जे एन यू से जापान तक जन्माष्टमी की रही धूम

जब जे एन यू पहली बार हरिनाम पर झूम उठा राजधानी दिल्ली का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जे एन यू हमेशा से सुर्ख़ियों में रहता आया है. इस बार चर्चा का केंद्र रहा पहली बार जे एन यू कैंपस में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन. जन्माष्टमी के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के सदस्यों ने कैंपस में हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया और अरावली की गोद में बसे हरे-भरे कैंपस में छात्र ‘हरे राम,हरे कृष्ण’ की धुन पर झूम उठे. इस कार्यक्रम में कैंपस में स्थित विभिन्न होस्टलों के लगभग 800 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों को ‘भगवद्गीता यथारूप’ की प्रति भी भेंट की गई. इस्कॉन के स्थानीय केंद्र की तरफ से अरविन्दाक्ष माधव दास, पादसेवन भक्त दास, सरोज मुख श्याम दास, अरिंदम दास और अविनाश दास प्रमुख थे. ज्ञात हो की जे एन यू को छात्र राजनीति में ‘लाल किला’ यानी वामपंथ का गढ़ माना जाता है और बीते दिनों से अन्यान्य कारणों और अपने आंदोलनों को लेकर जे एन यू समाचारों की सुर्ख़ियों में छाया हुआ था पर जन्माष्टमी के भव्य आयोजन में सभी छात्र संगठनों ने शिरकत की और कार्यक्रम को यादगार बनाया. जापान के छोटे से शहर फुकुओका में कुछ यूँ मनी जन्माष्टमी  हमारे ब्यूरो को विदेशों से भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाए जाने के समाचार अभी तक मिल रहे हैं. जापान के फुकुओका शहर में भी वहाँ रहने वाले भारतीय छात्रों और भारतीय समुदाय के लोगों ने जन्माष्टमी का आयोजन परम्परागत तरीके से किया और सभी को प्रसाद बांटे.

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ये है ‘सुई-धागों’ की “विभूति” !

जन्माष्टमी पर पटना नाउ की सौगात “सुई-धागे की विभूति” सुई-धागे से श्रीकृष्ण की तस्वीर बनाने वाली लड़की की कहानी  जिस सुई-धागे से भागती थी हरदम उसी ने दिलाई पहचान Special report   आरा,3 सितंबर. सुनने में आपको अजीब जरूर लगेगा क्या कभी सुई धागे से भी किसी की पहचान हो सकती है! या फिर यूँ भी कोई सोच सकता है कि कहीं इस खबर में 28 सितंबर को आने वाली फिल्म ‘सुई-धागा’ का प्रमोशन तो शामिल नही…! अरे नही जनाब ! आप इत्मिनान रखिये ऐसा कोई प्रमोशन का चक्कर नही है यहाँ… पटना नाउ ने खोज निकाला है इस जन्माष्टमी उस लड़की को जो सुई-धागे की मदद से कसीदाकारी कर श्रीकृष्ण की तस्वीर को कपड़े पर बना देती है. आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी लड़की की दास्तान जिसने सुई-धागे की मदद से अपनी पहचान हर जगह बना रही है. गोढ़ना रोड के शिवपुरी निवासी आनन्द कुमार की पुत्री विभूति कुमारी ने अपनी पहचान सुई-धागे से इस कदर बनाई है कि उसके सुई-धागे के कारनामे के मुरीद बन लोग उससे मिलने आते है. कृष्ण से बुद्ध तक की कलाकृतियां सुई-धागे से सुई-धागे से बने कई कलाकृतियों को आपने जरूर देखा होगा लेकिन क्या आपने एप्लिक वर्क में राधा-कृष्ण और भगवान बुद्ध को देखा है? विभूति के द्वारा बनाये गए कसीदाकारी में बहुत ही बारीकियां दिखती हैं. गौर से देखने पर पता चलता है कि आकृतियों के भीतर भी आकृतियाँ हैं जो इसे खास बनाती है और सिद्ध करती है कि बनाने वाले ने कितना मेहनत किया है. बुद्ध की

