कुछ यूँ किया गया याद भोजपुरी के अनमोल हीरे को

आरा. वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के पी जी भोजपुरी विभाग के दुर्गा शंकर सिंह नाथ सभागार में नगर के चर्चित भोजपुरी साहित्यकार हीरा ठाकुर का स्मृति दिवस मनाया गया. ज्ञात हो कि हीरा ठाकुर इसी शहर में आर एम एस में डाककर्मी के रूप में पदस्थापित थे. इन्होंने अपने जीवनकाल में 125 के लगभग भोजपुरी किताबें लिखी जिनमें साहित्य की हर विधा शामिल है.


कार्यक्रम का संचालन भिखारी ठाकुर आश्रम, कुतुबपुर के रामदास राही ने किया. आये हुए अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष दिवाकर पांडेय ने किया. उन्होंने अपने सम्बोधन में हीरा ठाकुर की लेखन शैली की चर्चा करते हुए कहा कि उनका साहित्य की हर विधा पर समान रूप से अधिकार था, विशेषकर भोजपुरी में बाल साहित्य के लेखन में उनका योगदान अतुलनीय है. साथ ही दिवाकर पांडेय जी ने कहा कि ऐसे आयोजन विभाग में अब लगातार होंगे और यह विभाग भोजपुरी के प्रोत्साहन में सदैव अग्रणी रहेगा.





कार्यक्रम की शुरुआत विभाग के छात्र गणेश उपाध्याय ने बटोहिया गीत गाकर की. अनिल कुमार सिंह ने हीरा ठाकुर द्वारा रचित हनुमान वंदना की सुमधुर प्रस्तुति दी. साहित्यकार जगत नंदन सहाय ने कहा कि हीरा ठाकुर की सम्पूर्ण रचनाओं का मूल्यांकन अभी बाकी है. भोजपुरी रचनाकार के डी सिंह ने हीरा ठाकुर के साथ अपने संस्मरणों को साझा किया. कथाकार कृष्ण कुमार ने बताया कि हीरा ठाकुर और अन्य साहित्यकारों की रचना अब भोजपुरी साहित्यांगन वेबसाइट पर उपलब्ध है. गायत्री सहाय, ममता मिश्र, प्रभा शंकर, रामदास राही तथा हीरा ठाकुर के पुत्र राजकुमार जी ने हीरा ठाकुर से जुड़े संस्मरणों को सुनाया. कार्यक्रम में नगर के साहित्यकार, बुद्धिजीवी तथा विभाग के छात्र संजय कुमार सिंह, आलोक सिंह, वैभव पाठक, प्रियंका आदि उपस्थित थे.

पटना नाउ ब्यूरो