पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे- रेणु

एक अभिनेत्री की कहानी रेणु सिन्हा की कलम से .. पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए.. यह कहते हुए मुझे अजीब तो लगता है लेकिन यह सच है कि बचपन में अक्षर – ज्ञान मिलते ही मैं हिंदी साहित्य का अध्ययन करने लगी थीं साथ ही कविताएँ, कहानियाँ लिखने की भी कोशिश करती थी । दस वर्ष की अवस्था तक पहुँचते – पहुँचते मैंने भी अमृत लाल नागर, भगवती चरण वर्मा, धर्मवीर भारती, श्रीलाल शुक्ल और आचार्य चतुर सेन जैसे तकरीबन सभी नामचीन साहित्यकारों की पुस्तकों का अध्ययन कर लिया और बाद में अंग्रेजी साहित्यकारों को भी पढ़ा। अभी के उपन्यासकारों में अंग्रेजी के अभिताव घोष मुझे बेहद पसंद हैं । पढ़ते समय कहानियों के पात्र मेरे आगे खड़े हो जाते थे, उनकी दुनिया मेरे आसपास बस जाती थी । शायद उसी समय अभिनय और थियेटर के प्रति मेरे रुझान के बीज पड़ गए, लेकिन उन सपनों को मूर्त रूप देने में परिस्थितियों की सहयोग नहीं मिल सका । अन्य महिलाओं की तरह मैंने भी घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही अपने वजूद को कहीं खो सा दिया था। लेकिन कहते “Its better late than never”. यूँ कहें कि “देर आए, दुरुस्त आएँ” तो 2017 में मेरी कविताओं का संग्रह पुस्तक रूप में “स्वयंत” नाम से प्रकाशित हुआ । इसने मुझे खुशी तो दी लेकिन पूरा संतोष नहीं मिला | जब भी नाटक था थियेटर

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‘उसका फैसला’ का लोकार्पण

कहानियों का संग्रह है ‘उसका फैसला’ साहित्यकार डॉ. नीरज सिंह की सद्य प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण डॉ. कुंती सिंह को समर्पित है ‘उसका फैसला‘ आरा: कहानी संग्रह ‘उसका फैसला’ डॉ नीरज सिंह की नई पुस्तक का नाम है जिसे अभिधा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है । इस पुस्तक को डॉ. नीरज सिंह ने अपनी जीवन संगिनी डॉ. कुंती सिंह को समर्पित की है । इसका लोकार्पण भी उन्हीं के हाथों एक पारिवारिक आयोजन में सम्पन हुआ था । पुस्तक का सार्वजनिक लोकार्पण पटना के जमाल रोड स्थित जनवादी लेखक संघ के राज्य कार्यालय में सुप्रसिद्ध कवि श्रीराम तिवारी , सीटू के पूर्व राज्य महासचिव अरुण कुमार मिश्र, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की पत्रिका ‘ प्राच्यप्रभा ‘ के संपादक चर्चित कवि विजय कुमार सिंह , जनवादी लेखक संघ ,बिहार के सचिव चर्चित युवाकवि कुमार विनीताभ , शिक्षक नेता और साहित्यकार शाह जफर इमाम तथा हिदी और मगही के चर्चित साहित्यकार घमंडी राम के हाथों सम्पन्न हुआ.कार्यक्रम में जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा , बिहार के अध्यक्ष प्रख्यात लोकगायक अशोक मिश्र , राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष अरुण कुमार , आलोचक युगलकिशोर दुबे , डॉ उपेंद्र कुमार यादव , उर्दू के युवा कवि – आलोचक जफर इकबाल , युवा कवि सुनील प्रिय आदि अन्य कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे. डॉ नीरज सिंह की कहानियों में है क्या क्लासिक अंदाज की मुकम्मल संरचना नीरज सिंह की ज्यादातर कहानियों में मिलती है, इसे आप इस संग्रह से गुजरते हुए सहज ही गौर कर सकते हैं। इसके साथ-साथ, इस बात पर भी गौर कर सकते हैं

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“राइडर्स टू द सी” की बेहतरीन प्रस्तुति पटना में

