स्टेशन पर इंक्वायरी समेत बुनियादी सुविधाओं का अभाव, यात्रियों को होती है भारी फजीहत

कोईलवर/भोजपुर (आमोद कुमार की रिपोर्ट) | दानापुर रेल मंडल के हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग सह सड़क मार्ग पर अवस्थित कोईलवर रेलवे स्टेशन के वजूद में आने के वर्षो बाद भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है. ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित अब्दुल बारी पुल के साथ ही वजूद में आये इस स्टेशन से रोजना दो से ढ़ाई हजार यात्री अपने गंतव्य स्थानों के लिये सफर करते हैं. लेकिन यात्री शेड, पेयजल, फुटओवर ब्रिज, पूछताछ काउंटर की कमी, शौचालय, आरक्षण काउटर की उपलब्धता से आज भी महरूम हैं. पूछताछ की व्यवस्था नहीं रहने से ट्रेनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है. जिससे यात्रियों व रेल कर्मी के बीच अक्सर तू-तू मैं-मैं होता रहता है. रेलवे के अधिकारियों व विभाग की बेरूखी का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि आजादी की लडाई से लेकर अब तक कई उतार चढ़ाव व स्वर्णिम दौर देख चुके इस स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा तक प्राप्त नहीं है. और यह फलैग स्टेशन का तगमा मिला हुआ है. जिस कारण इस स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं हो पाता यहॉं तक की सुपर फास्ट पैसेंजर और ईंटरसिटी एक्सप्रेसों का भी नहीं. सबसे बड़ी समस्या रेलवे कर्मियों के साथ होती है. शौचालय के अभाव में रेलवे कर्मी खुले में शौच जाने के मजबुर है.
आमदनी के अनुरूप नहीं मिलती सुविधाएं
कोईलवर स्टेशन से ट्रैन द्वारा दो से ढ़ाई हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते है. जिससे रेलवे को प्रतिमाह लगभग सात लाख रूपये राजस्व की प्राप्ति होती है. बावजूद डाउन प्लेटफॉर्म पर चापाकल नहीं है. दोनों प्लेटफार्मो पर नलटैप लगाये गये हैं लेकिन टंकी टुट पलट गया है. स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज नहीं होने से यात्री जान जाखिम में डाल रेलवे ट्रैक पार कर दूसरे प्लेटफार्म पर आते जाते है. अप प्लेटफार्म पर द्वितीय क्लास प्रतिक्षालय अक्सर बंद रहता है. सफाई के अभाव में स्टेशन परिसर से लेकर बुकिंग कार्यालय के पास गंदगी का अंबार लगा रहता है.
क्या चाहिये यात्रियों को सुविधाएं
पटना कुर्ला एक्सप्रेस, पटना-भभुआ ईंटरसिटी, फरक्का एक्सप्रेस का ठहराव, पूछताछ काउंटर, आरक्षण काउंटर, पेयजल, डाउन प्लेटफॉर्म पर यात्री शेड समेत फुटओवर ब्रिज का निर्माण की मांग कई वर्षो से की जा रही है.
क्यों चाहिये यात्रियों को सुविधाऐं-
बिहार का एकलौता मानसिक आरोग्यशाला, सीआरपीएफ का हेड क्वार्टर, इंडियन ऑयल व हिन्दुस्तान पेट्रोलियम का एलपीजी बॉटलिंग प्लांट समेत,आम्रपाली सिलेंडर प्लांट, पेपर मिल, बबुरा के समीप गंगा, सोन,सरयू का संगम स्थल, व छपरा से पटना पहुॅचने का निकटतम रेल मार्ग समेत सैंकड़ो की संख्या में कल कारखाने गीधा औधोगिक क्षेत्र में हैं. जहॉं के कर्मचारियों को सुविधाओं के अभाव में आरा या पटना का रूख करना पड़ता है.
अब तक नहीं मिला है स्टेशन का दर्जा
अपने स्थापना से लेकर अब तक कोईलवर स्टेशन को हाल्ट का दर्जा ही प्राप्त है.कारण स्टेशन के लिये कोई ट्रैफिक कन्ट्रोल सिग्नल नहीं है. कोईलवर में स्टेशन मास्टर की जगह एक जी.ए.इंचार्ज की ड्यूटी लगती है जो बुकिंग, पूछताछ समेत सारे कार्य करता है.