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कजरी महोत्सव मनाया गया

आरा. सावन का महीना हो हरी चूड़ियां उर हरे रंग की साड़ियों के साथ भोजपुरी लोकगीत कजरी की बात न हो तो सावन अधूरा लगता है. पहले सावन आते ही झूले और कजरी की गूंज हर तरफ दिखती थी लेकिन आधुनिकता के इस दौर में लोग इसे भूलते जा रहे हैं. लेकिन कुछ सामाजिक संस्था ऐसे हैं जो ऐसे लोकरंग को जीवित रखने में अपना पूर्ण योगदान दे रहे हैं. इस साल सावन महीने में लुप्त होती कजरी को नेशनल साइन्टीफिक रिसर्च एंड सोसल एनालिसिस ट्रस्ट आरा ने अपने कार्यालय कजरी महोत्सव का आयोजन कर किया. कजरी महोत्सव 72वें स्वंतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित की गई. झंडोतोलन के बाद शाम में कजरी का शानदार आयोजन हुआ. राजा बसंत और अविनाश कुमार पांडे(कुली बाबा) अपने साथियों सहित गायन से कजरी का जलवा बिखेरा. इस मौके पर छाया श्रीवास्तव और शगुन श्री ने भी अपनी प्रस्तुति दी. इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी मो.सरूर अली अँसारी संस्था के निदेशक श्याम कुमार ‘राजन’ , संजय पाल, शालिनी श्रीवास्तव, विभूति कुमारी,प्रीति चौधरी,मनोज सिंह,अभिषेक गुप्ता थे. आरा से रवि प्रकाश सूरज की रिपोर्ट

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इस ‘रक्षाबन्धन’ सीमा के प्रहरी बांधेंगे ये “डिज़ाइनर राखियाँ”

संभावना विद्यालय की सीमा के रक्षकों के लिए अनूठी पहल आरा । संभावना आवासीय उच्च विद्यालय, आरा में पिछले चार दिनों से चले आ रहे ‘शान्ति स्मृति शैक्षणिक न्यास’ द्वारा आयोजित राखी मेकिंग वर्कशॉप का समापन सोमवारा को हुआ. प्रशिक्षण सत्र के समापन के बाद विद्यालय की छात्राओं द्वारा सैनिकों के सम्मान में बनाये गए आकर्षक रंग-बिरंगी राखियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई ‘सैनिकों का ऐसा सम्मान गर्व की बात‘ प्रदर्शनी का उदघाटन डॉ कन्हैया बहादुर सिंह , कार्यकारी अध्यक्ष , बिहार राज्य विश्विद्यालय शिक्षक महासंघ ने फीता काटकर किया. प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्राओं द्वारा सैनिकों का सम्मान गर्व की बात है और इससे देश का सुंदर भविष्य निर्धारित होता है . विद्यालय प्रबंधन द्वारा ऐसे आयोजन का मैं स्वागत करता हूँ और ऐसे आयोजन से कुशल भारत का निर्माण होगा साथ ही समाज में फैली विकृतियाँ भी दूर होगी. अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यालय की प्राचार्या अर्चना सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्राओं की रचनात्मकता उभरकर सामने आती है. छात्राओं द्वारा बनाई गई आकर्षक राखियाँ इनके मेहनत का प्रतिफल है और इन राखियों को कारगिल सीमा पर तैनात सैनिकों को भेजा जाएगा , यही इस वर्कशॉप का उद्देश्य है. रंग-बिरंगी राखियाँ बनाने वाली छात्राओं को मिला पुरस्कार राखी मेकिंग वर्कशॉप में मनभावन राखियाँ बनाने वाली अदिति कुमारी, अंशु कुमारी , नेहा कुमारी , अग्रणी प्रिया, साक्षी सिंह , सिमरन कुमारी , सृजना कुमारी और शब्बो खातून को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ कन्हैया बहादुर सिन्हा और विद्यालय के निदेशक कुमार द्विजेन्द्र

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प्रेमचन्द के सपनों का समाज और देश का यथार्थ : परिचर्चा का हुआ आयोजन