नाट्य प्रस्तुति कल्पनाओं और वास्तविकता के मूल को ध्यान में किया गया जो एक बेहतरीन प्रस्तुति थी -संजय उपाध्याय कलाकारों ने अपने संवाद सम्प्रेषण और निर्देशक की रचनाशीलता प्रस्तुति को जीवंत बनाती है – परवेज अख्तर पटना: नाट्य संस्था वाइटल इन्वेंशन ऑफ सोशल हारमोनी विद आर्ट (विश्वा) ने जॉन मिलिंगटन सिन्ज लिखित एवं राजेश राजा निर्देशित नाटक “राइडर्स टू द सी” का मंचन कालिदास रंगालय गांधी मैदान पटना में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पटना की मेयर सीता साहू ,परवेज अख्तर,संजय उपाध्याय ,बिहार पुलिस मेंस एसो के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह और अन्य ने किया ।इस मौके पर संस्था की ओर से आगत अतिथियों को सम्मानित भी किया गया । नाटक की कहानी समंदर के सवार एक दुखांत कथा है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो एक समुद्री टापू पर रहता है, जिसमें एक माँ अपने दो बेटियों और एक बेटे के साथ रहती है। उस स्त्री ने अपने पति और अपने 4 बेटों को समंदर में खो दिया है घर में कमाने वाला सिर्फ एक ही बेटा बच्चा है और वो भी छोड़े बेचने टापू के पार जा रहा है समुद्री जीव से उस मां को ये डर है की रात होने तक उसका कोई भी पुत्र जीवित नही रहेगा इसलिये वो अपने बेटे को समंदर में नहीं जाने को कहती है पर वो अंतिम बेटा समुद्र में चला जाता है। अपने अकेले बचे बेटे के भी समंदर में जाने से मां विक्षिप्तता की स्थिति में भ्रम और सच्चाई के बीच संघर्ष करती है उसे अपने सारे खोए

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तीज व्रत पर मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन

हर महीने होगा कार्यक्रम – पल्लवी प्रियदर्शिनी आरा: हरितालिका तीज के शुभ अवसर पर मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन संस्कार भारती के द्वारा पल्लवी ब्यूटी पार्लर मे हुआ। (नवादा चौक) आरा में हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन पल्लवी प्रियदर्शनी के द्वारा किया गया। जिसमे लगभग 20 बच्चियों बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 1नेहा कुमारी ,2 ज्योति कुमारी,2 अंजली तिवारी, 3 आरोही,सोनम, अराध्या, आकांक्षा प्रियदर्शनी, मौके पर (शाहपुर) लाइब्रेरियन टीचर स्मृति रानी ,उदवंतनगर शिक्षिका पुष्पा शर्मा,बिकी देवी,गीता कुमारी , बच्चियों को सेनेटरी नैपकिन के बारे में बताया गया डेमो देखकर उसके फायदे और नुकसान के बारे मे बताया गया और बच्चियों को डे जॉय सेनेटरी नैपकिन गिफ्ट किया गया। पल्लवी प्रियदर्शिनी ने बताया कि हम अपने पार्लर के माध्यम से हर महीने नई नई प्रतियोगिताओं के साथ आएंगे और सांकृतिक चेतना तीज त्योहारों को लेकर लोगों को जागृत करेंगे। Pnc desk

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सोने के दौरान हुई सिद्धार्थ शुक्ला की मौत!

रात में जल्दी ली थी दवा ,उसके बाद सोने चले गए मुंबई: अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला ने तबियत खराब होने पर रात में कोई दवा खाई और सोने चले गए थे डॉक्टरों ने बताया कि नींद के दौरान मौत होने को लेकर रिपोर्ट्स आई हैं। कल रात सिद्धार्थ की तबीयत ठीक नहीं थी जिसके बाद उन्होंने दवा लेने का फैसला किया और जल्दी सो गए। इसके बाद से वे उठे ही नहीं सुबह में सिद्धार्थ के परिवार के सदस्य और कर्मचारी आज गुरुवार को उन्हें उठाने गए, लेकिन वे अचेत अवस्था में मिले, जिसके बाद उनकी बहन और देवर सिद्धार्थ को कूपर अस्पताल ले गए, वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सिद्धार्थ शुक्ला के दोस्तों और सहकर्मियों ने सोशल मीडिया पर बता रहे हैं कि वह एक बेहद फिट और मजबूत व्यक्ति थे और किसी भी बीमारी से पीड़ित नहीं थे। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने के बाद डॉ. निरंजन और डॉ. शिवकुमार ने अभिनेता के शरीर को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मृत्यु बहुत पहले नींद के दौरान हुई होगी। अंतिम रूप से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में अभी देर है। सिद्धार्थ शुक्ला के परिजनों ने मीडिया से अपील की है कि पारिवारिक गरिमा को ठेस न पहुंचने दें ।शुक्ला की मौत के बाद कई फिल्मी हस्तियों ने भी ट्वीट किया है । Pnc desk

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आरा की साधना को मिला नूरफ़ातिमा सम्मान

