‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ व ‘सुपोषण दिवस’ पर नुक्कड़ नाटक का हुआ मंचन

गड़हनी (मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट) | प्रखंड अंतर्गत बड़ौरा गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 1 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ व सुपोषण दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी सेविका सीमा तिवारी के नेतृत्व में जागरूक करने को लेकर नुक्कड़ नाटक किया गया. नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज मे बेटी को कैसे बचाया जाए व बढ़ाया जाय, इसका मंचन हुआ. साथ ही, “बेटी कहती है कि पापा मुझे मत मारो, मैं संसार मे आना चाहती हूँ औऱ कुछ कर के दिखाना चाहता हूँ” – का भी मंचन किया गया. इस नाटक को देखकर गाँव के लोगों और लड़कियों की आँखों मे आंसू आ गए. आंगनबाड़ी सेविका सीमा तिवारी ने कहा कि आज की लड़कियों में लड़कों से कुछ ज्यादा कर दिखाने का जज्बा है और दिखा भी रही है. इस मौके पर इन्द्रावती देवी, किरण देवी, युवा नेता प्रतीक कुमार, मंजू देवी, इशरत जहां, गुलसन ख़ातून, समाजिक कार्यकर्ता सुरेश सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे.

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पद्म पुरस्कार 2019 घोषित

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक- पद्म पुरस्‍कार, तीन श्रेणियों – पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री वर्गों में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार विषयों, गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों, नामत: कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, प्रशासनिक सेवा आदि में प्रदान किए जाते हैं. ‘पद्म विभूषण’ असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और ‘पद्मश्री’ किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं. इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है. ये पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा रस्‍मी समारोहों में प्रदान किए जाते हैं, जिनका आयोजन राष्ट्रपति भवन में आमतौर पर हर साल मार्च/अप्रैल के आसपास किया जाता है. इस वर्ष भारत के राष्ट्रपति ने 112 पद्म पुरस्कार प्रदान करने की मंजूरी दी है, जिसमें एक युगल मामला (युगल मामले में, पुरस्कार को एक माना जाता है) है, जैसा कि निम्‍नलिखित सूची में दिया गया है. इस सूची में 4 पद्म विभूषण, 14 पद्म भूषण और 94 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं. पुरस्कार पाने वालों में 21 महिलाएं हैं और सूची में विदेशी/प्रवासी भारतीय/ पीआईओ /ओसीआई, की श्रेणी के 11 व्यक्ति, 3 मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले और 1 ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी शामिल हैं. पद्म विभूषण (4) सुश्री तीजन बाई कला-गायन-लोक छत्तीसगढ़ श्री इस्माइल उमर गुलेह (विदेशी) सार्वजनिक मामले जिबूती श्री अनिलकुमार मणिभाई नाइक व्यापार और उद्योग-बुनियादी महाराष्ट्र ढांचा श्री बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे कला-अभिनय-थियेटर महाराष्ट्र पद्म भूषण- (14) श्री जॉन चैम्बर्स (विदेशी)

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यात्रियों में खुशी की लहर | पटना एयरपोर्ट से शुरू हुई एयरपोर्ट एक्सप्रेस बस सेवा

परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने हरी झंड़ी दिखा कर किया फ्लैग ऑफपरिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा फ्लाइट शिड्यूल के अनुसार बसों का होगा परिचालनफिलहाल हर 45 मिनट पर एयरपोर्ट से खुलेंगी बसेंदो रूट पर चलेंगी बसें, आवश्यकता अनुसार बढ़ाई जाएगी बसों की संख्याएयरपोर्ट एक्सप्रेस बस में 65 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षितबस में जीपीएस, सीसीटीवी और ई टिकटिंग की है व्यवस्था 32 सीटर है बस, दिव्यांग, सिनियर सिटीजन और ट्रांसजेंडर के लिए भी आरक्षित हैं सीटेंगर्मी के दिनों में एसी बस शुरू करने के लिए भी किया जाएगा विचारएयरपोर्ट से गांधी मैदान और पटना जंक्शन का बस किराया 50 रुपया पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा पटना एयरपोर्ट से गुरुवार को एयरपोर्ट एक्सप्रेस बस सेवा शुरू की गई. नई बस सेवा का फ्लैग ऑफ परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला और परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने किया. एयरपोर्ट से दो मार्गों पर हर दिन बसों का परिचालन किया जाएगा. परिवहन विभाग मंत्री संतोष कुमार निराला ने कहा कि बिहार में परिवहन सेवा की स्थिति बेहतर हुई है. देश-विदेश से पटना एयरपोर्ट पर उतरने वाले यात्रियों को परिवहन निगम की बसों से उनके गंतव्य पर पहुंचाया जायेगा. इस मौके पर एयरपोर्ट डायरेक्टर आरएस लाहौरिया, इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन प्रबंधक रूपेश आदि उपस्थित थे. परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि एयरपोर्ट से शहर के अन्य हिस्सों में आने-जाने के लिए अब कम खर्च करना होगा. सस्ते दरों पर एयरपोर्ट से उतर कर शहर में बस से सफर कर सकते हैं. फिलहाल दो