मौका प्रेमचन्द जयंती आयोजन का आज प्रलेस, जलेस, जसम, युवानीति, कला कम्यून और इप्टा की ओर से प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आरा के महावीर टोला स्थित साईं इंटरनेशनल स्कूल में “प्रेमचंद के सपनों का समाज और देश तथा आज का यथार्थ” विषय पर बहस आयोजित की गयी। कार्यक्रम में बहस के विषय को खोलते हुए प्रो. रवींद्रनाथ राय ने प्रेमचंद के कहानियों, उपन्यासोंऔर उनके वैचारिक लेखों का हवाला देकर आज के सामाजिक और आर्थिक सवालों को श्रोताओं के सामने रखा। उन्होंने देश में धार्मिक मान्यताओं को आडंबर में तब्दील करके देश की स्थिति को विकराल बनाने वालों को निशाने पर लिया। इसके बाद रामनाथ ठाकुर ने समाज के बिगड़ते हुए हालत के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार बताया। शिक्षक और कला कम्यून के  प्रसिद्ध चित्रकार राकेश दिवाकर ने कहा कि शिक्षकों को शिक्षा से इतर कई कार्यों में लगा दिया जाता है, जिससे उनके मुख्य कार्य बाधित हो जाते हैंl  नेता अजित कुशवाहा ने प्रेमचंद की रचनाओं में मौजूद सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और वैचारिक सवालों को आज के समय में अर्थपूर्ण विश्लेषण करने की बात कही। कवि सुमन कुमार सिंह ने आज की समसामयिक चुनौतियों के संदर्भ में कहा कि ये लंबे समय से पैर फैलाते हुए सामने आयी हैं। कुछ व्यक्ति धर्म के ठेकेदार हो जा रहे हैं। कोई निजी स्कूल शिक्षा का मानक तय करने लगती है। और इन पर बोलना और कुछ कहना खतरे से खाली नहीं है। कवि ओमप्रकाश मिश्र ने प्रेमचंद के साहित्य को साहित्यकारों और समाज के लिए प्रकाश स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि

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आदि शक्ति नाट्य महोत्सव का अंतिम दिन : ‘वेटिंग फॉर यू’ का मंचन

सबूझ सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता की प्रस्तुति सामयिक परिवेश और कला जागरण द्वारा आयोजित प्रेमचन्द खन्ना स्मृति समारोह के अंतिम दिन कालिदास रंगालय में सबूझ सांस्कृतिक केंद्र,कोलकाता के कलाकारों ने ‘वेटिंग फॉर यू’ नाटक की शानदार प्रस्तुति की. इस नाटक में समंदर किनारे बसे ९ लोगों के जीवन को दर्शाया गया है, जिसमें सबकी अपनी अलग-अलग कहानी है किसी को प्यार के खोने का गम, किसी को दूसरे की तरह खुबसूरत नहीं दिखने का गम, किसी को बच्चे को खोने का गम, किसी को परिवार से बिछड़ने का गम तो किसी को पैर खोने का गम. प्रकाश और रंगों का अद्भुत संयोजन ९ अलग-अलग कहानियों को एक सूत्र में पिरोकर अत्यंत खुबसुरत ढंग से मंचित किया गया. प्रकाश और रंगों के प्रोजेक्टर के माध्यम से अद्भुत संयोजन से दर्शकों को किसी सिनेमा हॉल में बैठकर चलचित्र देखे जाने जैसा अद्भुत अहसास हुआ. कलाकारों में परमिता घोष, दीप चक्रवर्ती, सुभजीत दत्त गुप्ता, उज्जैनी घोष, रंजीता रॉय, शुभाश्री भट्टाचार्य, विप्लव हलधर, उज्जैल मंडल, सुमोदीप सिन्हा, सुवोजीत डे, अर्पिता बनर्जी, अरग्या बनर्जी, नवबिता मित्रा, मास्टर श्याम, और अमित प्यारा ने अपने अभिनय से सबका मन मोह लिया. इस नाटक में प्रकाश परिकल्पना सौविक मोदक, प्रकाश प्रोजेक्शन नवमीता घोष, तथा कहानी, परिकल्पना और निर्देशन राजेश देबनाथ की थी.

