ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग में शामिल होंगे राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार

सांसद महेश पोद्दार दक्षिण अफ्रीका में,
ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज डायलॉग में देंगे वक्तव्य,
झारखण्ड के लिए गौरव का विषय,
पोद्दार भाजपा के पहले व एकमात्र प्रतिनिधि
रांची (ब्यूरो रिपोर्ट) | झारखण्ड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में आयोजित ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग में शामिल होंगे. पोद्दार दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुके हैं जहां वे 4 से 6 दिसंबर तक अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे और अपने विचार रखेंगे. दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया शहर में आयोजित ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग के वर्तमान संस्करण का विषय ‘चौथी औद्योगिक क्रांति’है.
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में आयोजित ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग का वर्तमान संस्करण कई मायने में महत्वपूर्ण है. यह पहला अवसर है जब अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को आमंत्रित किया है. इस कार्यक्रम में पोद्दार की सहभागिता झारखण्ड के लिए भी गौरव का विषय है क्योंकि भाजपा का इस कार्यक्रम में प्रतिनिधित्व करनेवाले वे पहले और अकेले वक्ता हैं.
दक्षिण अफ्रीका इस वर्ष ब्रिक्स देशों की राजनीतिक पार्टयों के एक विमर्श की मेजबानी कर रहा है जिसमें ब्रिक्स देशों के 200 से ज्यादा राजनीतिक दलों के नेता व प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. ब्रिक्स दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है जिसके सदस्य ब्राजील,रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं.
भारत के गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मलेन में यह निर्णय लिया गया था कि 2018 से ब्रिक्स सम्मलेन की मेजबानी करनेवाले देश में ब्रिक्स देशों के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का एक सघन विमर्श कार्यक्रम आयोजित होगा ताकि ब्रिक्स देशों के आपसी सम्बन्धो और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को और मजबूती मिल सके, आधुनिकतम तकनीक व नवोन्मेष का लाभ पूरी मानवता को प्राप्त हो तथा सदस्य देश एक दूसरे की सांस्कृतिक विविधता / विशेषता से परिचित हो सकें.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी वर्ष जुलाई में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ब्रिक्स सम्मलेन में हिस्सा ले चुके हैं. वहां उन्होंने ब्रिक्स देशों में नए औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा देने पर जोर दिया था. उन्होंने कहा था कि आतंकवाद और कट्टरपंथ तथा आतंकवादियों के नेटवर्क और उनकी आवाजाही रोकने के लिए ब्रिक्स देशों को साथ मिलकर काम करना होगा. इसके अलावा उन्होंने आर्थिक अपराधियों, भगोड़ों व काले धन से निपटने के लिए भी ब्रिक्स देशों की एकजुटता पर जोर दिया था. इस दृष्टिकोण से चौथी आद्योगिक क्रांति विषयक यह विमर्श और भी प्रासंगिक और समीचीन हो गया है.