भोजपुर की रंगकर्मी साधना श्रीवास्तव को मिला नूर फातिमा सम्मान पटना ;’प्रयास’ संस्था, एकता मंच और बिहार आर्ट थिएटर के संयुक्त सहयोग से नूर फातिमा जयंती समारोह नूर फातिमा अवार्ड से सम्मानित किया गया । प्रयास संस्था ,एकता मंच और बिहार आर्ट थियेटर प्रति वर्ष रंगकर्म और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े एक-एक हस्ताक्षर को नूर फातिमा अवार्ड से सम्मानित भी करता आ रहा हैं ।भोजपुर आरा की रहने वाली साधना श्रीवास्तव का लगाव बचपन से ही नाटकों के प्रति था । घर में सांस्कृतिक वातवरण रहने से इन्होंने नाटक और अभिनय के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाना शुरू किया। इनकी बड़ी बहन श्यामली श्रीवास्तव भी भोजपुरी फिल्मों और टीवी सीरियल में काम करती हैं। इन्होंने स्व.श्याम मोहन अस्थाना के भी कई नाटकों में काम किया है और दर्शकों को अपने अभिनय से मंत्रमुग्ध किया है। कालिदास रंगालय में आयोजित सम्मान समारोह में इन्हें नूर फातिमा सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके पर नाबार्ड के डा.सुनील कुमारपूर्व आईएएस – शिवनंदन सहाय,प्रयास के महासचिव – मिथलेश सिंह, और वॉइस प्रेसीडेंट – श्यामल अहमद बांके बिहारी,कमांडेंट – मुन्ना कुमार उपस्थित रहे । आपको बता दें कि साधना ने संजय उपाध्याय के साथ विदेशिया ,श्री धर और मनोज कुमार सिंह के साथ भी कई नाटकों में भूमिका निभाई है जिन्हें राष्टीय स्तर के नाट्यप्रतियोगिताओं में कई बार बार विशेष सम्मान मिल चुका है। इंटर यूनिवर्सिटी डांस और गायन प्रतियोगिता में भी इन्हें प्रथम पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।साधना नाटक के साथ साथ शार्ट फिल्मों में भी नजर आती हैं।उनका लक्ष्य

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उर्दू के प्रसिद्ध लेखक अली जावेद का निधन

देश के संस्कृतिकर्मियों में शोक की लहर प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और उर्दू के प्रसिद्ध लेखक अली जावेद का मंगलवार आधी रात को दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में निधन हो गया। वे 68 साल के थे । उनके निधन पर देश भर के साहित्यकारों में गहरा शोक है ।संस्कृतिकर्मियों तथा लेखक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और सांप्रदायिकता तथा फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में उनके योगदान को याद किया है। जनवादी लेखक संघ (जलेस) की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि इस कठिन समय में साथी अली जावेद का जाना देश के लोगों के लिए एक सदमा लगा है । हाल ही में वो ब्रेन हैमरेज के शिकार हुए थे 13 अगस्त को उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था । बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने मंगलवार की देर रात सांस ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. अली जावेद ने जे एन यू से एमए और पीएचडी की उपाधि ली थी। इन दिनों वे प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष थे और इससे पहले उसके महासचिव रहे। 2012 से 2016 तक वे अफ्रीकन एण्ड एशियन राइटर्स यूनियन के भी अध्यक्ष रहे।

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चंद्रेश्वर की छह कविताएं

मेरी छः कविताएँ (1) मृत्यु का विकल्प मृत्यु का विकल्प बनती रहींभूलोक में स्मृतियाँ हीसदैव स्मृतियों में ज़िंदा रखा जा सकताकिसी मृत स्वजन याव्यतीत को असह्य पीड़ा होतीजब जाता हमेशा-हमेशा के लिएसगा कोई स्वयं को संभालना और……सहेजना स्मृतियों कोकितना कठिन होता एक के बाद एकअनगिनत मृत्यु सेहम हो जाते इस क़दरविचलित किजाने वालों के चेहरेतिर्यक रेखाओं की तरहकाटते दिखतेएक-दूसरों केचेहरों को हम उस कोलाज़ मेंतलाशने लगतेअपने ही चेहरे सुबह-सुबह सोकर जगते तोआईने के सामने पड़ते हीहथेलियों से स्पर्श करपता करतेकि मृतकों के चेहरों से बनेकोलाज़ मेंशामिल नहीं अभीहमारा चेहरा सांस बाक़ी है…. मृत्यु ग्रास बनाती रहतीहर किसी कोजो जाने जातेधरम-करम एवं पुण्यकर्म के लिएजो करते स्वस्थ चिंतनदेश एवं समाज कीबेहतरी के लिएउनको तो पहले ही लोक में यह धारणा चली आ रहीपुरानी कि अच्छे लोगों के लिएबुलावा आता ज़ल्दीयम के महल सेमृत्यु पुकारती रहतीउन्हें ही निरंतरअपनी कंदराओं से कोरोना की शक्ल में भीदबोच लेती पलभर में कुछ नेक लोग मानते आएसदियों से किपापियों के लिए ही आतींमहामारियाँमृत्यु का ग्रास बनकरजबकि सच तो यह किसबका हीसंहार करती वहसबको बनाती जातीअपना निवाला वह इस तरह काभेेद नहीं करतीजैसे पतझड़पत्तों में नहीं करतासबको गिराताज़मीन पर जैसे वृक्ष आच्छादित होते रहतेनये-नए पत्तों सेहरबारदुनिया भीसँवरती रहतीबार-बारमहाप्रलय के उपरांत ! (2) मँगरा कीड़ा चापलूस किसी समाजया संस्था में होतेमँगरा कीड़े की तरहजो साबुत लकड़ीया हरे-भरे पेड़ केस्वस्थ मोटे तनेया टहनी को भी बना डालतेएकदम खोखला…… चापलूसी से बहुत क्षति पहुँचतीइंसानियत कोइंसानी संस्कृति मेंविकृतियाँ ही नहीं पैदा होतींइससे नष्टप्राय हो जाती वहएक तरह से कहें तो मरणासन्न…… चापलूसी इंसान कोचौपाया से भी बदतर बनातीवह पाँवों से ही

