टकटकी लगाए महागठबंधन को एनडीए ने डाला पशोपेश में

टकटकी लगाए महागठबंधन को एनडीए ने डाला पशोपेश में 
डाह की राजनीति करने वाले महागठबंधन को समय का प्रबंधन करने में हो सकती है मुश्किल
पटना (अनुभव सिन्हा, विशेष संवाददाता) । अक्टूबर से चले एक सिलसिले का एक पक्ष आज साफ हुआ जब दिल्ली में बिहार एनडीए में शामिल दलों के शीर्ष नेताओं सहित भाजपा अध्यक्ष ने लोकसभा चुनावों के लिए बिहार में सीट बंटवारे की घोषणा की. हालांकि यह घोषणा सिर्फ संख्या तक सीमित है. घोषणा के अनुसार भाजपा 17 , जदयू 17 और लोजपा 06 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इस घोषणा में यह भी शामिल है कि देश के स्तर पर जहां कहीं से राज्य सभा के लिए पहला चुनाव होगा, उसमें राम बिलास पासवान एनडीए के उम्मीद्वार होंगे. बिहार एनडीए में भाजपा के अलावा जदयू और लोजपा हैं.
उल्लेखनीय है कि 2014 में लोकसभा चुनावों में भी एनडीए में सिर्फ तीन पार्टियां ही शामिल थीं – भाजपा , लोजपा और रालोसपा. अब रालोसपा महागठबंधन का हिस्सा है और तब एनडीए से अलग रही जदयू अब फिर से एनडीए का हिस्सा हो गई है. 2014 में इन तीन दलों को कुल 31 सीटें मिली थीं और उसके पहले 2009 में जब सिर्फ भाजपा और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था तब एनडीए को 32 सीटों पर जीत मिली थी. रविवार को दिल्ली में सीट बंटवारे की घोषणा करते समय खासतौर पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी चर्चा की थी.
एनडीए सीट बंटवारे की घोषणा का दिलचस्प पहलू यह है कि अभी सीटों के बंटवारे की जानकारी दी गई है. कौन सी पार्टी किस-किस सीट से चुनाव लड़ेगी , इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है.
बिहार एनडीए के सीट बंटवारे की घोषणा बिहार महागठबंधन के लिए अफसोस बनकर सामने आया है. बिहार महागठबंधन अंतिम समय तक यह उम्मीद लगाए बैठा था कि राम बिलास पासवान एनडीए छोड़ उससे जुड़ जायेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसा नहीं होने के अफसोस का मतलब थोड़ा गहरा है. राम बिलास पासवान के बारे में यह स्थापित है कि उनकी गणना परफेक्ट होती आई है. वह अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमण्डल में थे. लेकिन 2004 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले वह यूपीए में शामिल हो गए और यूपीए ने सरकार बनाई. उनका यह रिकाॅर्ड 1996 से 2009 तक रहा और इस दौरान हर सरकार में वह मंत्री रहे. लेकिन 2009 में उनसे चूक हो गई और अपने 33 वर्षों के संसदीय इतिहास में वह पहली बार हारे थे. हालांकि फिर वह राज्य सभा के लिए चुन लिए गए थे. लेकिन फिर 2014 में वह एनडीए में शामिल हो गए और उनकी पार्टी लोजपा अगला चुनाव एनडीए के साथ ही लड़ेगी. माना यही जाता है कि 2009 का चुनाव उनकी गणना का अपवाद है. यही फिक्र महागठबंधन की है और इसलिए लोजपा का एनडीए में बने रहना उसके लिए अफसोसनाक है.
यह महज त्वरित प्रतिक्रिया भर नहीं है कि दिल्ली में एनडीए के सीट बंटवारे की घोषणा हुई और बिहार में उसी समय कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्रा ने अपना बयान दिया. अपने बयान में प्रेमचंद मिश्रा ने राम बिलास पासवान के निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों में अभी समय है. राम बिलास पासवान अपना निर्णय कभी भी बदल सकते हैं. कांग्रेस प्रवक्ता के बयान से यह जाहिर होता है कि आने वाले समय में महागठबंधन की बढ़ती ताकत ही राम बिलास पासवान को अपना निर्णय बदलने के लिए बाध्य करेगी. दूसरी तरफ बिहार के लोग इस बात पर हैरत में हैं कि जो पार्टी अपने दम पर एक सीट तक नहीं निकाल सकती , उस पार्टी के प्रवक्ता अपने सपने को इस तरह से साझा कर रहे हैं.
लेकिन महागठबंधन की दूसरी परेशानी सीट आवंटन को लेकर है. एनडीए के विश्वस्त सू़त्रों के अनुसार सीटों के बंटवारे के बाद कौन पार्टी किन-किन सीटों से चुनाव लड़ेगी इसकी जानकारी 15 जनवरी के बाद सामने आयेगी. यह वह समय रहेगा जब लोकसभा चुनावों के लिए अधिसूचना जारी होने में ज्यादा समय बचा नहीं रहेगा. इसका असर महागठबंधन पर पूरा पड़ेगा. और , यही उसके पशोपेश की वजह है. एनडीए ने जिस तरह से अपनी सीटों के बंटवारे की जानकारी दी , महागठबंधन वह काम अब करेगा. उसमें भी अभी समय लगने वाला है. लेकिन यह भी तय है कि महागठबंधन यह घोषण नहीं करेगा कि गठबंधन में शामिल कौन सी पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी. महागठबंधन शामिल एक दल के सूत्र के अनुसार यह इंतजार एनडीए की घोषणा तक रहेगा. महागठबंधन के सूत्र के अनुसार राजद और रालोसपा पर चुनाव की महती जिम्मेदारी होगी क्योंकि दोनो का अपना जनाधार है. बाकी शामिल सभी दलों के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी मुख्यतः राजद पर ही होगी क्योंकि रालोसपा की भी अपनी सीमाएं हैं.