पटना के अधिकारी नहीं चाहते कि कम हो प्रदूषण




रेड जोन राजधानी में 300 एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) रिकार्ड

सड़कों पर जुगाड़ वाहनों का परिचालन जारी

ऑटो और अन्य वाहनों पर बिठाये जाते हैं क्षमता से अधिक यात्री

सड़कों पर पड़ी धूलकण की परत प्रदूषण का मुख्य कारण

 प्रदूषण के लिहाज से रेड जोन में पटना, शहर की हवा में सूक्ष्म बालू कण

प्रदूषण एक प्रकार का अत्यंत धीमा जहर है, जो हवा, पानी, धूल आदि के माध्यम से न केवल मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर उसे रुग्ण बना देता है, वरन् जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और वनस्पतियों को भी सड़ा-गलाकर नष्ट कर देता है. आज प्रदूषण के कारण ही विश्व में प्राणियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.इसी कारण बहुत से प्राणी, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, वन्य प्राणी इस संसार से विलुप्त हो गए हैं, उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है. यही नहीं प्रदूषण अनेक भयानक बीमारियों को जन्म देता है.

राजधानी में प्रदूषण बढ़ने के लिए सरकार ही जिम्मेवार है. इसके लिए ठोस उपाय अब तक नहीं किये गए हैं. राजधानी में सबसे ज्यादा प्रदूषण बालू के कारण होता है उसके बाद नंबर आता है वैसे जुगाड़ के वाहन जो पुराने पड़ चुके वाहनों से तैयार किये जाते हैं. वैसी खटारा बसें जो अभी भी सभी मार्गों पर धड़ल्ले से चलती हैं .

सरकार के आदेश के बावजूद भी अभी भी पुराने पड़ चुके वाहनों का परिचालन लगातार हो रहा है. और यहाँ के अधिकारी एसी कमरों में बैठ कर प्रदूषण का चिंतन करते हैं पर आदेश के पालन में कोई काम होता नहीं दिखता. पटना के अंदर की स्थिति यह है कि वाहन जैसे ऑटो में क्षमता से अधिक यात्रियों को बिठाने से प्रदूषण बढ़ जाता है. सड़कों के किनारे गिरे बालू मिट्टी वाहनों की चपेट में आने से हवा में शामिल हो जाते हैं.

राजधानी समेत प्रदेश की सड़कों पर पड़ी धूलकण की परत प्रदूषण का मुख्य कारण है. अगर सड़कों से धूल की परत हटा ली जाए और बालू ढुलाई सही तरीके से की जाए तो प्रदूषण पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. इसके अलावा भवनों के निर्माण के दौरान भी नियमों का पालन करना अनिवार्य है. कुछ ईंट-भट्टे अभी भी परंपरागत रूप से संचालित किए जा रहे हैं. खेतों में पराली जलाने की कुरीति नई समस्या पैदा कर रही है. इस पर भी नियंत्रण की जरूरत है.

राज्य में प्रदूषण गंभीर समस्या है. बिहार की भौगोलिक बनावट के कारण प्रदूषण की समस्या बनी हुई है. यहां पर सुबह-शाम वातावरण में नमी काफी बढ़ जा रही है. नमी के साथ धूलकण मिल जाने से वायु की सघनता काफी बढ़ जा रही है. इससे एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुंच जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में सुधार के बाद प्रदूषण की स्थिति में सुधार होगा. डीजल चालित पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक अब तक नहीं लगाई गई है.

पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्रमुख पदार्थ हैं-
1. जमा हुए पदार्थ जैसे- धुआं, धूल, ग्रिट, घर आदि।
2. रासायनिक पदार्थ जैसे – डिटर्जेंट्स, आर्सीन्स, हाइड्रोजन, फ्लोराइड्स, फॉस्जीन आदि।
3. धातुएं जैसे- लोहा, पारा, जिंक, सीसा।
4. गैसें जैसे- कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया, क्लोरीन, फ्लोरीन आदि।
5. उर्वरक जैसे- यूरिया, पोटाश एवं अन्य।
6. वाहित मल जैसे- गंदा पानी।
7. पेस्टीसाइड्स जैसे- डी.डी.टी., कवकनाशी, कीटनाशी।
8. ध्वनि।
9. ऊष्मा।
10. रेडियोएक्टिव पदार्थ।

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By pnc

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