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समाज के अंतिम पायदान की हकीकत से रूबरू कराती है ‘हाशिए पर हसरत’-हरिवंश

बहुत से विकास के कार्य हो रहे हैं लेकिन यह सच्चाई है कि लगभग सारी चीजें अंतिम पायदान के लोगों तक नहीं पहुंच पाई है -हरिवंश हरिवंश ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुसहर जाति से आने वाले जीतन राम मांझी को भी सीएम बनाया। यह भी समाज का एक यथार्थ है। सभी की यह मांग होती है कि समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों का उद्धार हो लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा संभव नहीं हो पाता है -अवधेश नारायण सिंह समाज के मार्मिक दृश्य की दस्तावेज और जीवंत कृति है यह पुस्तक भीम सिंह भवेश की पुस्तक का विधान परिषद सभागार में लोकार्पण प्रख्यात लेखक सह पत्रकार भीम सिंह भवेश की पुस्तक “हाशिए पर हसरत” का लोकार्पण सोमवार को बिहार विधान परिषद के सभागार में किया गया। प्रभात प्रकाशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम का पुस्तक का लोकार्पण राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, बिहार सरकार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह और बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर हरिवंश ने कहा कि हाशिए पर हसरत अपने आप में ही पूरी किताब के बारे में बता रहा है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समाज के मार्मिक दृश्य की दस्तावेज और जीवंत कृति है। बिना संवेदना के कोई कुछ नहीं लिख सकता है लेकिन मुसहर जाति से आने वाले लोगों के लिए लेखक ने जो कुछ लिखा है वह अद्भुत है। यह किताब सामूहिक जीवन के प्रयास का सत्य है, जिसे हम गागर में सागर भी कह सकते हैं। किताब का उल्लेख करते हुए हरिवंश

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एक थे प्रो.बी.लाल

प्रो. बी लाल की उत्तर पुस्तिका पर भी लिखा गया गया था Examinee is better than the examiner. अगर आप भोजपुर के रहने वाले हैं तो आपको पता होगा कि प्रो बी.लाल कौन थे नहीं पता तो हम आपको बता देते हैं जैसे भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की उत्तर पुस्तिका पर लिखा हुआ था ठीक वैसे ही प्रो. बी लाल की उत्तर पुस्तिका पर लिखा गया गया था Examinee is better than the examiner.उनकी ऐसी तेजस्विता और प्रतिभा को देख कर ग्रेजुएशन के बाद ही उन्हें प्रोफेसर नियुक्त कर लिया गया।प्रो. बी लाल कहानीकार मिथिलेश्वर जी के पिता थे।कहानीकार मिथलेश्वर की कलम सेयुवा रचनाकार श्री हरेराम सिंह ने साहित्यिक लगाव के तहत मेरे गांव बैसाडीह और मेरे घर को जब फेसबुक पर प्रस्तुत किया तो एक फेसबुक मित्र ने मेरे पिताजी की तेजस्विता और विशिष्ट प्रतिभा का स्मरण दिला दिया, जिससे पिताजी की याद मेरे मन में ताजा हो गई।प्रो.बी.लाल मेरे पिता थे।उनका नाम वंशरोपन लाल था।उच्च शिक्षा के प्रारंभिक दौर में ही वे कालेज शिक्षक हो गए थे, इस दृष्टि से हमारे पूरे क्षेत्र में प्रो. बी.लाल के नाम से ही जाने जाते थे।अपने समय में उनकी विलक्षण प्रतिभा की चर्चा न सिर्फ मेरे जनपद तक ही सीमित थी,बल्कि पूरे प्रदेश में लोग उन्हें आदर से स्मरण करते थे।जैसा कि विदित है, बचपन से ही वे अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे,परिणामतः प्रारंभिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक की हर परीक्षा में टाप करते रहे थे।ग्रेजुएशन तक पहुंचते- पहुंचते उनकी तेजस्विता चरम पर थी, फलतः हमारे प्रथम

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