नियोजित शिक्षकों को मिली एक और तारीख

बिहार के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अब फाइनल हियरिंग के लिए 12 जुलाई का वक्त दिया है. समान काम के लिए समान वेतन की मांग कर रहे नियोजित शिक्षक पटना हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग कर रहे हैं.  मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में समान काम के लिए समान वेतन के मामले में सुनवाई में हुई. सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने इस मामले में कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को चार सप्ताह के अंदर कंप्रिहेंसिव एक्शन स्कीम से संबंधित हलफनामा पेश करने को कहा है.

आपको याद दिला दें कि इससे पहले, बिहार सरकार ने कहा था कि नियोजित शिक्षकों के परीक्षा में पास होने से ही सैलरी इन्क्रीमेंट होगा और ये वृद्धि 20 फीसदी की होगी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया. मंगलवार को भी बिहार सरकार से 30 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रपोजल दिया गया लेकिन कोर्ट ने सरकार से कहा कि एक ऐसी स्किम लाएं, जिससे बिहार ही नहीं, बल्कि समान काम के लिए समान वेतन मांगने वाले अन्य प्रदेश के  सभी शिक्षकों का भी भला हो सके. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार और बिहार सरकार बैठ कर बात करें. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल की दलील पर चार सप्ताह का समय दिया और कहा कि केन्द्र सरकार चार सप्ताह के भीतर कम्प्रिहैंसिव स्कीम बनाए और कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 12 जुलाई की तय की है.

बता दें कि पिछले साल इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था और साथ ही वर्ष 2009 से एरियर देने का भी आदेश दिया था. इसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.




Mr. B.K. Sinha, Adv.
UPON hearing the counsel the Court made the following
O R D E R
Learned Attorney General submitted that the matter will
be considered on a holistic basis having regard to the fact that
teaching is the priority area, that there should be uniformity for
the whole country and financial the implications.
This will require interaction with the States.
Sh. Ranjit Kumar, learned senior counsel states that
funding by the Central Government only relates to primary and not
to secondary or higher education. This is disputed by the learned
counsel for the State of Bihar.
We are of the view that the disputed contentions of the
parties cannot be resolved unless the matter is fully heard.
Accordingly, let the matters be listed in the list for
final hearing on 12th July, 2018.

कोर्ट के आदेश का हिन्दी अनुवाद

वकीलों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश पारित किया:-
विद्वान अटार्नी जनरल ने प्रस्तुत किया कि इस तथ्य (समान काम समान वेतन) के संबंध में एक समग्र आधार पर विचार किया जाना चाहिए कि शिक्षण प्राथमिकता क्षेत्र है, इसके लिए पूरे देश में और वित्तीय प्रभाव की एकरूपता होनी चाहिए। इसके लिए राज्यों के साथ बातचीत की आवश्यकता होगी। श्री रणजीत कुमार, वरिष्ठ वकील से पता चला है कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषण केवल प्राथमिक से संबंधित है और न कि माध्यमिक या उच्च शिक्षा के लिए। बिहार सरकार के वकील ने इसका विरोध किया।
हम इस मत के हैं कि पार्टियों के विवादित मसलों का तब तक हल नहीं किया जा सकता जब तक मामला पूरी तरह से सुना नहीं जाता है।

 

साभार- आलोक कुमार