उरी में शहीद के गाँव राकटु टोला में नहीं मनेगी दीपावली

जलेंगे दीये शहीदों के नाम के 

पटाखे नहीं छोड़ेंगे और मिठाइयाँ भी नहीं खायेंगे गाँव वाले




चाइनीज सामानों को शहीद की विधवा ने किया आग के हवाले  

पटना नाउ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट 

जितौरा(राकटु टोला), वतन पर मिटने वालों का सम्मान क्या होता है और उनके लिए लोगों का अरमान क्या होता है ये जानना है तो आप भोजपुर जरूर  जाईए जहाँ उरी हमले में शहीद अशोक सिंह के गाँव के लोग इस बार उनके सम्मान में दीपावली नहीं मना रहे हैं. राकटु टोला से ओ पी पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

भोजपुर मुख्यालय से 48 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित है उरी हमले में वतन के लिए शहीद हुए अशोक सिंह का गाँव राकटु टोला. पीरो अनुमंडल के जितौरा महाल पंचायत का यह छोटा सा टोला इतना मशहूर होगा किसी ने सोचा नहीं था. लेकिन उरी हमले में जब इस गाँव के रहने वाले अशोक सिंह जब वीरगति को प्राप्त हुए तो पूरे देश की जनता इस छोटे से टोले से वाकिफ हो गई . अशोक तो  चले तो गए इस गाँव के लोगों को छोड़कर, अपने परिवार को छोड़कर, लेकिन एक नाम छोड़ गए  जिसने पुरे गाँव वालों का सिर  फक्र से ऊँचा कर दिया.

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देश के लिए शहीद अशोक ने गाँव का नाम देश के शान में गढ़ दिया. आज इस शान को पाकर गाँव वालों ने भी शहीद अशोक के इस शान और सम्मान को बरकरार रखते हुए इस बार दीपावली न मनाने का निर्णय लिया है. गाँव वालों का कहना है अपना गाँव एक परिवार है और अशोक सिंह उस परिवार के सदस्य थे. इसलिए पुरे गाँव के लोग इस बार दीपावली नहीं मनाएंगे. केवल शहीदों के सम्मान में दीप जलेंगे लेकिन मिठाई और पटाखे नहीं जलेंगे. इस बात की पुष्टि जितौरा महाल पंचायत के मुखिया सुशील यादव ने की.वही शहीद की पत्नी संगीता देवी ने घर में पड़े सारे चाइनीज वस्तुओं को जलाया और सभी से चाइनीज वस्तुओं का वहिष्कार करने के लिए अपील किया. उन्होंने कहा कि वो देश जो हमारे देश के दुश्मन को सह देता हो उसे सबक सिखाना भी हमारा दायित्व बनता है. दीपावली के लिए  लोगों को शुभकामना दिया और बताया कि इस बार परिवार दीपावली नहीं मनाएगा, लेकिन शहीदों के नाम दीये जरूर जलाये जायेंगे. उन्होंने सभी शहीदों के नाम दिया जलाकर सच्ची श्रद्धांजलि की बात कही.

 

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जब शहीद की पत्नी से पहले की दीपावली के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पहले उनके पति फ़ोन पर बात कर लिया करते थे और परिवार के सभी लोगों के लिए जरुरी फरमाइशों की लिस्ट को पूरा करने के लिए कहते थे. हालाँकि वो दीपावली में घर नहीं आते थे पर उनका साथ परिवार की जरूरतों के रूप में खड़ा मिलता था. चंद लाइन बोलकर वो पुरानी यादों में खो गयीं और बिलखने लगी.

प्रधानमंत्री द्वारा बॉर्डर पर सैनिको के साथ दीपावली मनाने के सवाल पर उन्होंने कहा  कि ये मोदी जी द्वारा कदम देश के सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए बहुत ही अच्छा है. शहीदों के दीया जलाने का काम तो हर साल होना चाहिए. देश से आतंकवाद के खात्मे के बाद ही हमारी सच्ची दीपावली होगी.

इधर जिला मुख्यालय आरा में भी इस बार दीपावली पर भोजपुर के युवा शहीदों के नाम पर एक दीया जलाने का प्लान कर रहे हैं.जिसमे शहर के हर वर्ग के लोग शामिल होंगे.जिसमे सभी इक्कट्ठे होकर राकटु टोला के शहीद अशोक सिंह और पिपरपांती के शहीद राजकिशोर सिंह समेत देश के तमाम शहीदों के नाम दिया जलाएंगे.

दीपावली दीपों, पटाखों और मिठाइयों का त्योहार है. भले ही इस बार मिठाइयां और पटाखे नहीं फूटेंगे लेकिन लोगों के दिल में आतंक के खिलाफ फूटने वाला ये वो गुस्सा है, जिसने देश के लिये खो देने वाले अपने अपनों के प्रति एक मिठास दिल में ऐसा पैदा कर दिया है जो किसी भी मिठाई से कम नहीं है. दीप ये स्नेह का है, प्यार का है, जज्बात का है जो जलेगा जरूर जिसमें एक सच्चाई और देशभक्ति की लौ भी इस दीपावली जलेगी.