बिहार सरकार का “खुले में शौच से मुक्ति अभियान”- एक मूल्यांकन

पटना (अनुभव सिन्हा की कलम से) । बिहार में डबल इंजन वाली सरकार है. हर काम समय पर पूरा करने का दावा करने वाली बिहार सरकार स्वच्छता अभियान का लक्ष्य पूरा कर पाने में विफल हो सकती है. अगले साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के समय तक देश को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. खुले में शौच से मुक्ति इसकी पहली प्राथमिकता है. लेकिन बिहार इसमें अभी तक फिसड्डी ही नजर आ रहा है.
उल्लेखनीय है कि पिछले साल पटना शौचालय घोटाला सामने आया था. उस समय बड़ा हो-हल्ला मचा था. लेकिन साल बीतते-बीतते न सिर्फ लोग उसे भूल गए बल्कि नया शौचालय घोटाला भी सामने आ गया है. यह घोटाला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के हरनौत का है. यहाँ 350 फर्जी शौचालय बनाए जाने का मामला सामने आया है. स्वच्छता अभियान के तहत हरनौत में 1500 शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन एक शिकायत की जांच में यह खुलासा हुआ कि 350 शौचालय निमार्ण की राशि फर्जी तरीके से निकाल ली गई. इनमें 56 लाभुक ऐसे हैं जिनके यहां पहले से ही शौचालय था. कुछ ने अधूरे निर्माण कराए और बाकी बचे लोगों ने बिना निर्माण के ही सरकारी कर्मियों के साथ मिलीभगत कर सारा पैसा निकाल लिया. अब सरकार इस पर कार्रवाई कर रही है. यह एक पहलू है.

स्वच्छता अभियान का दूसरा पहलू उतना ही प्रेरक भी है. पटना जिले को खुले में शौच से मुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान को गति देने के लिए 13 राज्यों से 222 स्वच्छाग्रही बिहार बुलाए गए हैं. इन स्वच्छाग्रहियों को जिले के सुदूर इलाकों में भेजा गया है जहां वे प्रखण्डों , पंचायतों और गांवों में घूम-घूम कर हर घर में शौचालय बनाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. पटना जिले के ग्रामीण इलाकों में इन स्वच्छाग्रहियों के कारण स्वच्छता अभियान एक उत्सव के रंग में रंग गया है. खासकर बच्चों को जिद्द करने की सीख दी जा रही है. अपने माता-पिता से शौचालय निर्माण की जिद्द का फण्डा कारगर भी साबित हो रहा है.




इस अभियान की सफलता की दर भी चैंकाने वाली है.  दो अप्रैल से दस अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में 50,600 शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
लेकिन स्वच्छता अभियान के इन दो पहलुओं से यह बात साफ होती है कि शौचालय निर्माण में सरकारी एजेंसियों के शामिल होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है और राशि का गबन हुआ है. इस लिहाज से तय समय तक इस अभियान का पूर्ण होना संदेहास्पद है.