पीएचडी में अनियमितता, राजभवन पहुंचा मामला

सीटों से ज्यादा हैं स्टूडेंट,नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण छात्रों को कोर्स वर्क में किया गया है फेलविभाग हेड प्रो रणविजय को कारण बताओ नोटिस के बाद भी कार्यशैली में सुधार नहीं4 पेपर के एग्जाम को 12 दिनों में पूरा कियापरेशान छात्रों ने बीच में ही छोड़ा कोर्स, बाहर राज्यों में लिया नामांकन आरा, 11 जुलाई. पीजी हिंदी विभाग के पीएचडी सत्र 2019 में दाखिला लिए हुए छात्रों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कुलपति प्रो राजेन्द्र प्रसाद के पास छात्रों तथा प्रोफेसरों की शिकायत पहुंचने के बाद विभाग के हेड प्रो रणविजय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि उसके बाद भी विभाग की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ है और हाल ही में कुलपति द्वारा जवाब-तलब किये जाने के बाद बिना पीजीआरसी की बैठक नियमपूर्वक सम्पन्न कराए ही सम्बंधित संचिका पर कमिटी सदस्यों द्वारा गुपचुप तरीके से हस्ताक्षर कराए जाने का मामला प्रकाश में आया है. जिसकी शिकायत विभाग के प्राध्यापक और सीनेटर प्रो दिवाकर पांडेय ने कुलपति और राजभवन लिखित रूप में भेजकर कुलाधिपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि विभाग का स्थायी सदस्य होने के बावजूद कोई सूचना उन्हें नहीं दी जाती है ना ही किसी प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनायी जाती है. ज्ञात हो कि पूर्व में पीएचडी रेगुलेशन 2009 के तहत हिंदी विभाग में बहुत से छात्रों का नामांकन करवा लिया गया लेकिन ना ही कोर्स वर्क पूरा हुआ ना ही उनकी परीक्षा ली गयी. बाद में विद्वत परिषद में मामला उठने

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