इप्टा के 75वें साल के आग़ाज़ पर जनगीतों का उत्सव

By Amit Verma May 23, 2017

इप्टा के 75वें वर्ष की शुरूआत के मौके पर पटना इप्टा ने विषेष कार्यक्रम ‘‘आग़ाजः जनगीतों का उत्सव़’’ का आयोजन किया गया है. यह विशेष कार्यक्रम 25 मई, 2017 को पटना के प्रेमचंद रंगशाला परिसर, राजेन्द्र नगर में किया जायेगा.

‘आग़ाज़ः जनगीतों का उत्सव’ कार्यक्रम के अंतर्गत इप्टा के कलाकार जनवादी गीतों की प्रस्तुति करेंगे और इप्टा के 74 साल के सांस्कृतिक संघर्ष से दर्शकों को रू-ब-रू करायेंगे. इसके तहत वरिष्ठ संगीतकार सीताराम सिंह के संयोजन में दस दिवसीय ‘इप्टा संगीत कार्यशाला’ में तैयार किये गये चुनिन्दा जनगीतों की प्रस्तुति की जायेगी.




नाटक, गीत, संगीत, नृत्य आदि माध्यमों से आम आदमी तक जुड़ाव के मकसद से 25 मई 1943 को इप्टा की स्थापना हुई थी. अपने स्थापना काल से ही इप्टा ने रंगमंच, संगीत, सिनेमा, साहित्य आदि को आम आदमी के सरोकार से जोड़ने का काम किया है. अपने 74 सालों के इतिहास में इप्टा ने यह साबित किया है संगीत अक्सर हमें आज़ाद करता है, हदें तोड़ता है, लोगों को साथ लाता है, हारे को उठने की ताकत देता है और संघर्ष का जज़्बा जगाता है.

इप्टा के गीतों की खासियत रही है कि ये जोशीले हैं, लोगों को प्रेरित करते हैं. इप्टा के जनसंगीत में ग्रामीणता का पुट है तो शहरी नफासत भी. इप्टा सांस्कृतिक आन्दोलन के पहले भारतीय संगीत में कोरस यानि सामूहिक गान का महत्व कम था. ‘‘आग़ाज़ः जनगीतों का उत्सव’’ इप्टा की इसी परंपरा को दशकों के बीच प्रस्तुत करने का एक प्रयास है.

कार्यक्रम में मुंबई इप्टा से जुड़े संगीत निर्देशक कुलदीप सिंह मुख्य अतिथि होंगे. कुलदीप सिंह भारतीय रंगमंच, सिनेमा और टी.वी. के चर्चित संगीत निर्देशक है. ‘तुमको देखा तो यह ख्याल आया……’ ग़ज़ल एवं ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता…’ गीत से इन्हें काफी प्रसिद्धि मिली और ‘अंकुश’ एवं ‘साथ-साथ’ इनकी प्रमुख फिल्में हैं. 2009 में इन्हें रंग संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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