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जहाँ होती रचनात्मकता की भी अग्निपरीक्षा

अजूबा करनामा ऐसा सुना है कभी… 2 दिनों में 50 फिल्में!रचनात्मकता की धरातल पर नई सोच को उतारते भोजपुर के अति सकरात्मक लोग आरा, 20 जनवरी. जी हां बिल्कुल सही सुना आपने भोजपुर ही है वह धरती जहाँ रचनात्मकता की भी अग्निपरीक्षा होती है. पटना नाउ ने 2 दिन पहले अपने हैडिंग में जिस खबर को लिखा था रचनात्मकता की अग्निपरीक्षा, उस अग्निपरीक्षा में खरे उतरे रचनात्मकता को जन्म देने वाले कुछ जुनूनी लोग जिसके गवाह बने 50 बच्चे और जॉ पॉल हाई स्कूल जिसने इस अनोखी पहल से दुनिया के सामने एक नई मिसाल कायम कर एक अनूठा करनामा कर दिखाया है. जिस फ़िल्म को बनाने में महीनों लग जाते हैं उस फिल्म को 2 दिनों के अंदर 50 बच्चों ने 50 फिल्मे बना कर सबको अच्चम्भित कर दिया है. जी हाँ भले ही ये फिल्में लघु हैं और मोबाइल से शूट की गई हैं लेकिन उन्हें बनाने, उनके कंटेट को लिखने और समझने की सोच को जरूर विकसित किया गया है जो बच्चों के मस्तिष्क में कल्पनाओ की उड़ान ले रहे हैं. क्या पता आने वाले दिनों में ये 50 बच्चे भविष्य के लेखक, निर्देशक, सिनेमेटोग्राफर, आर्ट डायरेक्टर या अन्य विधाओं के माहिर खिलाड़ी बन जाएं! ऐसी संभावनाओ की जननी रहा दो दिवसीय फ़िल्म मेकिंग का कार्याशाला जिसके समापन पर बच्चों के अभिवावकों के साथ शहर के प्रबुद्ध जनों ने बच्चों की फिल्में देखी और सराहा. 18-19 जनवरी तक आयोजित गंगा जगाओ अभियान और जॉ पाल स्कूल आरा के तत्वावधान में कविता लेखन व फ़िल्म मेकिंग की दो

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नन्हे फ़िल्म मेकरों से रौनक होगा भोजपुर

2 दिनों में बच्चों ने शूट किए 50 लघु फिल्में आरा, 19 जनवरी. लगता है आने वाले समय मे भोजपुर जिला नन्हे फ़िल्म मेकरों से देश-दुनिया मे छाने वाला है. बच्चों को मिट्टी का लोंदा कहा गया है,मतलब उन्हें जैसा गढ़िए वे वैसा बन जाते है. बच्चों में क्रिएटिविटी के जरिये उनके अंदर कुछ अनोखा करने का प्रयास किया पिछले दो दिनों में कुछ फ़िल्म मेकरों ने आरा में. क्रिएटिव कार्यशाला के जरिये 2 दिनों में 50 फ़िल्म बच्चों से बनवाने की उनकी पहल तो पहले ऐसा लगा कि क्रिएटिविटी की ही अग्निपरीक्षा हो लेकिन दो दिनों में जो रिजल्ट आया सचमुच वे इस अग्निपरीक्षा पर खरे उतरे. बच्चों ने इस अग्निपरीक्षा पार कर सबको अचंभित कर दिया है. फ़िल्म मेकिंग व कविता लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन मशहूर कवि व लेखक निलय उपाध्याय ने प्रार्थना के बाद विद्यालय के समस्त बच्चों को सम्बोधित करते हुए जल संकट और गंगा जैसी पवित्र व जीवनदायिनी नदी के संकट और संरक्षण पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक जल के दोहन ने जमीन के ऊपर के जल स्रोतों को खत्म कर अंदर के जमा जलों में भी सेंध कर दिया है और पृथ्वी के अंदर की परतों तक वहाँ पहुंच गए है जहाँ आर्सेनिक की चट्टानें है. RO का जल आर्सेनिक खत्म नही करता और लगातार चट्टानों को बढ़ने से ऑक्साइड इस जल के साथ मिलकर उसे जहरीला बनाता है और हम इसे ही पी रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर एक ब्यक्ति प्रतिदिन 3 बार शौच जाता है तो 36 लीटर

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स्कॉलर्स एबोड स्कूल में संपन्न हुआ पत्रकार कवि सम्मलेन

