माहवारी के प्रति जगरूकता फैलाता विनम्रता फाउंडेशन


वेबिनार के जरिये जुड़ीं कई महिला हस्तियाँ
मुहिम bleedfreefriend(ब्लीड फ्री फ्रेंड) के जरिये महावारी के प्रति महिलाओं एवं बच्चियों को जागरूक कर रहा है
संस्थान

आरा, 29 मई. देश मे हर महीने कुछ खास दिवस निर्धारित हैं जिन्हें मनाया जाता है. इन खास दिवसों की पहचान खास वजह से है और फिर इसे नई पीढ़ी को बताने के उद्देश्य से हर वर्ष जागरूकता के तौर पर मनाया जाता है लेकिन आज भी महिला माहवारी को लेकर जागरूकता बहुत कम ही देखने को मिलता है.
28 मई को हर साल विश्व माहवारी दिवस मनाया जाता है. शुक्रवार को इस वर्ष भी मनाया गया लेकिन आम दिवसों की तरह यह सोशल मीडिया पर नही देखने को मिला जो यह साबित करता है कि आज भी इस विषय पर बात करने में आज भी लोगों में संकोच है. इतनी तरक्की के बावजूद आज भी महिला महावारी एक पर्दे के पीछे का विषय बना हुआ. समाज में इसको लेकर एक चुप्पी है अभी भी है, महिलाएं इससे जुड़ी बातें करने में असहज या शर्म महसूस करती है. जिसके कारण वह कई तरह के संक्रमण और बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं.




लेकिन आरा जैसे छोटे शहर में भी इस दिवस को एक निजी संस्था ने मनाया. “विनम्रता फाउंडेशन” नामक इस संस्था ने महिलाओं को जागरूक करने के लिए एक मुहिम शुरू की है जिसका नाम है #bleedfreefriend(ब्लीड फ्री फ्रेंड). इस मुहिम के माध्यम से वह माहवारी के प्रति महिलाओं एवं बच्चियों जागरूक करेंगी, उनकी समस्याओं पर डाक्टरी परामर्श, एवं Re-usable Pads अथवा सूती कपड़ों के बने पैड्स बनाएंगी एवं उनको जरुरतमंदों तक पहुँचाएंगी.

इसी क्रम में संस्था ने शुक्रवार को एक वेबिनार भी आयोजित किया जिसमें प्रदेश की जानी मानी महिलाओं ने भाग लिया. बिहार की पर्वतारोही मिताली प्रसाद ने कहा कि महिलाओं में अपने माहवारी के प्रति सचेत रहना एवं अपनी सुरक्षा करना कितना आवश्यक है. बता दे मिताली प्रसाद मांउट किलीमंजारो पर फतह करने वाली पहली बिहारी महिला पर्वतारोही हैं. दुसरी अतिथि ज्योति कुमारी जो वर्तमान में उदवंतनगर थाना की थानाध्यक्ष हैं , उन्होंने भी महिलाओं में जागरूकता को बढावा देने वाले कार्यक्रमों का स्वागत किया और कहा इन कार्यक्रमों से महिला समाज को बहुत फायदा होगा. कार्यक्रम की तीसरी अतिथि डॉ.शालिनी सिन्हा ने महिलाओं में हो रही माहवारी में स्वच्छता को अनदेखा करने के परिणामों पर ध्यान दिया और साथ ही साथ सूती कपडों के पैड्स को सुरक्षित, न्यूनतम मूल्य एवं त्वचा के लिए आरामदायक बताया. इस लाईव वेबिनार को सैकड़ों लोगों ने अलग अलग शहरों से देखा. इसका संचालन संस्था की सदस्या खुश्बू स्पृहा ने किया.

जरूरत है ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़कर हो. तभी संकोच हटेगा और संक्रमण का सफाया होगा.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट