नवरात्र में आहार – शरीर डिटॉक्स करने की प्राकृतिक प्रक्रिया

पटना (ब्यूरो की प्रस्तुति) | पिछले कुछ वर्षों से लोग अपने शरीर को डिटॉक्स करने तथा शरीर की अंदरूनी सफाई पर ज्यादा जोर देने लगे हैं. नवरात्रि आहार मूल रूप से हमारे शरीर को शुद्ध करने की मूल प्रक्रियाओं में से एक है. हम अपनी त्वचा को साफ़ करने के लिए अपने हाथों और साबुन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन आंतरिक निकासी या यूँ कहे, शुद्धि के लिए, प्राचीन काल से नवरात्रि जैसे आहार योजनाओं का उपयोग किया जा रहा है.
यह हमारे शरीर का पालन करने वाली एक बहुत ही सरल और पारदर्शी प्रक्रिया है. हमारे शरीर को हर समय ऊर्जा की जरूरत होती है. इसलिए, अगर हम किसी भी रूप में भोजन के सेवन को रोकते हैं या कम करते हैं, तो शरीर की आंतरिक चयापचय प्रणाली संग्रहित ऊर्जा की खोज शुरू कर देती है. वसा यानि फैट हमारे शरीर के लिए ऊर्जा के गोदाम होते हैं, और इसलिए, शरीर स्वयं को चलाने में उनका उपयोग शुरू कर देता है. इस तरह, हम नवरात्रि उत्सव के 9 दिनों के भीतर जमा वसा अर्थात फैट को धीरे-धीरे ख़त्म कर सकते हैं.
नवरात्रि उपवास – इसे सही से करना चाहिए
उचित उपवास तकनीक से हम अपने अच्छे स्वास्थ्य को ट्रैक पर वापस ला सकते हैं. नवरात्री के त्यौहार काल के दौरान गहरे तले हुए या शक्कर खाने जैसे अस्वास्थ्यकर खाने की चीजें हमारी प्राचीन प्रथाओं में नहीं थी, लेकिन समय के साथ साथ इसे हमलोगों ने इनको अपने खाने में समाहित कर लिया जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है. इसलिए, इससे बचा जाना चाहिए. नवरात्री के दिनों में नमकरहित खाना, खासकर आहार में फलों और सब्ज़ियों का सेवन हमारे शरीर को डिटोक्सीफाई करने में बहुत सहायक होती है. दरअसल, नवरात्रि आहार योजना हमारे शरीर को डिटोक्सीफाई करने के लिए ही बनाई गई थी.
अनाज की विविधता शामिल करना: अमरैंथ (चौलाई), चेस्टनट और समक – अनाज के बराबर होते हैं जो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से पूर्ण होते हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि गेहूं की तुलना में इन छद्म अनाज में उच्च पौष्टिक सामग्री है. वे खनिज और विटामिन का सबसे अच्छा स्रोत भी हैं और ग्लूटेन से मुक्त भी होते हैं. इन खाद्य पदार्थों को शामिल करने का अभ्यास, जो समय के साथ साथ कहीं खो गया है, इस नवरात्री पर फिर से उपयोग करने के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान करता है.
इसी तरह, कुट्टू से बने खचड़ी भी उचित कार्बोहाइड्रेट खनिज और अन्य विटामिन के साथ एक संतुलित आहार की आवश्यकता को पूरा करता है. इसको बनाना भी बहुत आसान है. कुट्टू से बना चपाती उन लोगों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है जो पराठा और पुरी पसंद करते हैं.
आलू, जो बेक्ड फॉर्म में कार्बोहाइड्रेट का समृद्ध स्रोत भी है, नवरात्रि आहार योजनाओं की आवश्यकता के अनुरूप हो सकता है. साबूदाना की खिचड़ी बनाकर खाने से या दूध के साथ मिलाकर खाना न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि गुणवत्ता से पूर्ण पोषण भी प्रदान करता है. इन वैकल्पिक अनाजों को नवरात्र में लम्बी अवधि के बजाय नियमित अंतराल पर रखना बेहतर होता है.
बहुत सारे तरल पदार्थ पीना: नवरात्र आहार में पानी, मक्खन, फलों के रस जैसे तरल पदार्थों का भरपूर लिया जाना चाहिए. गर्म पानी के साथ नींबू का रस लेना भी हमारे शरीर को तेजी से डिटोक्सीफाई करने में मदद करता है. इस तरह के खाद्य पदार्थों को नवरात्री के दौरान अपने स्वाद को संतुष्ट करने और शरीर को उचित पोषण प्रदान करने के लिए खाया जाना चाहिए.
इसलिए, नवरात्रि उत्सव खत्म होने के बावजूद, इस तरह के खाद्य पदार्थों को नियमित आहार में शामिल करना अच्छा होता है. यह न केवल वजन कम करने में मदद करता है बल्कि वजन को उचित बनाए रखने में भी मदद करता है. यह आहार पाचन को बढ़ावा देता है, शारीरिक ऊर्जा में सुधार करता है, बीमारियों को रोकता है और पूरे वर्ष और पूरे जीवन शरीर में हल्कापन रखता है और हममें कल्याण की भावना को बढ़ावा देता है. नवरात्रि को स्वस्थ तरीके से मनाएं, धूमधाम और भव्यता से समझौता नहीं करें.