निगम को चुनौती: न लाइसेंस, न परमिट…खुले में कटता है मटन,मुर्गा व मछली

कहीं ये मटन,मुर्गा और मछली आपको आफत में न डाल दें !
लॉक डाउन में भी उड़ रही है नियमों की धज्जियां
मंदिर के 100 मीटर के अंदर है फुटपाथी दुकानें
लॉक डाउन में भी शाम में बिकता है सब कुछ

आरा,21 मई. अगर आप सड़कों के किनारे लगे मांस मछलियों की दुकानों से मटन और मछली खाते हैं तो आप जान लें ये सुरक्षित नहीं हैं. कभी भी आप अंजान वायरस के चपेट में आ सकते हैं. यहाँ नियमों का पालन और लाइसेंस नहीं होता लिहाजा मक्खियों नालियों और गंदगी के साथ ये खतरनाक वायरस अपना स्थान सुरक्षित कर लेते हैं. जो न सिर्फ आपको बल्कि आपके परिवार की सेहत को संक्रमित कर आपके लिए एक मुसीबत खड़ी कर सकते हैं.
पटना नाउ की स्पेशल रिपोर्ट…




भोजपुर जिला इस वक्त लॉक डाउन है और 6 से 10 बजे तक सुबह जरूरत की दुकाने खुल रही हैं. राशन,सब्जी,दूध,और दवा की दुकानों के साथ मांस-मछली की भी दुकाने प्रशासन ने खोलने की अनुमति दी है लेकिन मांस,मछली और मटन की अवैध दुकाने हर रोज मनमाने तरीके से ग्राहकों को मांस बेच रहे हैं. मांस विक्रेता खुले में ऐसी गन्दी जगह  मटन,मुर्गा और मछली को काट रहे है जहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है. इन जगहों पर वैक्टीरिया और वायरस मांस के साथ ग्राहकों के घर तक पहुंच पूरे परिवार को संक्रमित कर सकते हैं इसका अंदाजा किसी को भी नही है. शहर का शिवगंज मोड़, बस स्टैंड रोड, नवादा मस्जिद के सामने, धोबीघटवा सहित शहर ही नही ग्रामीण इलाकों में भी नाले के किनारे खुलेआम मांस की बिक्री खुले में कई जा रही है. इन माँस बेचने वालों के पास न तो कोई लाइसेंस है और न ही कोई परमिट. इन्हें कानून का भी डर नही है तभी तो नगर निगम के आदेश के बाद भी सरेआम हर दिन अपनी अवैध दुकाने लगाते हैं. लेकिन इस कोरोना काल मे इतने संक्रमण और हर रोज हो रही मौतों के बाद भी मांस खाने वाले पढ़े लोगों के दिमाग मे भी कभी यह नही आता कि गन्दे जगहों से ऐसे कटे हुए माँस उनकी और उनके परिवार की सेहत खराब कर सकते हैं. 

क्या कहते हैं डॉक्टर?
जब इस संदर्भ में शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टर, डॉ प्रतीक कुमार से पटना नाउ ने बात की तो उन्होंने कहा कि नाले के किनारे बिकने वाले माँस, या मछलियां संक्रमण फैला सकती हैं. गंदे नाले खुद ही कई प्रकार के वैक्टीरिया और वायरस का केंद्र होते हैं. अगर इन नालो के किनारे कोई मांस बेचे तो जाहिर है उसके साथ ये बैक्टीरिया भी खरीदारों के घरों तक जाएंगे. इसका संक्रमण तब और तेजी से बढ़ता है जब ऐसे गन्दे स्थानों पर ही माँस विक्रेता मांस-मछलियों या मुर्गा काट कर बेचते हैं. नाले के सैकड़ो बैक्टीरिया इन मांस-मछलियों के साथ खाने वाले के शरीर तक आसानी से जा उन्हें संक्रमित कर सकते हैं. वही मुर्गी फार्म को उन्होंने खुले स्थान पर रखने की बात बतायी. उन्होंने कहा कि मुर्गी फार्म से अमोनिया गैस निकलता है जिससे फेंफड़ा और किडनी खराब हो सकता है. बन्द जगहों या रिहायशी इलाकों में मुर्गी फार्म वहाँ रहने वालों का सेहत खराब कर सकता है.

इस मामले को लेकर वार्ड 27 के पूर्व वार्ड कमिश्नर डेजी खान ने कई बार DM और SDO को लिखित आवेदन देकर खुलेआम मुर्गा,मीट और मछली के बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की थी लेकिन बावजूद उसके सब ढाक के तीन पात ही साबित हुए.

क्या कहते हैं पूर्व पार्षद डेजी खान:

बहुत सोच समझ कर आरा सदर एसडीओ साहब को एक आवेदन दिनांक 3/9/ 2020/ हम मोहल्ला वासी ने दिया था कि हम लोग एमके पोल्टी फॉर्म के द्वारा धार्मिक स्थान व रिहायशी इलाके में दुर्गंध प्रदूषण फैला रहे हैं जिसके कारण हम मोहल्ला वासियों को नरक किए जीवन के लिए मजबूर है. जैसा सुना था एसडीओ साहब बहुत ही काबिल और सूझबूझ रखने वाले अफसर है. वह कोई ना कोई कार्रवाई जरूर करेंगे. आवेदन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी महोदय भोजपुर, व नगर आयुक्त आरा को भी दिया गया था. इस उम्मीद के साथ कि कोई पदाधिकारी करवाई करें लेकिन कुछ नहीं हुआ. फिर दिनांक 13/10/2020/ को  रिमांडर आवेदन दिया गया. सभी को प्रतिलिपि लगाकर तब जाकर नगर निगम में पोल्ट्री फार्म को एक नोटिस दिया और उससे कहा कि आप  मुर्गी फार्म  बंद कर निगम को लिखित आश्वासन दें. लेकिन हुआ कुछ नहीं..