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | आशियाना दीघा रोड स्थित ‘स्कॉलर्स एबोड स्कूल’ के ऑटोडोरियम में ‘बोलो ज़िन्दगी फाउंडेशन’ एवं अलीना प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में ‘पत्रकार कवि सम्मलेन‘ आयोजित हुआ. यहाँ एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न मीडिया हॉउस के कवि पत्रकारों ने अपनी-अपनी कवितायेँ सुना श्रोताओं का दिल जीत लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन दैनिक जागरण, पटना के पूर्व संपादक शैलेन्द्र दीक्षित ने किया. दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि शैलेन्द्र दीक्षित ने कहा कि “पत्रकार कवि सम्मलेन के रूप में यह एक अच्छी पहल है जहाँ विभिन्न मीडिया के पत्रकार साथियों ने एक ही प्लेटफॉर्म पर जुटकर अपनी सहभागिता दिखाई.”कवि सम्मलेन में कुल 10 पत्रकार कवियों ने हिस्सा लिया जिनमे बीरेंद्र ज्योति, अमलेंदु अस्थाना, चन्दन दिवेदी, कुमार रजत, मनोज प्रभाकर, अभिषेक कुमार मिश्रा, प्रेरणा प्रताप, अनिकेत त्रिवेदी, समीर परिमल एवं श्रीकांत व्यास हैं. सभी प्रतिभागियों ने अपनी दो उत्तम रचनाएँ सुनाई। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथियों में से डॉ. किशोर सिन्हा, प्रमोद कुमार सिंह एवं वरुण कुमार सिंह ने भी मंच से कविता का पाठ किया. आरम्भ में सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए स्कॉलर्स एबोड स्कूल की तरफ से एक पौधा एवं स्कूल के बच्चों द्वारा बनाये हुए ग्रीटिंग्स कार्ड भेंट किया गया. उसके बाद ‘बोलो जिंदगी फाउंडेशन’ एवं अलीना प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों को सम्मानित किया गया. मौके पर ‘बोलो जिंदगी फाउंडेशन’ के डायरेक्टर राकेश सिंह ‘सोनू’ ने बताया कि “यह ‘बोलो जिंदगी’ का पहला इवेंट था. इस कार्यक्रम की रुपरेखा उन्होंने एक साल पहले ही बनायीं थी

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महिला उद्यमिता का एक सुंदर उदाहरण है गौरैया क्रिएशन्स

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | बिहार में प्लास्टिक पॉलिथीन बन्द की घोषणा से प्रेरणा लेकर एक गृहिणी मोनिका प्रसाद ने पर्यावरण-संरक्षी यानि इको फ्रेंडली bags बनाने का उद्यम शुरू किया. गौरैया पक्षी भी आज खतरे में है जो भीषण पर्यावरण संकट का संकेत है. इस गौरैया को अपने प्रयास का प्रतीक चिह्न बनाकर उन्होंने अपने घर के खर्च से थोड़े थोड़े पैसे बचाकर यह उद्यम शुरू किया है. इसका इतना सुंदर response मिलेगा यह उन्होंने सोचा नहीं था. फिर जूट और सूती के तरह -तरह के झोलों का निर्माण शुरू हुआ. सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि मुम्बई, दिल्ली और कोलकाता आदि शहरों से भी काफी डिमांड आयी. यहाँ तक कि कुछ ही महीनों में गौरैया इको फ्रेंडली बैग्स के खरीदार इजरायल और अमेरिका में भी हो गए हैं. मोनिका जी ने झोले सिलने का काम मोहल्ले और शहर की अन्य गृहिणियों को दिया जिससे उन्हें भी कुछ लाभ मिल सके. यह महिला उद्यमिता का एक सुंदर उदाहरण है कि एक एक गृहिणी भी घर की सारी जिम्मेवारी वहन करते हुए व्यवसायिक उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख सकती है. इससे पूरे समाज को कई तरह से लाभ मिलता है और जागरूकता फैलती है. मोनिका जी का दृढ़ निश्चय है कि प्लास्टिक के विरुद्ध इस जंग में पूरी ताकत लगानी जरूरी है क्योंकि यह मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा है. स्वयं के बचत के पैसों से करने के कारण बढ़ते डिमांड को पूरा करने में उन्हें चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. पर सुंदर आकर्षक डिजाइन और आवश्यकता के

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अंग्रेजी ओलंपिया का गोल्ड मेडल जीता बक्सर के स्वराज ओझा ने

