सात महिलाओं के समूह ‘विस्तार 2’ चित्रकला प्रदर्शनी में दिखा दर्द और खुशियां




प्रदर्शनी में एक से बढ़ कर एक पेंटिंग

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन

सरकार करेगी कलाकारों की मदद अंजनी कुमार सिंह


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सात महिलाओं के समूह विस्तार -2 की ओर से चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी कला दीर्घा में किया गया. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह तथा सेन्ट्रल ऑफ़ जियोग्राफिकल स्टडीज की निदेशक पूर्णिमा शेखर ने किया. इस मौके पर अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना काल में सबसे प्रभावित कलाकार रहें है. यह प्रदर्शनी काफी अंतराल के बाद आयोजित हो पाई है. पिछले दो सालों से समय अनुकूल नहीं चल रहा था. परन्तु कलाकार निरंतर कला साधना में जुटे थे. सरकार भी कलाकारों के अंदर के भूख को समझती है आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का होना पूर्व निर्धारित है जिससे कलाकारों को भी लाभ मिलेगा. पूर्णिमा शेखर ने कहा कि ऐसे मौके न जाने कहां गुम हो गए थे लेकिन अभावों से जूझती महिलाओं ने अपना कला क्रम जारी रखा और महिला दिवस के मौके पर प्रस्तुत किया जो सराहनीय प्रयास है.  


इस प्रदर्शनी में देश की ख्याति प्राप्त कलाकारों की चित्र प्रदर्शनी लगाई गई है जिसमें महिला सशक्तिकरण के साथ प्रदेश की खुशहाली को प्रस्तुत किया गया है. कार्यक्रम की संयोजिका सत्या सार्थ ने कहा कि इस प्रदर्शनी में लगे चित्र कलाप्रेमियों को जरूर कुछ सोचने पर विवश करेगा. हम सभी महिला चित्रकारों का अपने नजरिये से समाज के देखना और महसूस करना और रंग रेखाओं से कलाकृतियां बना कर लोगों के समक्ष इस प्रदर्शनी के माध्यम से पेश करना ही हमारा मकसद है.इस चित्रकला प्रदर्शनी में आधुनिक जीवन में पारम्परिक प्रयोग भी दिखते हैं

इस कला प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकार संगीता ने ग्रामीण जीवन का प्राकृतिक व मानवीय संवेदनाओं की सार्थकता को पेश किया है. कर्नाटक की मीनाक्षी सद्गले ने समाज का झूठ और फरेब से बाहर नहीं निकलने की असमर्थता के आगे नतमस्तक समाज को अपने चित्रों के जरिये व्यक्त किया है. अनीता की कृतियों में समाज को गढ़ने और बहने की चाहत लिए आशावादी दृष्टिकोण से ओत प्रोत हैं. नम्रता ने सांस्कृतिक विरासत को छिन्न भिन्न करने वाले हाथों को रोकने की कोशिश करती नजर आती है.

राज्य की प्रतिष्ठित कलाकार सत्या सार्थ ने ‘मुखौटे’  के जरिये समाज में जिस प्रकार में जीने की विवशता एक आदमी बन कर है उसे बखूबी रेखांकित करता है  तो अर्चना की पेंटिंग में सामाजिक सरोकार तथा समसामयिक जिज्ञासा है. हेमा की पेंटिंग समाज को दर्पण दिखाने का काम कर रहे हैं. यह चित्र प्रदर्शनी 11 मार्च तक चलेगी. प्रतिदिन सुबह दस से 6 बजे तक आम लोग भी इस प्रदर्शनी को देख सकेंगे. इस आयोजन में ललित कला एकेडमी के चित्रकार बादल ,अशोक सिन्हा ,अवधेश अमन रश्मि सिंह ,मनोज बच्चन ,वीरेंद्र सिंह ,रामू राज कुमार सिंह,विभा लाल ,निशि सिंह सुनील कुमार ,रंजीता और मुकेश कुमार,संजीव सिन्हा समेत राज्य के प्रमुख चित्रकार मौजूद थे.

PNC DESK