तब जाकर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी,आरा भोजपुर को दिनांक 2/11/20 को एक आवेदन दिया गया. जिसमें सारी समस्याओं को बारी-बारी से रखा गया. नियम के अनुसार निवारण पदाधिकारी को हमारी आवेदन का 60 दिन के अंदर निष्पादन कर देना चाहिए था, लेकिन 5 महीने के बाद भी सही निर्णय नहीं हो सका. उनके विरूद्ध प्रथम अपील प्रमंडलीय आयुक्त पटना में दायर किया गया है. आज हालत यह है 2 दिन की हल्की बारिश में गंध के कारण घर में रहना मुहाल हो गया है. सरकार कहती है लॉकडाउन है घर में रहे. मुर्गी का महक कहता है घर छोड़कर कहीं और जा… क्या करें.. हम मोहल्ला वासी? निगम तो आवेदन पर अवसर तलाश करती है बड़े डॉक्टर लोग कहते हैं की मुर्गी फार्म से अमोनिया गैस की बहुलता होती है जिसके कारण आदमियों  के लिए हानिकारक है. आपकी किडनी खराब और सांस लेने में परेशानियां और आप की आंख की रोशनी भी जा सकती है. इधर मुर्गी फार्म वाले के कई वाहन हैं. वह अपनी बड़ी-बड़ी वाहन जिससे मुर्गी लाई और ले जायी जाती है उसको रोड के किनारे खड़ा कर देते हैं. जिसमें मुर्गी का लाही  बहुत ही गंद देता है और हम लोगों के लिए जानलेवा भी है. जबकि  निगम की नियमावली यह कहती है कि धार्मिक स्थान एवं विद्यालय के निकट मुर्गी का कारोवार ना करें. अगर है तो तुरंत उसको हटा दिया जाए. लेकिन होता कुछ और ही है.

क्या है नियम :
मीट की दुकान के लिए सबसे पहले पालिका की एनओसी लेनी होती है. इनमें मुर्गा, मछली व बकरे का मीट बेचने वालों को दुकान के लिए निर्धारित मानक, एनओसी व पशु चिकित्सक का प्रमाण पत्र देने के बाद ही रजिस्ट्रेशन देकर लाइसेंस जारी किया जाता है.

* मौजूदा नियम के अनुसार पोल्ट्री फार्म रिहायशी इलाके से 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए.
* पानी पीने के स्थान से 1000(एक हजार) मीटर और प्रमुख पानी के संस्थानों से 200(दो सौ) मीटर की दूरी पर होना चाहिए.
* ऐसे फार्म या दुकाने मेन रोड से 200 मीटर की दूरी पर  होनी चाहिए.
* धार्मिक स्थल से 100 मीटर की दूरी के बाहर ही मीट की दुकान होनी चाहिए.

नगर निगम ने भी जारी की थी सूचना :

आरा नगर निगम ने बिहार नगरपालिका हस्तक के माध्यम से सूचना जारी कर कहा था कि
(1) सभी नगर निकाय यह सुनिश्चित करेंगे कि खुले में पशु मांस, कुक्कुट बिक्री की दुकान को संवेदनशील स्थल जैसे स्कूल एवं धार्मिक स्थल के निकट नहीं खोला जाय, यदि हो तो उसे तुरंत हटा दिया जाय.
(2) पशु मांस एवं कुक्कुट बिक्री स्थल को काले कपड़े लटका कर या ‘चीक’ लगाकर आम लोगों के नजर से ओझल रखा जाय.
(3) अपने-अपने नगर निकाय क्षेत्र में सड़क किनारे एवं फुटपाथ पर खुल रहे पशु मांस, मछली, मीट, मुर्गा इत्यादि को काटने/बेचने की दुकानों को नियंत्रित किया जाय तथा पशु मांस उत्पादों की बिक्री हेतु मीट शॉप (Meat Shop) के प्रचलन को व्यवस्थित किया जाय.
(4) किसी भी पशु का वध सार्वजनिक जगह पर या खुले स्थानों पर नहीं हो जिसे लोग आसानी से देख सके.

निगम ने उक्त निदेशों का अनुपालन कड़ाई से करना सुनिश्चित किया था.

लेकिन इस सूचना के बाद निगम कार्रवाई करना भूल गया और मांस बेचने वाले निगम द्वारा जारी उस आदेश की हर एक लाइन जिसमें उन्हें कुछ नियम पालन करने के सख्ती के साथ आदेश मुक़र्रर किया था. सूत्रों की माने तो ऐसे आदेश देने के बाद निगम आँख बंद कर सो जाता है क्योंकि सड़क किनारे ऐसे अवैध मांस बेचने वाले निगम तक नजराना पहुँचा देते हैं.


आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट