जहाँ होती रचनात्मकता की भी अग्निपरीक्षा

अजूबा करनामा ऐसा सुना है कभी… 2 दिनों में 50 फिल्में!रचनात्मकता की धरातल पर नई सोच को उतारते भोजपुर के अति सकरात्मक लोग आरा, 20 जनवरी. जी हां बिल्कुल सही सुना आपने भोजपुर ही है वह धरती जहाँ रचनात्मकता की भी अग्निपरीक्षा होती है. पटना नाउ ने 2 दिन पहले अपने हैडिंग में जिस खबर को लिखा था रचनात्मकता की अग्निपरीक्षा, उस अग्निपरीक्षा में खरे उतरे रचनात्मकता को जन्म देने वाले कुछ जुनूनी लोग जिसके गवाह बने 50 बच्चे और जॉ पॉल हाई स्कूल जिसने इस अनोखी पहल से दुनिया के सामने एक नई मिसाल कायम कर एक अनूठा करनामा कर दिखाया है. जिस फ़िल्म को बनाने में महीनों लग जाते हैं उस फिल्म को 2 दिनों के अंदर 50 बच्चों ने 50 फिल्मे बना कर सबको अच्चम्भित कर दिया है. जी हाँ भले ही ये फिल्में लघु हैं और मोबाइल से शूट की गई हैं लेकिन उन्हें बनाने, उनके कंटेट को लिखने और समझने की सोच को जरूर विकसित किया गया है जो बच्चों के मस्तिष्क में कल्पनाओ की उड़ान ले रहे हैं. क्या पता आने वाले दिनों में ये 50 बच्चे भविष्य के लेखक, निर्देशक, सिनेमेटोग्राफर, आर्ट डायरेक्टर या अन्य विधाओं के माहिर खिलाड़ी बन जाएं! ऐसी संभावनाओ की जननी रहा दो दिवसीय फ़िल्म मेकिंग का कार्याशाला जिसके समापन पर बच्चों के अभिवावकों के साथ शहर के प्रबुद्ध जनों ने बच्चों की फिल्में देखी और सराहा. 18-19 जनवरी तक आयोजित गंगा जगाओ अभियान और जॉ पाल स्कूल आरा के तत्वावधान में कविता लेखन व फ़िल्म मेकिंग की दो

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नन्हे फ़िल्म मेकरों से रौनक होगा भोजपुर

2 दिनों में बच्चों ने शूट किए 50 लघु फिल्में आरा, 19 जनवरी. लगता है आने वाले समय मे भोजपुर जिला नन्हे फ़िल्म मेकरों से देश-दुनिया मे छाने वाला है. बच्चों को मिट्टी का लोंदा कहा गया है,मतलब उन्हें जैसा गढ़िए वे वैसा बन जाते है. बच्चों में क्रिएटिविटी के जरिये उनके अंदर कुछ अनोखा करने का प्रयास किया पिछले दो दिनों में कुछ फ़िल्म मेकरों ने आरा में. क्रिएटिव कार्यशाला के जरिये 2 दिनों में 50 फ़िल्म बच्चों से बनवाने की उनकी पहल तो पहले ऐसा लगा कि क्रिएटिविटी की ही अग्निपरीक्षा हो लेकिन दो दिनों में जो रिजल्ट आया सचमुच वे इस अग्निपरीक्षा पर खरे उतरे. बच्चों ने इस अग्निपरीक्षा पार कर सबको अचंभित कर दिया है. फ़िल्म मेकिंग व कविता लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन मशहूर कवि व लेखक निलय उपाध्याय ने प्रार्थना के बाद विद्यालय के समस्त बच्चों को सम्बोधित करते हुए जल संकट और गंगा जैसी पवित्र व जीवनदायिनी नदी के संकट और संरक्षण पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक जल के दोहन ने जमीन के ऊपर के जल स्रोतों को खत्म कर अंदर के जमा जलों में भी सेंध कर दिया है और पृथ्वी के अंदर की परतों तक वहाँ पहुंच गए है जहाँ आर्सेनिक की चट्टानें है. RO का जल आर्सेनिक खत्म नही करता और लगातार चट्टानों को बढ़ने से ऑक्साइड इस जल के साथ मिलकर उसे जहरीला बनाता है और हम इसे ही पी रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर एक ब्यक्ति प्रतिदिन 3 बार शौच जाता है तो 36 लीटर

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स्कॉलर्स एबोड स्कूल में संपन्न हुआ पत्रकार कवि सम्मलेन

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | आशियाना दीघा रोड स्थित ‘स्कॉलर्स एबोड स्कूल’ के ऑटोडोरियम में ‘बोलो ज़िन्दगी फाउंडेशन’ एवं अलीना प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में ‘पत्रकार कवि सम्मलेन‘ आयोजित हुआ. यहाँ एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न मीडिया हॉउस के कवि पत्रकारों ने अपनी-अपनी कवितायेँ सुना श्रोताओं का दिल जीत लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन दैनिक जागरण, पटना के पूर्व संपादक शैलेन्द्र दीक्षित ने किया. दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि शैलेन्द्र दीक्षित ने कहा कि “पत्रकार कवि सम्मलेन के रूप में यह एक अच्छी पहल है जहाँ विभिन्न मीडिया के पत्रकार साथियों ने एक ही प्लेटफॉर्म पर जुटकर अपनी सहभागिता दिखाई.”कवि सम्मलेन में कुल 10 पत्रकार कवियों ने हिस्सा लिया जिनमे बीरेंद्र ज्योति, अमलेंदु अस्थाना, चन्दन दिवेदी, कुमार रजत, मनोज प्रभाकर, अभिषेक कुमार मिश्रा, प्रेरणा प्रताप, अनिकेत त्रिवेदी, समीर परिमल एवं श्रीकांत व्यास हैं. सभी प्रतिभागियों ने अपनी दो उत्तम रचनाएँ सुनाई। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथियों में से डॉ. किशोर सिन्हा, प्रमोद कुमार सिंह एवं वरुण कुमार सिंह ने भी मंच से कविता का पाठ किया. आरम्भ में सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए स्कॉलर्स एबोड स्कूल की तरफ से एक पौधा एवं स्कूल के बच्चों द्वारा बनाये हुए ग्रीटिंग्स कार्ड भेंट किया गया. उसके बाद ‘बोलो जिंदगी फाउंडेशन’ एवं अलीना प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों को सम्मानित किया गया. मौके पर ‘बोलो जिंदगी फाउंडेशन’ के डायरेक्टर राकेश सिंह ‘सोनू’ ने बताया कि “यह ‘बोलो जिंदगी’ का पहला इवेंट था. इस कार्यक्रम की रुपरेखा उन्होंने एक साल पहले ही बनायीं थी

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महिला उद्यमिता का एक सुंदर उदाहरण है गौरैया क्रिएशन्स

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | बिहार में प्लास्टिक पॉलिथीन बन्द की घोषणा से प्रेरणा लेकर एक गृहिणी मोनिका प्रसाद ने पर्यावरण-संरक्षी यानि इको फ्रेंडली bags बनाने का उद्यम शुरू किया. गौरैया पक्षी भी आज खतरे में है जो भीषण पर्यावरण संकट का संकेत है. इस गौरैया को अपने प्रयास का प्रतीक चिह्न बनाकर उन्होंने अपने घर के खर्च से थोड़े थोड़े पैसे बचाकर यह उद्यम शुरू किया है. इसका इतना सुंदर response मिलेगा यह उन्होंने सोचा नहीं था. फिर जूट और सूती के तरह -तरह के झोलों का निर्माण शुरू हुआ. सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि मुम्बई, दिल्ली और कोलकाता आदि शहरों से भी काफी डिमांड आयी. यहाँ तक कि कुछ ही महीनों में गौरैया इको फ्रेंडली बैग्स के खरीदार इजरायल और अमेरिका में भी हो गए हैं. मोनिका जी ने झोले सिलने का काम मोहल्ले और शहर की अन्य गृहिणियों को दिया जिससे उन्हें भी कुछ लाभ मिल सके. यह महिला उद्यमिता का एक सुंदर उदाहरण है कि एक एक गृहिणी भी घर की सारी जिम्मेवारी वहन करते हुए व्यवसायिक उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख सकती है. इससे पूरे समाज को कई तरह से लाभ मिलता है और जागरूकता फैलती है. मोनिका जी का दृढ़ निश्चय है कि प्लास्टिक के विरुद्ध इस जंग में पूरी ताकत लगानी जरूरी है क्योंकि यह मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा है. स्वयं के बचत के पैसों से करने के कारण बढ़ते डिमांड को पूरा करने में उन्हें चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. पर सुंदर आकर्षक डिजाइन और आवश्यकता के

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अंग्रेजी ओलंपिया का गोल्ड मेडल जीता बक्सर के स्वराज ओझा ने

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | स्वराज ओझा, जो बक्सर के छोटा सिंघनपुरा के रहने वाले हैं तथा संजीव कुमार और रितु ओझा के बेटे है, ने अंग्रेजी ओलंपियाड में गोल्ड मेल्डल जीता है. पहले भी जब वे पांचवीं क्लास में पढ़ रहे थे तब सायंस ओलंपियाड में ब्रांज मेडल जीता था. इसके अलावा इनकी स्टोरी को स्टोरी मिरर स्टोरी राइटिंग कंपीटिशन में शामिल किया है. स्वराज ओझा अभी दिल्ली के समरविले स्कूल की सातवीं क्लास में पढ़ते हैं. स्वराज ओझा के चाचा अभिषेक कुमार बापू स्मारक महिला उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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जल्द ही भोजपुरी को प्राथमिक शिक्षा सिलेबस में लाने की कोशिश करेंगे – शिक्षा मंत्री, बिहार

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | भोजपुरी साहित्यांगन द्वारा बुधवार 26 दिसम्बर को पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर के प्रांगण में स्थित ललितकला अकादमी बहुद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश्वर गोवर्द्धन के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में उच्चायुक्त द्वारा प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भोजपुरी भाषा की एक पुस्तक, पूर्व प्राथमिक भोजपुरी पाठ्य पुस्तक माला का विमोचन हुआ. इस अवसर पर इस पुस्तक का उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच वितरण भी किया गया. यह कार्यक्रम ‘इंडियन डायस्पोरा एंड वर्ल्ड भोजपुरी सेंटर, वर्ल्ड भोजपुरी इंस्टीट्यूट एवं आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया’ के सहयोग से आयोजित किया गया. पूर्व प्राथमिक भोजपुरी पाठ्य पुस्तक माला  को स्वयं उच्चायुक्त ने प्राथमिक स्तर के बच्चों को उनकी मातृ भाषा भोजपुरी सिखाने के लिए मॉरीशस की टीम द्वारा तैयार करवाया है. भोजपुरी भाषा के उत्थान के लिए वे कटिबद्ध हैं और मॉरीशस से लेकर भारत तक उन्होंने इसके लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वे भोजपुरी क्षेत्रों में घूम-घूम कर मातृभाषा के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं. उन्हें यह आश्चर्य होता है कि जब मॉरीशस भोजपुरी के लिए इतना कुछ कर सकता है तो भोजपुरी के मूल क्षेत्र में अपनी ही मातृ भाषा के प्रति इतनी उदासीनता और हीनत्व-बोध क्यों है. उनका कहना है कि जबतक हमलोग छोटे छोटे बच्चों को भोजपुरी नहीं सिखाएंगे भोजपुरी का विकास नहीं होगा. दुनिया की कोई संस्कृति और सभ्यता बिना मातृभाषा के अपने को बचा नहीं सकती और न विकास कर सकती है. उन्होंने कहा कि मॉरीशस एवं भारत के भोजपुरी क्षेत्र के

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1 दिन में कैसे होगा 27 विधाओं का सलेक्शन ?

विनर टीम के ट्रायल पर अड़ी विश्वविद्यालय विनर टीम ‘शारंगम’ शाहजहाँपुर में कर रही है प्रदशर्न आरा, 19 दिसम्बर. VKSU का विवादों से गहरा नाता रहा है. आए दिन विवि में विवाद अपनी पैठ बनाने के लिए मुँह बाये खड़े रहता है. अब इस बार लगता है विवाद ईस्ट जोन कल्चरल फेस्टिवल में सलेक्शन को लेकर है. बताते चले की अक्टूबर माह में विश्वविद्यालय से 40 सदस्य टीम 25 विधाओं में प्रदर्शन करने के लिए दरभंगा गई थी जिसमें से उसने चार पुरस्कार झटके थे. जिसमें नाटक और झांकी में 2nd, क्ले आर्ट में 3rd और वेस्टर्न म्यूसिक में 3rd अवार्ड झटक कर प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय की इज्जत बचाई थी. पुनः दरभंगा में ही 3 जनवरी से 7 जनवरी 2019 तक ईस्ट जोन कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन होने वाला है जिसमे विवि नए सिरे से दमदार प्रतिभागियों के लिए हर विधाओं में ट्रायल का आयोजन कर रही है. यह चयन गुरुवार, 20 दिसम्बर को होना तय हुआ है. लेकिन फिलहाल नाटक की यह विनर टीम राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता “शारंगम”(16-19 दिसम्बर 2018) शाहजहाँपुर में अपनी प्रस्तुति देने गयी है जो 20 दिसम्बर के रात्रि में वापस आने वाली है. क्या है मामला? शारंगम में गयी विनर टीम ने 20 दिसम्बर को होने वाले ट्रायल के दिन न रहने की असमर्थता दर्शायी थी और अपने ट्रायल के लिए उक्त तिथि के पहले या बाद में ट्रायल देने का आग्रह किया था. यहाँ तक कि टीम लीडर व विवि के छात्र अध्यक्ष अमित सिंह ने प्रतियोगिता स्थल पर हुई प्रस्तुति की रिकॉर्डिंग को

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कोइलवर में दोगोला मुकाबला

कोईलवर (आमोद की रिपोर्ट) | श्री श्री छठपूजा समिति, नवयुवक संघ द्वारा काजीचक में दोगोला का आयोजन किया गया. जिसका उद्घटान पूर्व काबीना मंत्री राघवेंद्र प्रताप सिंह ने किया. दोगोला का मुकाबला सारण के भोला भंडारी व बक्सर के हरेंद्र सिंह के बीच हुआ. जोरदार मुकाबला में दोनों व्यास जमकर गायन किया. जिसके बाद मुकाबला बराबर पर जा रुका. जिस पर श्रोता पूरी रात झूमते रहे. मौके पर उपस्तिथ पूर्व मंत्री सिंह ने दोनों व्यास को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया. इससे पहले पूर्व मंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को संगठित करने का काम करता है. जिसमे हर जाति के लोगो का परस्पर सहयोग होता है. तभी कोई कार्यक्रम सफल होता है. उन्होंने समिति के लोगो की भी प्रशंसा की. मौके पर मुखिया अखिलेश कुमार, जितेंद्र कुमार, सुरेश यादव, मनोज, अजय, सूचित, विनोद, सोनू, समेत दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थे.

