अंग्रेजी ओलंपिया का गोल्ड मेडल जीता बक्सर के स्वराज ओझा ने

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | स्वराज ओझा, जो बक्सर के छोटा सिंघनपुरा के रहने वाले हैं तथा संजीव कुमार और रितु ओझा के बेटे है, ने अंग्रेजी ओलंपियाड में गोल्ड मेल्डल जीता है. पहले भी जब वे पांचवीं क्लास में पढ़ रहे थे तब सायंस ओलंपियाड में ब्रांज मेडल जीता था. इसके अलावा इनकी स्टोरी को स्टोरी मिरर स्टोरी राइटिंग कंपीटिशन में शामिल किया है. स्वराज ओझा अभी दिल्ली के समरविले स्कूल की सातवीं क्लास में पढ़ते हैं. स्वराज ओझा के चाचा अभिषेक कुमार बापू स्मारक महिला उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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यहां इलाज कराना हो तो बैंडेज-पट्टी साथ लेकर आएं

इमरजेंसी में भी नहीं मिलती हैं दवाएं इलाज कराना हो तो दवा, सूई और बैंडेज-पट्टी खरीदकर ले जाएं बक्सर सदर अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को इन दिनों दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं. अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में दवा का स्टॉक है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही है. यहां वैसे मरीजों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचते हैं. गुरुवार की रात ऐसा ही मामला सदर अस्पताल में सामने आया. जब कोरानसराय थाना के कमधरपुर गांव में एक शख्स को अज्ञात अपराधियों ने गोलियों से भून दिया. उसके शरीर में पांच गोलियां लगी थी. किसी तरह परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आये थे. लेकिन, सदर अस्पताल के इमरजेंसी में ना तो बैंडेज था ना ही पट्टी. इसके लिए ड्यूटी पर तैनात डॉ अमलेश कुमार व स्टाफ ने परिजनों को बाहर से बैंडेज लाने के लिए कहा. इस दौरान घायल दर्द से तड़पता रहा. सदर अस्पताल के कई वार्डों में दर्जनों ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका इलाज तो सदर अस्पताल में हो रहा है लेकिन सिर्फ कागज पर. उन्हें सुविधा के नाम पर केवल सुबह-शाम डॉक्टर के दर्शन होते हैं. दवा उन्हें बाहर से ही लाना पड़ता है. सूई धागा खरीदकर मरीज पहुंचते हैं इमरजेंसी वार्ड गुरुवार की रात कुछ ऐसे भी वार्ड थे जहां एक भी दवा उपलब्ध नहीं थी. संक्रमण वार्ड में तो सिर्फ पानी ही मिला. सरकार की तरफ से मिलने वाले भोजन में भी

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