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | स्वराज ओझा, जो बक्सर के छोटा सिंघनपुरा के रहने वाले हैं तथा संजीव कुमार और रितु ओझा के बेटे है, ने अंग्रेजी ओलंपियाड में गोल्ड मेल्डल जीता है. पहले भी जब वे पांचवीं क्लास में पढ़ रहे थे तब सायंस ओलंपियाड में ब्रांज मेडल जीता था. इसके अलावा इनकी स्टोरी को स्टोरी मिरर स्टोरी राइटिंग कंपीटिशन में शामिल किया है. स्वराज ओझा अभी दिल्ली के समरविले स्कूल की सातवीं क्लास में पढ़ते हैं. स्वराज ओझा के चाचा अभिषेक कुमार बापू स्मारक महिला उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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जल्द ही भोजपुरी को प्राथमिक शिक्षा सिलेबस में लाने की कोशिश करेंगे – शिक्षा मंत्री, बिहार

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | भोजपुरी साहित्यांगन द्वारा बुधवार 26 दिसम्बर को पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर के प्रांगण में स्थित ललितकला अकादमी बहुद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश्वर गोवर्द्धन के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में उच्चायुक्त द्वारा प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भोजपुरी भाषा की एक पुस्तक, पूर्व प्राथमिक भोजपुरी पाठ्य पुस्तक माला का विमोचन हुआ. इस अवसर पर इस पुस्तक का उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच वितरण भी किया गया. यह कार्यक्रम ‘इंडियन डायस्पोरा एंड वर्ल्ड भोजपुरी सेंटर, वर्ल्ड भोजपुरी इंस्टीट्यूट एवं आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया’ के सहयोग से आयोजित किया गया. पूर्व प्राथमिक भोजपुरी पाठ्य पुस्तक माला  को स्वयं उच्चायुक्त ने प्राथमिक स्तर के बच्चों को उनकी मातृ भाषा भोजपुरी सिखाने के लिए मॉरीशस की टीम द्वारा तैयार करवाया है. भोजपुरी भाषा के उत्थान के लिए वे कटिबद्ध हैं और मॉरीशस से लेकर भारत तक उन्होंने इसके लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वे भोजपुरी क्षेत्रों में घूम-घूम कर मातृभाषा के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं. उन्हें यह आश्चर्य होता है कि जब मॉरीशस भोजपुरी के लिए इतना कुछ कर सकता है तो भोजपुरी के मूल क्षेत्र में अपनी ही मातृ भाषा के प्रति इतनी उदासीनता और हीनत्व-बोध क्यों है. उनका कहना है कि जबतक हमलोग छोटे छोटे बच्चों को भोजपुरी नहीं सिखाएंगे भोजपुरी का विकास नहीं होगा. दुनिया की कोई संस्कृति और सभ्यता बिना मातृभाषा के अपने को बचा नहीं सकती और न विकास कर सकती है. उन्होंने कहा कि मॉरीशस एवं भारत के भोजपुरी क्षेत्र के

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1 दिन में कैसे होगा 27 विधाओं का सलेक्शन ?

विनर टीम के ट्रायल पर अड़ी विश्वविद्यालय विनर टीम ‘शारंगम’ शाहजहाँपुर में कर रही है प्रदशर्न आरा, 19 दिसम्बर. VKSU का विवादों से गहरा नाता रहा है. आए दिन विवि में विवाद अपनी पैठ बनाने के लिए मुँह बाये खड़े रहता है. अब इस बार लगता है विवाद ईस्ट जोन कल्चरल फेस्टिवल में सलेक्शन को लेकर है. बताते चले की अक्टूबर माह में विश्वविद्यालय से 40 सदस्य टीम 25 विधाओं में प्रदर्शन करने के लिए दरभंगा गई थी जिसमें से उसने चार पुरस्कार झटके थे. जिसमें नाटक और झांकी में 2nd, क्ले आर्ट में 3rd और वेस्टर्न म्यूसिक में 3rd अवार्ड झटक कर प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय की इज्जत बचाई थी. पुनः दरभंगा में ही 3 जनवरी से 7 जनवरी 2019 तक ईस्ट जोन कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन होने वाला है जिसमे विवि नए सिरे से दमदार प्रतिभागियों के लिए हर विधाओं में ट्रायल का आयोजन कर रही है. यह चयन गुरुवार, 20 दिसम्बर को होना तय हुआ है. लेकिन फिलहाल नाटक की यह विनर टीम राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता “शारंगम”(16-19 दिसम्बर 2018) शाहजहाँपुर में अपनी प्रस्तुति देने गयी है जो 20 दिसम्बर के रात्रि में वापस आने वाली है. क्या है मामला? शारंगम में गयी विनर टीम ने 20 दिसम्बर को होने वाले ट्रायल के दिन न रहने की असमर्थता दर्शायी थी और अपने ट्रायल के लिए उक्त तिथि के पहले या बाद में ट्रायल देने का आग्रह किया था. यहाँ तक कि टीम लीडर व विवि के छात्र अध्यक्ष अमित सिंह ने प्रतियोगिता स्थल पर हुई प्रस्तुति की रिकॉर्डिंग को

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