नियोजित शिक्षकों के लिए आने वाला है बड़ा फैसला

करीब एक साल से सरकार और कोर्ट के चक्कर में पड़े बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर है. सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई में इस महीने ही बड़ा फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है. नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन मामले की सुप्रीम कोर्ट में 25, 26 और 27 सितम्बर को सुनवाई होगी. शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह का केस लिस्ट जारी कर दिया है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस यू यू ललित की अदालत में 25 सितम्बर के यह केस पहले नम्बर पर सूचीबद्ध है. अब ये उम्मीद की जा रहा है कि अगले सप्ताह तक इस केस पर फैसला आ सकता है. तीनों दिन सुनवाई करेगी दो सदस्यीय खंडपीठ 25, 26 और 27 सितम्बर को न्यायमूर्ति अभय़ मनोहर सप्रे और न्यामूर्ति यूयू ललित की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 25 और 26 सितम्बर को फुल डे कोर्ट है जबकि 27 सितम्बर को हाफ डे कोर्ट है. लगातार तीन दिनों तक सुनवाई होने से अब ये उम्मीद की जा रही है कि नियोजित शिक्षकों के मामले में अब फैसला आ सकता है. नियोजित शिक्षकों को है फैसले का इंतजार सुप्रीम कोर्ट में 19 सितम्बर को इस मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन अटर्नी जनरल की बात पूरी ना होने के कारण कोर्ट ने अगला डेट दे दिया था. अब 25 सितम्बर से फिर इस मामले की सुनवाई होनी है. 3 लाख 70 हजार नियोजित शिक्षकों को कोर्ट के फैसले का इंतजार है. पिछली सुनावाई में टीइटी

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नियोजित शिक्षकों को झटका!

नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले की बहुचर्चित सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी साप्ताहिक केस लिस्ट में कोर्ट नंबर 11 में बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर चल रही सुनवाई 11 सितंबर (मंगलवार) को सूचीबद्ध नहीं की गई है जबकि इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई छह सितंबर को मौखिक व लिखित आदेश में सुनवाई की अगली तारीख 11 सितंबर को निर्धारित करते हुए निदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल अपनी बात पूरी करेंगे और शिक्षक संगठनों के शेष वकीलों को भी समय दिया जायेगा जिसके बाद ये सुनवाई समाप्त की जायेगी. लेकिन अगले सप्ताह (11, 12 व 13 सितंबर) में नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-11 में लिस्टेड नहीं है तथा सुनवाई कर रहे दोनों न्यायमूर्ति को अलग-अलग बेंचों में दूसरे न्यायधीशों के साथ बिठा दिया गया है. इसके बाद नियोजित शिक्षकों में आशंका गहरा गई है कि कहीं उनकी सुनवाई ठंडे बस्ते में ना चली जाए. सुनवाई जारी रखने की अपील बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य न्यायधीश से पूर्ववत सुनवाई जारी रखने की अपील की है. बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षक और उनपर आश्रित 20 लाख लोग आस और टकटकी लगाए हुए थे कि अब सुनवाई का पटाक्षेप होगा और उनको न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा

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बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की उम्मीदें बरकरार

सुप्रीम कोर्ट में बिहार के 3.5 लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के मामले में सुनवाई जारी है. बुधवार को केन्द्र की ओर से अटर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने फिर से कहा कि केन्द्र सरकार इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकती. वे पहले भी ये बातें कोर्ट के सामने रख चुके हैं. कोर्ट ने अटर्नी जनरल से पांच सवाल किए हैं जिनके जवाब के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय लिया है. सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि जस्टिस यूयू ललित ने अटर्नी जनरल से ये पांच सवाल किये हैं : क्या कभी बिहार में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षकों के बीच की वेतन विषमता दूर हुई है कि नहीं? भारत के जिन राज्यों में सातवां वेतनमान लागू है या जिन राज्यों में इनके कैडर को मिला दिया गया है, उनमें वेतनमान की समानता दी गयी है कि नहीं? जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई सवाल किया है? बिहार के शिक्षकों के साथ राज्य या भारत सरकार कब तक यह विषमता कायम रखना चाहती है? समानता के अधिकार के लिए संविधान और RTE में जो नियम या अनुच्छेद हैं, उनको लागू करने में क्या कोई संकट हुआ, इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं? बहस के दौरान के वेणुगोपाल ने ड्राइवरों से शिक्षकों की तुलना कर दी.  उन्होंने किशोर लाल मुखर्जी बनाम भारत सरकार तथा दिल्ली पुलिस बनाम भारत सरकार में सुप्रीम

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शिक्षकों को मिलनी चाहिए सबसे ज्यादा सैलरी, क्योंकि…

  समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे शिक्षकों को फिर एक नई तारीख मिल गई है. हालांकि उनकी उम्मीदों को हर दिन नए पंख लग रहे हैं. गुरुवार 2 अगस्त को लगातार तीसरे दिन इस मामले की पूरे दिन सुनवाई हुई. इस दौरान एक बार फिर सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सुना. इस दौरान एक बार फिर सरकारी वकील वही पुराना राग अलापते नजर आए. इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की. सरकार का पक्ष रखते कहा कि एक ही बात को बार-बार कहने का क्या मतलब. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. जब पैसे नहीं तो बंद क्यों नहीं कर देते सरकारी स्कूल! समान काम के लिए समान वेतन के मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि वर्तमान सिस्टम सुधारने और नियोजन को खत्म करने में आपको कितने दिन लगेंगे. कोर्ट ने वकील से पूछा कि आप IAS ऑफिसर को ज्यादा सैलरी देते हैं, इंजीनियर को ज्यादा सैलरी देते हैं, पर शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं. इन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए, जिससे शिक्षक निश्चिंत होकर बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भी राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि वेतन निर्धारण और नियमावली का आदेश कौन देता है, सरकार या पंचायत. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो स्कूल को बंद कर

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नियोजित शिक्षकों को मिली एक और तारीख

बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अब फाइनल हियरिंग के लिए 12 जुलाई का वक्त दिया है. समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे नियोजित शिक्षक पटना हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग कर रहे हैं.  मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समान काम के लिए समान वेतन के मामले में सुनवाई में हुई. सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने इस मामले में कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को चार सप्ताह के अंदर कंप्रिहेंसिव एक्शन स्कीम से संबंधित हलफनामा पेश करने को कहा है. आपको याद दिला दें कि इससे पहले, बिहार सरकार ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों के परीक्षा में पास होने से ही सैलरी इन्क्रीमेंट होगा और ये वृद्धि 20 फीसदी की होगी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया. मंगलवार को भी बिहार सरकार से 30 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रपोजल दिया गया लेकिन कोर्ट ने सरकार से कहा कि एक ऐसी स्किम लाएं, जिससे बिहार ही नहीं, बल्कि समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले अन्य प्रदेश के  सभी शिक्षकों का भी भला हो सके. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार और बिहार सरकार बैठ कर बात करें. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल की दलील पर चार सप्ताह का समय दिया और कहा कि केन्द्र सरकार चार सप्ताह के भीतर कम्प्रिहैंसिव स्कीम बनाए और कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई

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