वो जिंदादिल…जिसकी कर्जदार है भोजपुरी इंडस्ट्री

लेकिन…..मौत से… हार गया…..”विजय”


भोजपुरी को आगे बढाने के लिए बिना पारिश्रमिक पूरी उम्र दी सेवा
विजय नैय्यर, एकब्रत सेन और अशोक चन्द्र जैन की लगेंगी मूर्तिया




आरा, 4 मई. रंगमंचीय और सिनेमा के रुपहले पर्दे पर अभिनय के जरिये भोजपुरी और भोजपुर की पहचान बने सिने अभिनेता विजय नैय्यर की गुरुवार को एक शोक सभा जय प्रकाश मुक्ताकाश मंच पर की गई. उनके साथ आरा रंगमंच पर अभिनय करने वाले और रंगमंच के लिए हमेशा मंच से परे रहकर उसे जिंदा रखने वाले एकब्रत सेन का भी शोक सभा आयोजित की गयी. एकब्रत सेन अभिनेत्रि छंदा सेन के पति थे. भोजपुर जनपद के रंगकर्मियों ने एकजुट हो बिना किसी बैनर के दिवंगत दोनों आत्माओं को पुष्प अर्पित एवं मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित किया.

श्रद्धाजंलि सभा में आये लोगो को सम्बोधित करते हुए डी राजन ने कहा कि सिनेमा का जो स्टारडम विजय नैय्यर ने दिखाया वो आज के जमाने मे किसी को नसीब नही होता. लोग उनकी झलक पाने के लिए बेकरार रहते थे. दीपक जैन ने उन्हें जाने वो कौन सा देश गीत गाकर श्रद्धांजलि दिया. प्रोड्यूसर सत्येंद्र स्नेही ने कहा कि फ़िल्म के साथ विजय नैय्यर मंच के भी बेहतरीन कलाकार थे. वही लेेेखक-निर्देशक श्याम कुमार ने कहा कि विजय नैय्यर के निधन से एक गहरा सदमा तो हमे जरूर लगा है लेकिन वो अपनी अविस्मरणीय संस्मरणो से हमारे बीच सदियों तक जिंदा रहेंगे.

रंगकर्मी-निर्देशक ओ पी कश्यप ने उनकी याद को साझा करते हुए बताया कि वो उम्र में तो बाप के जैसे थे लेकिन इतने जिंदादिल इंसान थे कि कभी बाप के जैसा महसूस नही होने दिया. वो बेटा और दोस्त बन छोटे कलाकारों के बीच बड़ी सहजता से रहते थे. जितनी मुह उतनी बातें, लेकिन किसी के मुंह से उनके लिए इज्जत के अलावा और कोई शब्द नही निकला. उनकी शख्शियत उनसे काफी विशाल थी. उन्होंने हमेशा भोजपुरी को आगे बढ़ने के लिए फिल्में की. उन्होंने कभी भी पैसे का डिमांड नही किया फिल्मो में काम करने के लिए. छोटे कलाकारों को भी हमेशा आगे लाते थे. कई नये कलाकार उनके स्टेज परफॉर्मेंस देखने के बाद अभिनय के प्रति जागरूक हो रंगमंच से जुड़े और उनके मुरीद हो गए.

दिवंगत विजय नैय्यर व एकब्रत सेन की यादों को साझा करते रंगकर्मी

 भोजपुर जनपद के कलाकारों ने गुरुवार को तय किया कि भोजपुरी के योगदान के लिए अपने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले तीन शख्शियतों- अशोक चन्द्र जैन, विजय नैय्यर और लक्ष्मण शाहाबादी की मूर्तियां शहर में लगायी जाएं. इस पर सभी ने समर्थन जताया और जल्द ही इस दिशा में जिला प्रशासन से मिलकर पहल करने की बात की. सभा का संचालन रंगकर्मी, लेखक और निर्देशक ओ पी पांडेय ने किया जबकि धन्यवाद दीपक जैन ने दिया. इस मौके पर सत्येंद्र स्नेही, डी राजन,ओ पी कश्यप,श्याम कुमार, सुधीर सिंह, शशिकांत तिवारी, दीपक जैन,हर्षित जैन,पप्पू श्रीवास्तव, अशोक मानव,मनोज सिंह, मनोज श्रीवास्तव, अनिल कुमार तिवारी ‘दीपू’,आलोक सिंह, सौरभ कुमार, शैलेन्द्र सच्चु, सत्य प्रकाश सिंह, रंजन कुमार, पंकज भट्ट और विजय कुमार मेहता उपस्थित थे.

आरा से अपूर्वा की रिपोर्ट