सांस लेने लायक नहीं है बिहार के 13 शहरों की हवा

By pnc Nov 13, 2022 #bihar pollution


बिहार के नेताओं का नहीं है कोई ध्यान




लोगों को करना पड़ रहा है भारी मुसीबतों का सामना

4 जिलों में एक्यूआई 400 के पार
दमा के मरीजों की निकल रही है जान


बिहार में प्रदूषण की स्थिति बहुत खतरनाक हो गई है. 12 नवंबर को बेतिया, मोतिहारी, बक्सर और सीवान जिलों की हवा में सांस लेना गंभीर बीमारियों को दावत देने के समान है. इन जिलों में एयर क्वालिटी इंडेक्स एक्यूआई 400 के पार है. इन जिलों में सांस लेने वाले स्वस्थ आदमी पर भी बुरा असर पड़ेगा. जो पहले से बीमार हैं उन्हें ज्यादा खतरा है.


नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक शनिवार की सुबह में सीवान की स्थिति सबसे नाजुक है. यहां एक्यूआई  432 मापा गया. मानकों के अनुसार यह खतरनाक रेंज में है जिसके प्रभाव से स्वस्थ आदमी भी बीमार हो जाएगा. पेड़ पौधों पर इतनी जहरीली हवा का बुरा असर पड़ता है. इसके साथ-साथ मोतिहारी में एक्यूआई  429, बेतिया में 415 और बक्सर में 407 है. राज्य के 13 स्थानों पर एक्यूआई की रीडिंग 300 से 400 के बीच पाई गई है तो 11 इलाकों में यह रीडिंग 200 से 300 के बीच है. शनिवार को एक दो स्थानों को छोड़कर  राज्य के सभी इलाकों में हवा मानव स्वास्थ्य के लायक नहीं है. हर आदमी को सावधान रहने की जरूरत है. जहां तक संभव हो सके, मास्क का उपयोग किया जाना चाहिए.

प्रदूषण से 8 साल कम हो रही बिहार के लोगों की उम्र
वायु प्रदूषण के कारण बिहार के लोगों की उम्र करीब 8 साल कम हो रही है. बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित सात राज्यों की 51 करोड़ लोगों की जिंदगी वायु प्रदूषण के कारण 7.6 साल कम हो रही है. क्योंकि इन राज्यों की लगभग पूरी आबादी हवा में मौजूद अति सूक्ष्म धूलकण की जद में है. शिकागो विश्वविद्यालय की एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट की ओर से हाल में की गई स्टडी में यह खुलासा हुआ है. 2020 के प्रदूषण के स्तर पर यह अध्ययन किया गया है. 

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से राज्य में हवा में सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) स्तर को बढ़ाने में योगदान करनेवाले 8 क्षेत्रों की पहचान की है. आईआईटी पटना इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम के सहयोग से किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि आवासीय एवं कॉमर्शियल क्षेत्र से बिहार में पीएम 2.5 की सांद्रता बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है. यानि घरेलू ईंधन कोयला, लकड़ी, उपला, खाना पकानेवाले गैस, इत्यादि से 49 फीसदी प्रदूषण फैल रहा है. इसके अलावा, कृषि, परिवहन, उद्योग, ऊर्जा इत्यादि क्षेत्र हैं.

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