बिहार में शराबबंदी कानून और जिद, बन गया उड़ता बिहार !  




सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर

गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की आती है दुर्गंध

ठीक दो साल पहले दिसंबर 2020 में लालू जी की पार्टी ने कहा था की बिहार में अवैध शराब का व्यापार करीब 20,000+ करोड़ का है. यह एक घोर आरोप था क्योंकि एक तरफ शराबबंदी से सरकार को कई हजार करोड़ का राजस्व का घाटा हो रहा है और दूसरी तरफ जो चेन सिस्टम अवैध शराब में शामिल है , वह कई हजार करोड़ का मालिक बन रहा है.

सत्ता मिलते ही लालू जी की पार्टी और उनके दोनो पुत्र इस मुद्दे पर मौन हो गए हैं लेकिन सबसे ज्यादा कष्ट में वो लोग और समाज हैं जहां शराब या अन्य नशा उनके जीवन के दिन चर्या में है और यह आसानी से उपलब्ध भी है. गरीब समाज इस कानून के चक्कर में फंस रहा है. लोग आदत से बाज नहीं आ रहे और सूद के पैसे से वकील, कोर्ट कचहरी का चक्कर है.

शराबबंदी कानून का दूसरा असर है की पटना या अन्य शहरों के हर गली से गुजरते वक्त गांजा और अन्य अवैध नशे की दुर्गंध आती है। युवा बुरी तरह से इसके गिरफ्त में हैं. कई समाजसेवी इससे त्रस्त आकर आवाज उठाते हैं लेकिन यह सिंडीकेट इतना मजबूत है की उनकी आवाज बंद कर दी जा रही है । जो अधिकारी और पुलिस वाले की फील्ड पोस्टिंग नही है वो भी करोड़ों का जमीन खरीद रहे हैं. बाकियों का पूछिए ही मत. 20,000+ करोड़ के अवैध व्यापार ने हर इलाके में एक दूसरे तरह का आर्थिक अपराधी पैदा कर रहा है.

भय है की बिहार कहीं दूसरा ‘उड़ता पंजाब’ न बन जाए.तेजस्वी खुद युवा हैं और सत्ता मिलते ही इस मुद्दे पर उनकी मौन हैरान कर देने वाली है, या तो वो अपनी नैतिकता बेचने पर मजबूर हैं या इस अति घमंडी रावण के अहंकार में समस्त बिहार जलने को बेकरार है.

आवाज उठाइए, यह आग सबको बर्बाद कर देगी, नीतीश जी, अब भी मान जाइए ..कम से कम बीयर बार का ही परमिशन दीजिए, मुझे डर सिर्फ गांजा और अन्य ऐसे नशे की लत में फंस रहे युवाओं की है, बाकी, आपको क्या है ?

प्रस्तुति:  रंजन ऋतुराज, दालान

By pnc

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