परिवहन विभाग का “जरा सोचें” अभियान शुरू

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | क्या आप जानते हैं, आपके अनावश्यक हॉर्न बजाने से सभी परेशान हैं, यहां तक की आप भी. आखिर हमेशा हॉर्न क्यों बजाना ? बेवजह हॉर्न बजाने से कई लोग मानसिक एवं सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं. इसलिए इस पर “ज़रा सोंचें”………
हॉर्न न बजाएं और शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में अपना सहयोग दें.
ट्रैफिक सिंग्नल पर और ट्रैफिक जाम में वेवजह हॉर्न न बजाएं.
परिवहन निगम की बसों पर रहेगा नो हॉर्न का स्टीकर
बसों पर लगे स्टीकर के माध्यम से आम लोगों को किया जायेगा जागरुक, कार ऑटो के पीछे लगेंगे स्टीकर.
बसों में सफर के साथ जान सकेंगे सड़क सुरक्षा जागरुकता की बातें.
प्रेशर हॉर्न के खिलाफ परिवहन विभाग ने शुरू किया है “जरा सोचें” अभियान
.
शहर को हॉर्न फ्री बनाने के लिए परिवहन विभाग नई कवायद शुरू करने जा रहा है. बस से सफर करने वाले यात्रियों और अन्य लोगों को परिवहन विभाग न सिर्फ सड़क सुरक्षा जागरुकता से संबंधित बातों की जानकारी देगा, बल्कि प्रेशर हॉर्न से भी लोगों को जागरूक करेगा. इसके लिए परिवहन निगम की बसों में प्रेशर हॉर्न और सड़क सुरक्षा जागरुकत से संबंधित कई तरह के स्टीकर लगाए गए हैं.
परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि शहर को हॉर्न फ्री बनाने के लिए विशेष अभियान के तहत यह किया जा रहा है. अस्पतालों के पास विशेष रुप से अभियान चलाये जायेंगे. वाहनों में लगे प्रेशर हॉर्न के खिलाफ कार्रवाई के साथ साथ जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है.
बसों में लगे स्टीकर के माध्यम से नो हॉर्न की अपील की गई है. इसके साथ ही बताया गया है कि लोगों द्वारा वेबजह हॉर्न बजाने से कितनी परेशानी होती है. हॉर्न से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण फैलता है बल्कि चिड़चिड़ापन, विशेष रूप से रोगियों, वृद्धों और गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है. बेवजह शोर मनुष्यों के साथ साथ जानवरों और पेड़ पौधों के भी जीवन को प्रभावित करता है.
केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 120 (2) एवं पर्यावरण (संरक्षण) नियमावली 1986 के अनुसूची VI के तहत निर्धारित मानक स्तर से अधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले प्रेशर हार्न/ मल्टी ट्यून्ड हार्न का वाहनों में उपयोग किया जाना केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 1988 की धारा 190(2) के अंतर्गत निषिध है. वाहनों में प्रेशर हॉर्न/ मल्टी ट्यून्ड हार्न का उपयोग करना दंडनीय अपराध है. इसके तहत प्रथम अपराध के लिए 1000 और द्वितीय अपराध के लिए 2000 तक अर्थदंड का प्रावधान है.