15 दिवसीय लोक नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ

कार्यशाला में तैयार होगा भिखारी ठाकुर का नाटक गंगा स्नान आरा,11मई. प्रभाव क्रिएटिव सोसाइटी द्वारा आयोजित लोक प्रस्तुतिपरक अभिनय एवं लोक संगीत कार्यशाला का शुभारम्भ बड़ी मठिया स्तिथ नेशनल साइंसटिफिक रिसर्च एंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट के हॉल में हुआ. कार्यशाला का उदघाटन सामाजिक कार्यकर्त्ता विष्णु सिंह(उप मेयर प्रत्याशी) सुशील कुमार एवं जदयू के युवा नेता अभय बिश्वास भट्ट, और नेशनल साइंसटिफिक रिसर्च एंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यशाला के रूप रेखा पर युवा निर्देशक मनोज सिंह ने प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि 15 दिवसीय इस कार्यशाला में भिखारी ठाकुर की अमर कृति नाटक “गंगा स्नान” की तैयारी की जाएगी. जिसकी प्रस्तुति दिनांक 27 एवं 28 मई 2022 को स्थानीय वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में बाबू ललन सिंह मुक्तावकाश मंच पर किया जायेगा. मुख्य अतिथि बिष्णु सिंह ने कार्यशाला में आये प्रशिक्षुओ को सम्बोधित करते हुए कहा भिखारी ठाकुर भोजपुरी रत्न है. उन्होंने अपने नाटकों में घर-घर, गाँव-गाँव की समस्या को विषय बनाया. भिखारी ठाकुर के नाटकों और हमारी लोक गीतों से नये कलाकारों को अपनी संस्कृति, अपनी परम्परा जानने का अच्छा अवसर है. सामाजिक कार्यकर्ता सुशील कुमार ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला आरा के रंगमंच के इतिहास मे मील का पत्थर साबित होगा. युवा जदयू नेता अभय बिश्वास भट्ट ने कहा कि कलाकार जहाँ भी मुझे ढूंढ़ते है मैं 24 घंटे उनके सहयोग और संघर्ष मे साथ रहता हूँ. लोक संगीत के प्रशिक्षक नागेन्द्र पाण्डेय ने लोक संगीत की महत्ता के बारे मे बताया.

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शॉट गन की बेटी सोनाक्षी सिन्हा ने कर ली सगाई

इंस्टाग्राम पर फोटोज शेयर करके खुद अपनी इंगेजमेंट की खबर शेयर की मंगेतर कौन नहीं किया खुलासा सोनाक्षी सिन्हा ने सगाई कर ली है.बॉलीवुड की गॉर्जियस डीवा सोनाक्षी अब सिंगल नहीं रही. एक्ट्रेस ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर फैंस को ये जानकारी दी है. अचानक आई इस खबर से फैंस जहां शॉक्ड हैं वहीं अपने फेवरेट एक्ट्रेस को इस खास मौके पर बधाइयां भी दे रहे हैं. सोनाक्षी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर तीन अलग-अलग फोटोज शेयर करके खुद अपनी इंगेजमेंट की खबर शेयर की है. एक फोटो में दबंग गर्ल अपनी इंगेजमेंट रिंग फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं. सोनाक्षी के मंगेतर उनका हाथ थामे नजर आ रहे हैं. पर उन्होंने अपने फिऑन्से का चेहरा नहीं दिखाया है. सोनाक्षी ने पूरी तरह से सस्पेंस बना रखा है कि उनकी जिंदगी में शामिल होने वाले ये स्पेशल पर्सन आखिर है कौन. सोनाक्षी दूसरी फोटो में अपने डार्लिंग पार्टनर के कंधे पर प्यार से हाथ रखकर स्माइल देती नजर आ रही हैं. वहीं, तीसरी तस्वीर में सोनाक्षी अपने पार्टनर का हाथ थामे हुए हैं. रिंग फिंगर में एक चमकती हुई डायमंड रिंग बता रही है कि जल्द ही सिन्हा हाऊस में शहनाई बजने वाली है.सोनाक्षी ने फैंस संग ये गुड न्यूज शेयर करते हुए कैप्शन में अपनी खुशी और एक्साइटमेंट भी जाहिर की है. सोनाक्षी ने फोटोज शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि मेरे लिए ये बड़ा दिन है. मेरे सबसे बड़े सपनों में से एक सपना सच होने जा रहा है और इसे आपके साथ शेयर

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दिल्ली से 150 किमी दूर मिले हड़प्पा संस्कृति के नए साक्ष्य

राखीगढ़ी में मिले हड़प्पा संस्कृति के नए साक्ष्य पांच हजार वर्ष पुराने महिलाओं के कंकाल मिले स्टीटाइट मुहर, टेराकोटा चूड़ियां, हाथीदांत के आभूषण पत्थर के मनकों की माला, गोमेद और इंद्रगोप जैसे रत्नों से बनी वस्तुएं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम को खुदाई के दौरान कलाकृतियों और पुरावशेषों में स्टीटाइट मुहर, टेराकोटा चूड़ियां, हाथीदांत के आभूषण और हड़प्पा लिपि के अलावा अधपकी मिट्टी की मुहरें मिली हैं. हरियाणा में हड़प्पा कालीन शहरी केंद्र राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान इसके साक्ष्य मिले हैं. हड़प्पा काल में भी रत्न जड़े आभूषण पहनने का चलन था. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम को खुदाई के दौरान कलाकृतियों और पुरावशेषों में स्टीटाइट मुहर, टेराकोटा चूड़ियां, हाथीदांत के आभूषण और हड़प्पा लिपि के अलावा अधपकी मिट्टी की मुहरें मिली हैं. टीम में शामिल एमएस विश्वविद्यालय, बड़ौदा में पीएचडी स्कॉलर दिशा अहलूवालिया ने कहा कि टेराकोटा और स्टीटाइट से बनी कुत्ते, बैल जैसे जानवरों की मूर्तियां, तांबे की वस्तुएं, बड़ी संख्या में स्टीटाइट (सलखड़ी) के मोती, पत्थर के मनकों की माला, गोमेद और इंद्रगोप जैसे रत्नों से बनी वस्तुएं मिली हैं. एएसआई के संयुक्त महानिदेशक एस.के. मंजुल ने कहा, ‘हिसार जिले में दो गांवों (राखी खास और राखी शाहपुर) के आसपास बिखरे हुए सात टीले (आरजीआर 1 से आरजीआर 7) राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल का हिस्सा हैं. आरजीआर 7 हड़प्पा काल का वह स्थान है जहां शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था, जब यह एक सुव्यवस्थित शहर था. हमारी टीम ने दो महीने पहले दो कंकालों का पता लगाया था. विशेषज्ञों द्वारा लगभग दो सप्ताह पहले

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मजदूर दिवस पर महिलाओं को सशक्त करने की हुई घोषणा

आरा. मजदूर दिवस के मौके पर नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एंड एनालिसिस ट्रस्ट ने अपने कार्यालय में सदस्यों और बुद्धिजीवियों की एक बैठक आयोजित महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मुफ्त औद्योगिक प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया.ताकि वे बिना किसी सरकारी या निजी निकाय से अनुदान के स्वावलंबी बन सकें. बैठक में मजदूर वर्ग की महिलाओं को सशक्त बनाने की भूमिका पर ध्यान आकृष्ट किया गया जिससे वे अपने जीवन स्तर को ऊपर उठा सकें और खुद को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ सकें और राष्ट्रीय विकास का बिगुल फूंक सकें. इसी क्रम में भोजपुर में अपनी अथक परिश्रम से आर्थिक तंगी एवं विषमताओं से जूझते हुए अप्लीक एवं काशीदा में दक्षता प्राप्त करने वाली विभूति कुमारी ने अनेक उत्पाद तैयार कर प्रदर्शिनी में प्रस्तुत कर प्रसिद्धि प्राप्त किया. विभूति ने रविवार को संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि उसने अपने आप को आस-पास के गांवों में जाकर सोलह वर्ष से अधिक उम्र की मजदूर वर्ग की लड़कियों और महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने और उनमें आशा का दीपक जलाने के लिए तैयार किया है जो मजदूर दिवस के प्रति उसका समर्पण होगा. संगोष्ठी के समापन पर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम कुमार ने विभूति कुमारी को आश्वासन दिया कि उनका ट्रस्ट उनके नेक काम को हासिल करने में हर कदम पर उनका साथ देगा. संगोष्ठी के अंत में संगीतकार पंडित ब्रजेन्द्र महाराज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा. आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट

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‘हावर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड’ लंदन में दर्ज हुआ बिहार का हुनर !

वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड के बाद अब हावर्ड वर्ल्ड रेकॉर्ड, लंदन में भी दर्ज हुआ संजीव सिन्हा का नाम सर्जना न्यास की टीम ने बनाया विश्व रिकॉर्ड भोजपुर में गाँधी कार्यक्रम के दौरान बना था सबसे बड़ा यरवदा चरखा आरा, 1मई. बिहार के एक कलाकार ने अपने हुनर का ऐसा कमाल चित्रकारी और क्राफ्ट तैयार कर दिखाया कि उसका नाम लंदन के हावर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया. विश्व का सबसे बड़ा चरखा बनाने वाले चित्रकार संजीव सिन्हा का नाम अब हावर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया है. इसकी जानकारी हावर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड ने प्रमाण – पत्र और सम्मान भेजकर दिया है. आरा शहर के मुखर्जी हाता में रहने वाले संजीव अपने लोक चित्रों की वजह से हमेशा चर्चित रहे हैं. सरल व्यक्तित्व के धनी चित्रकार संजीव सर्जना न्यास के अध्यक्ष हैं और अपनी कलाओं का प्रदर्शन इसी बैनर के जरिए वे समय समय पर करते रहते हैं. बता दें कि पिछले वर्ष सर्जना न्यास ने भोजपुर में गांधी शताब्दी समारोह का आयोजन किया था जो कई चरणों में लगभग चार महीने तक विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के साथ चला था. बापू के भोजपुर आगमन के शताब्दी वर्ष के इस आयोजन में बापू से जुड़े तमाम यादों को लोगों के जेहन में फिर से जगाने के लिए दृश्य कला, चित्रकला, भाषण प्रतियोगिता, गीत संगीत आदि माध्यमों का प्रयोग किया गया था. इसी आयोजन में बापू से जुड़े यारवादा चरखे का विशाल रूप बनाया गया था. जिसपर भोजपुरी लोक चित्रशैली में बापू व आजादी से जुड़े चित्रो को चित्रित

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मंदिर में हवा में झूलता खंभा

मंदिर का हैंगिंग पिलर,भगवान शिव के दिव्य स्थलों में से एक मंदिर में हवा में लटका है भारी-भरकम खंभा वीरभ्रद स्वामी मंदिर है दक्षिण भारत का रहस्यमयी मंदिर वीरभद्र स्वामी को शिव का ही रूप माना गया स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का है जिक्र भारत में कई प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी बेजोड़ वास्तुकला और भव्यता के लिए जाने जाते हैं. कई सिद्ध पीठ है जहाँ जा कर अद्भुत अनुभव की प्राप्ति होती है. दक्षिण भारत में भी कई रहस्यमयी मंदिर मौजूद हैं जो लोगों की आस्था का केंद्र होने के साथ ही आम लोगों के लिए आज भी रहस्य बने हुए हैं. ऐसा ही एक मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के लेपाक्षी में अवस्थित है. इस मंदिर का नाम है वीरभ्रद स्वामी मंदिर. इसे हैंगिंग पिलर टेंपल यानी लटकते हुए खंभे वाला मंदिर भी कहा जाता है. विजयनगर वास्तुकला शैली में बने इस मंदिर में एक हवा में झूलता हुआ खंभा है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ इंजीनियरों के लिए भी रहस्य का विषय बना हुआ है. दक्षिण भारत लेपक्षी मंदिर वीरभद्र स्वामी को समर्पित है. इसका निर्माण सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य में हुआ था. इस मंदिर का निर्माण विरुपन्ना नायक और विरन्ना ने करवाया था. ये दोनों भाई थे और विजयनगर साम्राज्य में राजा अच्युतार्य के गर्वनर थे. हालांकि, इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है. स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का जिक्र मिलता है, इसे भगवान शिव के दिव्यक्षेत्रों में से एक माना जाता है.मंदिर की दीवारों पर कई कलाकृतियां बनी हुई हैं.

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