योग दिवस पर ऑनलाइन बहा खूब पसीना

ऑनलाइन मना विश्व योग दिवस, घर बैठे ही लोगों ने किया योगभ्यास

आरा/गड़हनी. फिटनेस का ट्रेंड विगत कुछ सालों में काफी बढ़ा है. यह जरूरी तब और हो जाता है जब कोरोना जैसी महामारी लोगों के सामने एक आफत बन आती है. जब घरों में ही रहना पड़े तो फिटनेस के कई तरीके और द्वार बंद हो जाते हैं लेकिन योग ही ऐसा मात्र विकल्प है जिसे घर बैठे ही किया जा सकता है. विश्व योग दिवस के मौके पर इस बार लोगों ने अपने फिटनेस के लिए जमकर पसीना बहाया लेकिन कहीं जाकर नही बल्कि खुद के घरों में वो भी ऑनलाइन जुड़कर.




कोरोना वायरस जैसी महामारी के बाद लोग घर बैठे ही ऑफिस और दूर-दराज के कामो को निपटा रहे हैं. स्कूल क्लासेज हो या फिर दफ्तर की मीटिंग, क्या सरकारी बाबुओ की वो शानो-शौकत हो या फिर मंदिरों व अन्य संस्थानों से निज मिलने वाले ज्ञान के बात सब इस समय ऑनलाइन ही आ अपना काम निपटा रहे हैं. कोरोना के बाद भी भले ही रोड पर भीड़-भाड़ और ट्रैफिक जाम से आप परेशान हो लेकिन एक बात तो तय है कि सबने डिजिटली काम को ही अपनी स्वीकृति दे दी है. अब वजह मजबूरी हो या फिर नई ईजाद या प्रचलन…आप जो भी नाम दे दें… डिजिटली काम के इसी क्रम में रविवार को विश्व योग दिवस के मौके पर जगह-जगह ऑनलाइन ही आकर लोगों ने विश्व योग दिवस मनाया. क्या शहर क्या गाँव! हर जगह लोगों ने ऑनलाइन योग दिवस को मनाया. हालांकि बहुत से जगह लोगों ने एक निश्चित संख्या में एकत्रित भी होकर भी योगाभ्यास कर आसन और प्राणायामों के जरिये योग दिवस मनाया. आर्य समाज मंदिर ने एम पी बाग स्थित आर्य समाज मंदिर में इस दौरान तीन दिवसीय योग शिविर का भी आयोजन किया, जिसमें कई लोग शामिल हुए और योग गुरु की देख रेख में योगाभ्यास किया. इस दौरान अधिकांश लोगों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते भी देखा गया.
हाँ एक बात जरूर देखने को मिला कि ऑनलाइन माध्यम से जुड़ने के कारण स्कूल के शिक्षकों के साथ बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी घर बैठे ही योग्याभ्यास कर योग दिवस मनाया.

बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए ना सिर्फ पढ़ाई बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य का ख्याल और उन्हें फिटनेस रखना भी उतना ही जरूरी है. स्कूल प्रवंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि लॉक डाउन के इस माहौल में बच्चों की आउटडोर एक्टिविटी और उनकी आजादी पर पाबंदी है. लेकिन फिटनेस का एकमात्र विकल्प योगा ही है जिसे लोग घर बैठे भी ऑनलाइन माध्यम से शरीक हो सकते हैं. स्कूल ने बच्चों से योग को अपने दिनचर्या में शामिल करने की अपील की. जिससे न सिर्फ उनकी शारीरिक बल्कि मानसिक क्षमताओं का भी विकास हो.

आपको जानकर हैरानी होगी कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन माध्यम से गड़हनी प्रखड के सेमरांव स्थित सिंबायोसिस स्कूल ने कोरोना वायरस जैसी महामारी में लॉकडाउन के दौरान लगातार पॉजिटिव सोच के जरिये लोगों को प्रेरित करने का काम किया है. सिंबायोसिस इंटरनेशनल स्कूल सेमरॉव ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए उनकी बेहतरी के लिए , शिक्षा में हो रहे इस बदलाव के दौर में अप्रैल के पहले सप्ताह से ही ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर दिया था.

स्कूल प्रबंधन ने यह बताया कि शिक्षा जगत में हो रहे इस बदलाव के दौर में स्कूल प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से तैयार है,एवं बच्चों के समुचित विकास के लिए डिजिटली जोड़ने के लिए प्रयासरत है,ताकि बच्चों की पढ़ाई को हमेशा की तरह जारी रखा जाए इसके लिए स्कूल प्रबंधन ने अनेक प्रकार की व्यवस्था किया है. इस व्यवस्था से लॉक डाउन जैसी परिस्थितियों में भी घर बैठे स्कूल के सभी नामंकित बच्चे अपनी पढ़ाई को जारी रख सकते हैं. स्कूल प्रबंधन ने स्कूल ऐप के जरिए बच्चों को डिजिटल बुक, ऑनलाइन क्लास एवं यूट्यूब के जरिए वीडियो मुहैया कराया है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई अड़चन ना आ सके और बच्चों का विकास निरंतर अग्रसर हो एवं उनकी डिजटल माध्यम के जरिए पढ़ाई में  रुचि बनी रहे.

आरा से ओ पी पांडेय व गड़हनी से मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट