रंग जलसा 21 में “कहां गए मोरे उगना” का मंचन

एक शाम पद्मश्री मालिनी अवस्थी के नाम का होगा आयोजन -त्रिपुरारी शरण ,मुख्य सचिव
बिहार मेरे लिए भावनात्मक घर जैसा -मालिनी अवस्थी

कार्यक्रम का उद्घाटन करते मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ,उषा किरण खान ,मालिनी अवस्थी ,और संजय उपाध्याय

पटना: रंग जलसा 21 निर्माण कला मचं पटना की ओर से रंग जलसा 21 का आयोजन प्रेमचन्द रंगशाला में 17 सितम्बर से 21 दिसम्बर तक किया गया है. इस आयोजन के दूसरे दिन रंग संगीत और नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया .इस अवसर पर बेगूसराय के रंग दर्शन आर्ट की ओर से रंग संगीत की प्रस्तुति शशिकांत और टीम ने की वहीं जहांगीर खान निर्देशित नुक्कड़ नाटक भोले राम का जीव का भी मंचन किया गया ।




पद्मश्री मालिनी अवस्थी को सम्मानित करते त्रिपुरारी शरण और संजय उपाध्याय

प्रेमचंद रंगशाला में मुख्य कार्यक्रम में रंग शांति सम्मान समारोह 2020 का सम्मान जानी मानी गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को मुख्य अथिति बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने अंग वस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मालिनी अवस्थी ने कहा बिहार में मेरे कई कार्यक्रम हुए हैं मेरा जुड़ाव बिहार के लोगों के साथ है बिहार के लोग जब भी बुलाते हैं मैं आ जाती हूँ 25 -30 सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है। बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने इस मौके पर युवा रंगकर्मियों से आग्रह किया वे अपने अंदर सेंस मेमोरी को डेवलप करें जिसका फायदा उन्हें आने वाले दिनों में मिलेगा।

इस सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि जल्द ही पटना में एक शाम मालिनी अवस्थी के नाम का आयोजन किया जाएगा।इस मौके पर उपस्थित प्रतिष्ठित साहित्यकार और पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि नाटको के मंचन होते रहने चाहिए इससे समाज के लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।


उषा किरण खान लिखित और संजय उपाध्याय निर्देशित नाटक कहां गए मोरे उगना की प्रस्तुति निर्माण कला मंच के कलाकारों ने किया।
छह सौ साल पहले के विद्यापति और उनके समाज को आज के बाबा नागार्जुन, राजकमल और रेणु के साथ जोड़कर ले चलने का नाटकीय प्रयोग किया गया है।महाकवि विद्यापति द्वारा लिखित गीतों में से कुछ गीतों को चुनकर उन्हें दर्शकों तक पहुंचाने का सफल प्रयोग निर्देशक संजय उपाध्याय ने किया है । नाटक ‘कहां गए मेरे उगना में निर्देशन, पार्श्व संगीत , प्रॉप्स एंड प्रॉपर्टी समेत संवादों की बेहतरीन प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। नाटक की कहानी कुछ इस प्रकार से है।

नाटक कहाँ गए मोरे उगना का एक दृश्य

चौदहवीं शताब्दी में मिथिला में ओइनवार वंश का राज्य था,जो दिल्ली और जौनपुर के सुल्तान के अधीन था, राजा शिव सिंह उसी वंश के राजा थे.कवि विद्यापति पांच राजाओं के राज पंडित होते हुए भी राजा शिव सिंह के सखा थे. सुल्तान को कर नहीं देने पर शिव सिंह कैद हुए तो विद्यापति ने उन्हें मुक्त कराया. लेकिन क्रोधित शिव सिंह ने विद्रोह कर दिया जिस पर सुल्तान ने चढ़ाई कर दी और शिव सिंह भाग निकले. विद्यापति और रानी लखिमा जो शिव सिंह की पत्‍‌नी थी नेपाल नरेश की शरण में चले गए. उसी दौरान उनकी मदद के लिए भगवान शिव स्वयं उगना ग्रामीण का वेश धारण कर उनकी सेवा करने लगे. कवि ता उम्र उस वंचित पीड़ित दलित शिव स्वरूप उगना को खोजते रहे.नाटक में कई पात्रों को शामिल कर लेखक ने नाटक की गति को बढ़ाने में बहुमूल्य योगदान दिया है।

नाटक कहां गए मोर उगना

निर्देशक संजय उपाध्याय ने अपनी कल्पनाशीलता से रंग संगीत पर बेहतरीन कार्य किया है। विद्यापति की भूमिका में रजनीश रंजन और शारदा सिंह ने अपने अभिनय प्रतिभा से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।विद्यापति की भूमिका में सुमन कुमार,नागार्जुन की भूमिका में स्वरम उपाध्याय रेणु की भूमिका में विवेक कुमार राजकमल की भूमिका में आदर्श रंजन ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया .पदम् सिंह संजू कुमार नर्तक कुमार उदय सिंह ,कवि पत्नी बिनीता सिंह के अभिनय को भी लोगों में पसन्द किया। संगीत परिकल्पना और निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया।
स्व .शांति उपाध्याय की स्मृति में आयोजित रंग जलसा के तीसरे दिन विदेशिया का मंचन होगा।