रणवीर सेना के सुप्रीमो की पोती बनी सिविल सर्विस अफसर, UPSC में 301वीं रैंक
आरा,7 मार्च। भोजपुर की वही धरती, जो कभी जातीय संघर्ष और नरसंहारों की खबरों के कारण देशभर में सुर्खियों में रहती थी, आज एक नई पहचान बना रही है। इसी जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।

आकांक्षा की सफलता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह कभी बिहार की जातीय राजनीति और संघर्षों के केंद्र में रहे रणवीर सेना के सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। ऐसे में उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बदलते भोजपुर और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं की कहानी भी बयां करती है।
परिवार से जुड़ा चर्चित इतिहास
आकांक्षा सिंह, ब्रह्मेश्वर मुखिया के पुत्र इंदु भूषण सिंह की बेटी हैं। 1990 के दशक में भोजपुर की पहचान अक्सर जातीय संघर्ष और निजी सेनाओं की गतिविधियों से जुड़ी खबरों से होती थी। ऐसे माहौल से जुड़े परिवार की नई पीढ़ी का प्रशासनिक सेवा में जाना क्षेत्र के बदलते सामाजिक परिदृश्य को भी दर्शाता है।

आरा से शुरू हुई पढ़ाई
आकांक्षा सिंह की शुरुआती पढ़ाई आरा के कैथोलिक मिशन स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने एच.डी. जैन कॉलेज, आरा से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
आकांक्षा बताती हैं कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे नियमित अध्ययन किया। खास तौर पर उन्होंने करंट अफेयर्स और विषयों की गहरी समझ पर विशेष ध्यान दिया।
इंटरव्यू में भी आया भोजपुर का जिक्र
सिविल सेवा के इंटरव्यू के दौरान उनसे भोजपुर से जुड़े कई सवाल पूछे गए। इंटरव्यू बोर्ड ने हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित भोजपुर के लोकगायक भारत सिंह भारती के बारे में भी प्रश्न किया, जिसका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया।
पूरा हुआ एक सपना
परिवार के लोगों के अनुसार, ब्रह्मेश्वर मुखिया की इच्छा थी कि उनके परिवार से कोई सदस्य यूपीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा में जाए। आकांक्षा की सफलता को उसी सपने के पूरा होने के रूप में देखा जा रहा है।

भोजपुर में खुशी की लहर
आकांक्षा की सफलता के बाद पूरे भोजपुर जिले में खुशी का माहौल है। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित करेगी.
बदलते समय की पहचान
1990 के दशक में जिस भोजपुर का नाम जातीय संघर्षों और निजी सेनाओं के कारण सुर्खियों में आता था, आज उसी जमीन से प्रशासनिक सेवा में जाने वाली नई पीढ़ी सामने आ रही है। यह बदलाव न केवल समाज के बदलते सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अब यहां की युवा पीढ़ी बंदूक नहीं, किताब और कलम के सहारे भविष्य गढ़ना चाहती है.
एक रिजल्ट पर दो का दावा



हालांकि रिजल्ट आने के बाद यूपी की एक आकांक्षा नाम की कैंडिडेट ने अपना नाम का दावा किया है। दोनों के एडमिट कार्ड पर एक ही रोल नंबर है। यूपी की आकांक्षा डॉक्टर है और रिजल्ट आने के बाद उसने एक वीडियो जारी कर अपने नाम पर दावा किया है। अब दोनों में से सही कौन है ये तो आयोग जांच कर तय करेगा लेकिन बहरहाल भोजपुरवासी आज आकांक्षा के नाम आने के बाद बहुत ही खुश दिखे।
आरा से ओ पी पाण्डेय की रिपोर्ट