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कवि सम्मलेन में बही काव्य-सरिता

प्रेमचन्द खन्ना स्मृति समारोह का अंतिम दिन ‘सामयिक परिवेश’ एवं ‘कला जागरण’ के संयुक्त तत्त्वाधान में चल रहे तीन दिवसीय प्रेमनाथ खन्ना स्मृति समारोह के अंतिम दिन काव्य समारोह का आयोजन हुआ जिसके संयोजक समीर परिमल तथा अध्यक्षता कासिम खुर्शीद ने की. कार्यकम का उद्घाटन संयुक्त रप्प से कासिम खुर्शीद, ममता मेहरोत्रा, तथा मृत्यंजय कुमार सिंह ने किया तथा मंच सञ्चालन रामनाथ शोधार्थी ने किया. कवि सम्मेलन में ३० से अधिक कवियों ने कविता-पाठ किया जिनमें प्रमुख खुर्शीद अनवर, शाजिया नाज़, विकास राज, अक्स समस्तीपुरी, सूरज ठाकुर बिहारी, सुनील कुमार, नितेश सागर, श्याम कुंवर भारती, प्रियंका वर्मा, संजय संज, राकेश सिंह सोनू, अमीर हमजा, कुंदन कुमार कदम, हैमत दस हिम थे. कविताओं पर झूमे दर्शक जिन कवियों के कविता की कुछ पंक्तियों ने श्रोताओं की वाहवाही बटोरी, उनमें से कुछ की बानगी – मैं भला हूँ या बुरा हूँ, आपको तकलीफ क्यूँ, बुझ रहा हूँ या जल रहा हूँ, आपको तकलीफ क्यूँ (कासिम खुर्शीद)   प्रेम खामोश एक कहानी है, प्रेम से रूह की जवानी है, हम किसी से ना बैर कर पाए, प्रेम का रोग खानदानी है (सूरज बिहारी ठाकुर,सुपौल) हथेली की लकीरों को बढ़ाकर, मैं कद अपना बढ़ाना चाहता हूँ (खुर्शीद अनवर) मैं खुली एक किताब हो जाऊ, तू पिए तो शराब हो जाऊ (निलेश उपाध्याय) लघु और नृत्य नाटिका का हुआ प्रदर्शन इस अवसर पर फोटोग्राफी के लिए ईशान तथा आशुतोष मेहरोत्रा को सम्मानित किया गया. इसके बाद यू के डांस अकादमी के बच्चों ने सेव गर्ल पर लघु नाटिका प्रस्तुत की साथ ही भगवान् है कहाँ

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कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद को उनकी जयंती पर नमन

मशहूर कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर पूरे देश मे जयंती मनायी गयी. गोष्ठि, सभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम से लेकर कविता पाठ तक का कार्यक्रम किया गया. लेकिन क्या आप जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ अनछुए पहलुओं को? आइए हम बताते हैं कलम के एक बुलंद आवाज के शख्स मुंशी प्रेमचंद के बारे में जिनकी रचनायें पढ़ने के बाद उनके रचित चरित्र पाठक की आंखों के सामने दृश्य बनकर दौड़ने लगते हैं. धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ नवाब राय उर्फ मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था. उनका पहला विवाह पंद्रह साल की उम्र में हुआ, 1906 में उन्होनें अपना दूसरा विवाह बाल-विधवा शिवरानी देवी से किया. उनकी रचना सोजे-वतन (राष्ट्र का विलाप) पर पाबंदी लगी तो वे धनपत राय नाम छोड़कर प्रेमचंद नाम से लिखने लगे. इस दौरान उन्होनें मर्यादा , माधुरी , हंस , जागरण आदि पत्रिकाओं का सम्पादन किया और मजदूर फिल्म की कथा-पटकथा भी लिखी. उन्होनें तीन सौ कहानियां, 15 उपन्यास और कई लेख , नाटक आदि लिखे और विदेशी कहानियों/नाटकों का अनुवाद कार्य भी किया. गोदान उनकी कालजयी रचना है. उन्होंनें हिंदी और उर्दू में लिखा. प्रेमचंद की प्रमुख कहानियों में – ‘पंच परमेश्वर’, ‘गुल्ली डंडा’, ‘दो बैलों की कथा’, ‘ईदगाह’, ‘बड़े भाई साहब’, ‘पूस की रात’, ‘कफन’, ‘ठाकुर का कुआँ’, ‘सद्गति’, ‘बूढ़ी काकी’, ‘तावान’, ‘विध्वंस’, ‘दूध का दाम’, ‘मंत्र’ आदि उल्लेखनीय हैं. 08 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया. मरणोपरांत उनकी कहानियाँ मानसरोवर नाम से 8 खंडों में प्रकाशित हुई हैं. सत्यजित राय, के सुब्रमण्यम,

