उरी के शहीद की विदाई में उमड़ा जनसैलाब

By pnc Oct 1, 2016

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बिहार रेजिमेंट के 6 बिहार बटालियन के नायक राजकिशोर सिंह ने 11 दिनों बाद दिल्ली मिलिटरी अस्पताल में दम तोड़ दिया. उरी हमले में घायल नायक राजकिशोर का इलाज वहां चल रहा था. आज सुबह शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव पिपरपांती लाया गया. शहीद राजकिशोर सिंह इन दस दिनों तक शायद इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि उनके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कब पाकिस्तान पर हमला बोलेंगें, इधर भारतीय सेना पाक पर हमला बोला उधर दिल्ली में शहीद राजकिशोर ने हँसते हुए इस दुनिया को विदा कर दिया.




भोजपुर का दूसरा लाल हुआ शहीद

लाल रंग अजीब होता है, खुशियों का रंग भी लाल होताहै, खून का रंग भी लाल होता है, लेकिन जब यही लाल रंग तिरंगे में लिपटकर आता है तो उस तिरंगे में लिपटे लाल के लिए किसी का कलेजा करुणा से भर जाता है तो किसी का फक्र से. भोजपुर जिला शहीद अशोक सिंह के मातम में ही था कि भोजपुर जिले के एक और वीर सपूत ने देश की रक्षा करते करते उड़ी हमले में घायल होने के बाद परसों 29 सितम्बर को दिल्ली में दम तोड़ दिया. भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखण्ड के पिपरपाती गाँव के राजकिशोर सिंह जो बिहार रेजिमेंट के 6 बटालियन में कार्यरत थे उडी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जो 10 दिनों से जिंदगी की एक जंग लड़ रहे थे, लेकिन अंततः वे जिंदगी की जंग नहीं जित पाए. शहीद राजकिशोर को एक बेटा (हेमंत) और एक बेटी (सुहानी) है. शहीद की पत्नी कंचन का रो रो कर बुरा हाल है. आज सुबह जब शहीद राज किशोर सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके गाव पहुचा तो पुरे पंचायत के लोग इकठ्ठे हो गए. सबकी आंखे नाम चहरे पर गम था साथ ही एक गुस्सा भी दुश्मन देश पकिस्तान के खिलाफ गाँव  वाले पकिस्तान विरोधी नारे भी लगाते दिखे.
शहीद की पत्नी ने खुद को भी शव के साथ जाने कि करने लगी जिद्द

शहीद की पत्नी जब अपने पति के शव को देख कर खुद को भी शव के साथ ले जाने की बात करने लगी पूरे घर में सन्नाटा छा गया. हर सदस्य का रो रो कर बुरा हाल था.

एक ही सुर था- पाकिस्तान से बदला लेना है
शहीद की पत्नी कंचन का रो-रो कर हाल पागलों की तरह हो गया था. जब भी वो उठ रही है एक ही बात बोलती थी-“पकिस्तान से बदला लेना है ।चुन चुन कर मारना है.” राजकिशोर की पत्नी ने बिहार सरकार से 50 लाख रूपये की मांग की है जो उनके बच्चे के पढ़ाई में लगाया जाएगा.  राजकिशोर के बाद उनकी पत्नी अपने दोनों बच्चों को इंजिनियर और डॉक्टर बनायेगी जिसके लिए बिहार सरकार से 50 लाख रूपये की मांग की है.राजकिशोर का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पिपरपाती में राजकीय सम्मान के साथ किया गया.

शहीद अशोक राजकिशोर के थे अच्छे दोस्त

राकटु टोला के शहीद हुए अशोक सिंह शहीद राजकिशोर के अच्छे दोस्त थे. दोनों का एक ही जिले में घर होने की वजह से दोस्ती गहरी हो वाई थी. दोनों दोस्त उरी से पहले बंगाल के बिना गुड़ी में पदस्थापित थे, जहाँ से 30 जुलाई को साथ ही उरी गये थे.

पूरा परिवार है सेना में
शहीद राजकिशोर के पिता स्व० विष्णु सिंह भी आर्मी में ही थे. तीनो भाइयों में सबसे छोटे राजकिशोर ही थे.

रिपोर्ट- आरा से ओमप्रकाश पांडे

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