ले चलो हवालात..


हवालात जाने को रात भर घूमते रहे तीन युवक

आरा,9 सितंबर. रविवार को वीर कुंवर सिंह स्टेडियम के पास सर्वेश्वर दयाल सक्सेना रचित नाटक हवालात का मंचन चैतन्य निर्भय के निर्देशन में किया गया. इस नुक्क्ड़ नाटक की शुरुआत लोक गीत से हुई, जो सामाज की समस्याओं पर आधारित थी. लोक गीत को देव कुमार सिंह ,श्याम शर्मिला ,मनु राज , और कुमार नागेंद्र ने प्रस्तुत किया.
नाटक तीन दोस्तों पर आधारित था जिसमें दिखाया गया कि वह ठंडी रात में ठंड से बचने के लिए आश्रय ढूंढ रहे हैं. उन्हें कहीं कोई आश्रय नहीं मिलता तो वे पुलिस हवालात में रात गुजारने की जुगत लगाते हैं.




तीनों एक पुलिसकर्मी के पास जाते हैं और उससे कहते हैं कि वे तीनों अपराधी हैं, उन्हें गिरफ्तार कर ले. पुलिसकर्मी तीनों की बातों पर विश्वास नहीं करता. वह उनसे कहता है कि तीनों पहले साबित कें कि वे अपराधी हैं. तीनों अपनी-अपनी कहानियां गढ़ कर पुलिस वाले को सुनाते हैं. पुलिस वाला उन्हें हवालात ले जाने के लिए राजी हो जाता है. पुलिसकर्मी उनकी आंखों पर पट्टी बांध कर अपने साथ ले जाता है. वह उन्हें एक सड़क से दूसरी सड़क पर घूमाता रहता है और अंत में उसी जगह उन्हें छोड़ देता है जहां वे खड़े थे. नाटक में बताया कि कैसे युवाओं को छला जाता है. नेता भी युवाओं को अपने मतलब के लिए सपने दिखाते हैं लेकिन बाद में अपना काम निकलने पर उन्हें छोड़ देते हैं. नाटक में चैतन्य निर्भय ,कृष्ण रत्न देव ,किसन कुमार ,साहेब अमन पुलिस और युवा की भूमिका में थे.

आरा से सावन कुमार की रिपोर्ट