झारखंड में खदान धंसी, 8 शव निकाले गए

अब तक आठ  शव बाहर निकाले गए 

100 मीटर  तक जमीन धंसी होने की खबर




50 से ज्यादा मजदुर फंसे

कई मजदूरों के मरने की आशंका 

मृतकों के नाम हैं नागेश्वर पासवान, (बिहार), राजेंद्र यादव, (सीवान, बिहार), हरे कृष्ण यादव,  (सीवान, बिहार), ब्रजेश यादव  (उत्तर प्रदेश), जावदे अख्तर गढ़वा

राजमहल परियोजना के खदान क्षेत्र में शाम 7:30 बजे हुए भीषण स्लाइडिंग की घटना में दो दर्जन से ज्यादा लोगों के मरने की आशंका व्यक्त की जा रही है .सूत्रों के अनुसार घटनास्थल पर 23 डंफर एवं अन्य गाड़ियां उसके चालक साइट इंचार्ज हेल्पर आदि के दबे होने की आशंका है घटना में मारे जाने वाले लोगों में कई लोग मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश बिहार एवं झारखंड के बताए जा रहे हैं.घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं. मामले को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी जिलाधिकारी को त्वरित राहत के लिए पहल करने के आदेश दिए हैं. ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ईसीएल) की राजमहल परियोजना में महालक्ष्मी आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी रात में माइनिंग का काम कर रहे थे. खदान में 200 फीट तक डीप माइनिंग चल रही थी, तभी पूरा मलबा ढह गया. इस वजह से खदान के अंदर जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और करीब 50 से ज्यादा मजदूर अंदर ही फंस गए. घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, घटना के समय खदान ऊपरी सदह पर ही काम हो रहा था, तभी अचानक हाई वॉल धस गया. उन्होंने साथ ही बताया कि मिट्टी में दबे ज्यादातर लोग ठेका मजदूर हैं. चश्मदीदों ने बताया कि ओपनकास्ट की इस परियोजना में मिट्टी धंसने से 35 से ज्यादा डंपर और 4 पे-लोडर दब गए.

जिन पांच लोगों के शव मलबे  निकालने में बचाव दल ने सफलता पाई है उनमें  मृतकों के नाम हैं नागेश्वर पासवान, (बिहार), राजेंद्र यादव, (सीवान, बिहार), हरे कृष्ण यादव,  (सीवान, बिहार), ब्रजेश यादव  (उत्तर प्रदेश), जावदे अख्तर गढ़वा. हालांकि, अभी भी 300 फीट गहरे खदान में 60 से अधिक लोग फंसे हुए हैं और उनके जीवित होने की उम्मीद ना के बराबर है.

 

 

अब तक खदान में बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण रेस्क्यू कार्य में काफी कठिनाई आ रही है यदि जल्दी हालात में सुधार नहीं हुआ तो ज्यादातर लोगों के मरने की संभावना है. ज्ञात हो कि उक्त खन्ना स्थल पर गत दिनों ईस्टर्न कोलफील्ड के सीएमडी राजीव रंजन मिश्रा ने दौरा कर मना किया था एवं अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे बावजूद राजमहल परियोजना प्रबंधन ने संबंधित कंपनी को कोई ठोस निर्देश नहीं दिए. इसके पूर्व भी परियोजना के खान क्षेत्र में 3 वर्ष पहले सौम्या कंपनी के साइट पर भीषण भूस्खलन हुआ था जिसमें कई मशीनें दब गई थी एवं 2 लोग मारे गए थे पर घटना से परियोजना प्रबंधन में कोई ठोस सबक नहीं लिया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार NDRF की 1 टीम (45 सदस्यीय टीम ) रात 12:30 पर बिहटा से रवाना हो चुकी है. जिसका कमांडर जय प्रकाश प्रसाद है तथा साथ में निरीक्षक कलाम एवं फिरोज हैं।कल रात झारखंड के गोड्डा जिले में कोयला खदान धसने के कारण 35 डंपर गाड़ियों और उसमें सवार 40 से 50 मजदूरों के दबे होने की आशंका है. खदान में फंसे इन मजदूरों को निकालने की कोशिशें जारी है और मदद के लिए पटना से एनडीआरएफ की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच रही है