सरकार ने प्रमुख मांगों पर एक दिन का समय मांगा
पटना. बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली में संशोधन, अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने, पीएचडी को समुचित वेटेज देने और डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 19 दिन के बाद लोकभवन मार्च के लिए तैयार हो गया। मेंलगातार 19 दिनों से अन्न त्यागकर अनशन पर बैठे कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बिक्कु सिंह प्रधान की तबीयत लगातार गिर रही है लेकिन अपने स्वास्थ्य का फ़िक्र किये बिना सरकार की नीति के खिलाफ अपने दृढ़ विश्वास के साथ अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए अडिग डटे हुए हैं।

पीएचडी धारकों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षक छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर आयोजित कार्यक्रम के बाद सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की सार्थक वार्ता 19 दिनों से जारी अनशन के बाद शनिवार को हुई। प्रतिनिधिमंडल ने सभी प्रमुख मांगों को मजबूती के साथ सरकार के समक्ष रखा।

वार्ता के दौरान सरकार की ओर से मांगों पर विचार करने के लिए एक दिन का समय लिया गया है। अब आंदोलनरत पक्ष को सरकार की पहल और सकारात्मक निर्णय का इंतजार है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने कहा कि उनकी सभी प्रमुख मांगों को सरकार के प्रतिनिधियों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा गया है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर पीएचडी धारकों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षक छात्रों के हित में पहल करेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शोधार्थियों की सहभागिता और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पीएचडी धारकों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षक छात्रों के अधिकार एवं भविष्य की लड़ाई है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि साथियों की एकजुटता और संघर्ष की ताकत ने सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंचाने का काम किया है। सरकार के निर्णय के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस दौरान “छात्र एकता जिंदाबाद”, “शोधार्थी एकता जिंदाबाद” और “संघर्ष हमारा अधिकार है” जैसे नारों के साथ एकजुटता का संदेश दिया गया।
