आरा में तुगलक के मंचन को मिली दर्शकों की वाहवाही

भूमिका नाट्य इकाई की प्रस्तुति को दर्शकों  ने सराहा

27 दिसंबर तक होगा मंचन




बड़े नाटकों की प्रस्तुति में एक मात्र तुगलक का हुआ मंचन

  

भूमिका,आरा ने रंगमंचिय गतिवीधियों के तहत फुल लेन्थ प्ले में व्याप्त सन्नाटे को चिरते हुए गिरीश कर्नाड लिखित नाटक ” तुग़लक ” का चार दिवसीय मंचन का शुभारम्भ 24 दिसम्बर को ‘नागरीप्रचारिणी ,सभा भवन, आरा के सभागार में किया. प्रथम दिन के नाटक का मंचन आरा रंगमंच के पितामह स्व० प्रो०श्याममोहन अस्थाना के प्रथम पुण्यतिथी पर उनकी स्मृति को समर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखते हुए भावभीनिं श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मंचन की शुरुआत की गयी.

कई अभिमतों एंव मान्यताओं में तुग़लक एक सनकी सुल्तान था,परन्तु नाटककार गिरीश कर्नाड ने अपने नाटक में तुग़लक के चारित्रिक गुणों का सकारात्मक विश्लेषण करते हुए उसके संगीत , खगोल,विज्ञान ,व राजनीति के प्रति गहरी सूझ एंव प्रत्येक धर्म को उसका उचित सम्मान देनें की श्रद्धा को बखूबी रेखांकित किया है.

लेखक नें कट्टरपंथियों के साजिशों के द्वंद में फंसे सुल्तान का बहुत ही अच्छा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है. मुहम्मद तुगलक का यह कथन कि ´´आमो-खास की मजहबी अकीदत की जड़ें किस कदर कमजोर है! अवाम का भोलापन फितरती तौर पर शुबहा और वहम से वाबस्ता होता है“ दरअसल हमारे समय और समाज में भी धर्म की कमजोर बुनियाद की ओर संंकेत है. कर्नाड  इस घटना की कल्पना से यह सिद्ध करते हैं कि समय कोई भी हो जनसाधारण की जड़ें धर्म में कम, चमत्कार और भ्रम में ज्यादा गहरी होती हैं.

इस नाटक का निर्देशन की कमान पूर्व की भांति श्रीधर के पास थी जिसे उन्होनें बाखूबी निभाया.मंच सज्जा की डिजाईन से लेकर हर दृश्य संयोजन उम्दा एंव आकर्षक थी.डा० कुणाल ने पहली बार रंगमंच पर पदार्पण करते हुए एक साथ तीन किरदार को जीते हुए अपने हुनर को साबित किया कि उनकी प्रतिस्पर्धा खुद उनसे ही है.अन्य किरदारों में चैतन्य, दीपक(गुड्डु), लोकेश, वीवेकदीप, संस्कार, डा०बी०एन०सिंह, आजाद भारती, आदित्य अतुल, अजय श्री, शमीम,वेद, अभिषेक, संतोष,राजीव, शालिनी, विभा, साधना, एंव खुद श्रीधर ने अपने अभिनय से दर्शकों को ताली बजानें पर मजबुर किया.दृश्य संयोजन एंव पद संचालन उम्दे तरीके से संयोजित करते हुए श्रीधर ने अपनी श्रेष्ठता एक बार फिर साबित की.प्रकाश परिकल्पना-अशोक मानव , रुप सज्जा-रौशन राय ,  मंच सज्जा- संस्कार श्रेयस्कर, वस्त्र सज्जा- चैतन्य एंव साधना, संगीत -विवेकदीप पाठक एंव आदित्य शर्मा का था.कुल मिलाकर श्रीधर ने भूमिका के बैनर तले ‘तुग़लक’ के माध्यम से वर्ष2016 को भावभीनि विदाई दी.दर्शकों द्वारा आज के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में भी इस नाटक को  जोड़कर देखते हुए महसुस किया गया.कुल मिलाकर एक अच्छा प्रयास कहा जा सकता है

रिपोर्ट -चन्द्रभूषण