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आदि शक्ति नाट्य महोत्सव का दूसरा दिन : ‘मकान’ का मंचन

प्रेमचन्द खन्ना स्मृति महोत्सव के दूसरे दिन आदि शक्ति नाट्य महोत्सव में ममता मेहरोत्रा लिखित, अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा द्वारा परिकल्पित और सुमन कुमार निर्देशित नाटक ‘मकान’ का मंचन ‘कला जागरण’ ने प्रस्तुत किया. प्रस्तुत नाटक में एक माँ की कथा है जिसने एक मकान का सपना देखा है, पर कैसे उसके अपने ही दो बेटे बहुओं के कहने में आकर झगड़ा करते हैं और कोर्ट-कचहरी के बाद मकान नीलाम हो जाता है और माँ का सपना टूट जाता है. कलाकारों में मिथिलेश कुमार सिन्हा (शंकर साहू), आमिर हक़ (छोटा भाई), नेहा कुमारी (छोटी बहू), श्रृष्टि कुमारी (बड़ी बहू), करिश्मा कुमारी (माँ), अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा (दूधवाला), सीतेश कुमार सिंह (सेठ/पंडित/व्यक्ति), राकेश कुमार (हाकिम), मनु कुमार (चपरासी/मजदूर), आदर्श प्रियदर्शी (मजदूर/व्यक्ति), आराध्या सिन्हा (मुन्नी), अनुराग (मुनीम) ने अपने अभिनय से प्रभावित किया. पार्श्व से मंच-सज्जा प्रदीप गांगुली, रूप-सज्जा हीरा लाल राय, संगीत प्रभाव अजीत गुज्जर, ध्वनि नियंत्रण उपेन्द्र कुमार, प्रकाश सज्जा राज कुमार, वस्त्र विन्यास रीना कुमारी, मनु राज, प्रस्तुति सहयोग रणविजय सिंह, अमित कुमार, अभिषेक कुमार, कृष्णा कुमार, प्रस्तुति संयोजन रोहित कुमार, और मार्गदर्शन गणेश प्रसाद सिन्हा, डॉ किशोर सिन्हा, सुशील शर्मा, नीलेश्वर मिश्र, कन्हैया प्रसाद ने किया.   पटना नाउ ब्यूरो की रिपोर्ट

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शहर में आज : प्रेमचन्द खन्ना स्मृति समारोह (दूसरा दिन)

प्रेमचन्द खन्ना स्मृति समारोह के दुसरे दिन २८ जुलाई को कालिदास रंगालय में ३.०० बजे से ‘इको स्पिरिचुअलिटी’ द्वारा ‘एक्यूप्रेशर द्वारा महिला रोगों का इलाज़’ सम्बन्धी सेमिनार आयोजित किया जाएगा .  इसके बाद ४.०० बजे से पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम होगा जिसमें ‘टाइम मैनेजमेंट’-ममता मेहरोत्रा की पुस्तक का विमोचन और ‘सामयिक परिवेश’ के नये अंक का लोकार्पण तथा ‘सफ़र…जिंदगी की तलाश’ – १२ लेखकों के यात्रा-संस्मरण संग्रह का विमोचन भी किया जाएगा. इसके अलावा रचनाकार सत्यनारायण का सम्मान भी इसी सत्र में आयोजित होगा. ५.३० बजे से कलांगन द्वरा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की जायेगी. ७.०० बजे सायं से ‘मकान’ नाटक का मंचनहोगा.  ‘कला जागरण’ की इस प्रस्तुति की लेखिका ममता मेहरोत्रा हैं और नाट्य रूपांतरण अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा स्वर किया गया है जिसका  निर्देशन सुमन कुमार करेंगे.                               

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