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भोजपुर की शास्त्रीय परम्परा के सशक्त युग का हुआ अंत

गायनाचार्य पं. देवनन्दन मिश्र(गुरुजी) का निधन, शोकाकुल भोजपुर आरा, 12 अक्टूबर. पिछले छः दशक से शास्त्रीय संगीत को सींचने वाले महान शास्त्रीय संगीतज्ञ पण्डित देवनंदन मिश्रा का बीती रात निधन हो गया. वे लगभग 96 वर्ष के थे. उनके निधन की सूचना से पूरा भोजपुर ही नही बल्कि पूरा देश शोकाकुल है. पंडित देव नंदन मिश्रा ने भोजपुर के पुरानी से नई पीढ़ी तक को संगीत की एक परंपरा से पाटने का काम किया है. उनकी इस परंम्परा को कई शिष्यों ने इस परंपरा को कायम रखा है. उन्होंने 10 हजार से अधिक शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी थी. शास्त्रीय का ऐसा कोई गायक नही होगा जिसने गुरुजी से तामील न ली हो. वे शास्त्रीय गायन के साथ-साथ तबला,पोखावज, बाँसुरी, ढोलक, मृदंग,हारमोनियम के साथ साथ वायलिन की भी शिक्षा देते थे. पुरानी पीढ़ी हो या नई पीढ़ी सबने उनसे संगीत की शिक्षा ग्रहण की है. ख्याति प्राप्त संगीतज्ञ पंडित प्रभंजन भारद्वाज ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी है. वही समाजसेवी व भारत स्वाभिमान आंदोलन के सशक्त प्रसिद्ध कवि पवन श्रीवास्तव ने इसे एक युग का अंत कहा है. गायिका चंदन तिवारी, भाजपा नेता ओमप्रकाश भुवन, भोजपुरी आंदोलन के सशक्त योद्धा सुनील प्रसाद शाहाबादी, युवा शक्ति सेवा संस्थान, पत्रकार नीरज कुमार शिक्षक अजय मिश्रा, नाटककार रंगकर्मी चंद्रभूषण पांडे रंगकर्मी कौशलेश पांडे, रंगकर्मी पूनम सिंह, संजय शाश्वत, संगीत शिक्षक नागेंद्र नाथ पांडे, पत्रकार देव कुमार पुखराज, संगीत के जानकार तरुण कैलाश, अशोक मानव, मनोज श्रीवास्तव, शशि भूषण मिश्रा आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्हें लोग गुरु जी के नाम से भी

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जे एन यू से जापान तक जन्माष्टमी की रही धूम

जब जे एन यू पहली बार हरिनाम पर झूम उठा राजधानी दिल्ली का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जे एन यू हमेशा से सुर्ख़ियों में रहता आया है. इस बार चर्चा का केंद्र रहा पहली बार जे एन यू कैंपस में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन. जन्माष्टमी के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के सदस्यों ने कैंपस में हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया और अरावली की गोद में बसे हरे-भरे कैंपस में छात्र ‘हरे राम,हरे कृष्ण’ की धुन पर झूम उठे. इस कार्यक्रम में कैंपस में स्थित विभिन्न होस्टलों के लगभग 800 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों को ‘भगवद्गीता यथारूप’ की प्रति भी भेंट की गई. इस्कॉन के स्थानीय केंद्र की तरफ से अरविन्दाक्ष माधव दास, पादसेवन भक्त दास, सरोज मुख श्याम दास, अरिंदम दास और अविनाश दास प्रमुख थे. ज्ञात हो की जे एन यू को छात्र राजनीति में ‘लाल किला’ यानी वामपंथ का गढ़ माना जाता है और बीते दिनों से अन्यान्य कारणों और अपने आंदोलनों को लेकर जे एन यू समाचारों की सुर्ख़ियों में छाया हुआ था पर जन्माष्टमी के भव्य आयोजन में सभी छात्र संगठनों ने शिरकत की और कार्यक्रम को यादगार बनाया. जापान के छोटे से शहर फुकुओका में कुछ यूँ मनी जन्माष्टमी  हमारे ब्यूरो को विदेशों से भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाए जाने के समाचार अभी तक मिल रहे हैं. जापान के फुकुओका शहर में भी वहाँ रहने वाले भारतीय छात्रों और भारतीय समुदाय के लोगों ने जन्माष्टमी का आयोजन परम्परागत तरीके से किया और सभी को प्रसाद बांटे.

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