“इंतजार” ने कलाकारो का बिगाड़ा मानसिक संतुलन

प्रशासनिक शोषण के शिकार हुए आरा के कलाकार

कौन देगा प्रस्तुति इस सवाल पर अटकी है निगाहे




राजा की अगवानी में डूबा प्रशासन कलाकरों को सूचित करना ही भूल गया 

Patna now Exclusive


आरा, 24 अप्रैल. कुँवर सिंह विजयोत्सव की 160वी वर्षगाँठ की तैयारियों के लिए महीनों से जूझे जिला प्रशासन ने भले ही इसे भव्य बनाने के लिए तमाम ताम-झाम को पूरा कर इसका आगाज भी कल भव्य कर दिया लेकिन हकीकत यह है कि कलाकारों के चयन में जिला प्रशासन फेल हो गया है. कलाकारों की प्रस्तुति के बाद उनके चयन की घोषणा न होना और न ही उनके पुरस्कारों की राशि का दिया जाना प्रशासकीय घृष्टता की पोल खोलता है. वही प्रशासन के इस अनुशासनहीनता और बेढब आयोजन ने कलाकारों की मानसिक स्थिति खराब कर दिया है. प्रस्तुति के लिए कई जुगाड़ में भिड़े कलाकरों को उनकी प्रस्तुति कब है ये पता ही नही जबकि अधिकारी से लेकर आयोजक तक लिस्ट बन जाने की बात करते हैं. लेकिन प्रशासन द्वारा जारी लिस्ट में कलाकारों का नाम न होना सच्चाई की उजागर करता है. सच और झूठ से पर्दा हटाता बड़े आयोजन के नाम पर कलाकारों को ठगने की इस प्रशासन की परंपरागत पद्धति पर पटना नाउ की Exclusive रिपोर्ट.

भव्य मंच पर बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों का भी चयन कार्यक्रम को चार चाँद लगाने के लिए किया जाना था जिसके लिए 17 एवं 18 मार्च को जिला प्रशासन ने एक डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया था. प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं के लिए 11000, 8000 और 5000 रुपये की राशि भी तय की गई थी, जिसकी सूचना पूरे जिले में पोस्टर के जरिये प्रचार प्रसार के साथ किया गया था इतना ही नही, बल्कि इस प्रतियोगिता के लिए अखबारों के माध्यम से 2-2 बार विज्ञापन भी निकाले गए थे. दो दिनों के इस प्रतियोगिता के दौरान पहले दिन 4 ग्रुप डांस आये थे और दूसरे दिन लगभग 20 प्रतिभागियों ने अपनी भागीदारी दी थी. प्रतियोगिता में चयनित विजेता कलाकारों को विजयोत्सव के भव्य आयोजन के दौरान 24 और 25 अप्रैल को प्रस्तुति भव्य आयोजन वाले मंच पर देनी थी.

लेकिन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद भी कलाकारों को 23 अप्रैल तक कोई सूचना नही मिली. कलाकार एक दूसरे टोली से पूछने में ब्यस्त थे कि आखिर किसका सलेक्शन बड़े आयोजन वाले मंच के लिए हुआ? जब सभी कलाकारों को जवाब में सवाल ही मिला तो सब सन्न रह गए. अब उन्हें यह चिंता सता रही थी कि जिले में दूर दराज से प्रस्तुति देने आए कलाकारों के समक्ष उनकी प्रस्तुति के लिए कहीं जिला प्रशासन का फरमान आ गया तो अचानक से वो 40 की संख्या में शामिल कलाकरो को कैसे सूचित और तैयार करेंगे? उन्होंने इसलिए DPRO, SDO, DEO से लेकर DDC तक संपर्क कर विजेताओं का नाम जानना चाहा ताकि वो समय रहते सारी तैयारियां कर सके, जिससे प्रस्तुति धारदार और जिले की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली हो. लेकिन कलाकरों के इस सोच से परे प्रशासनिक अधिकारी तो अपने नौकरशाही रवैये की मकड़जाल में घूमते हुए रटा-रटाया एक दूसरे पर फेंकने वाले जवाब दे कलाकारों से बचते रहे. कलाकारों के अनुसार DPRO ने SDO से बात करने को कहा, SDO ने DDC से बात करने को कहा  और DDC ने DEO से बात करने को कहा. अंत मे जब DEO साहब से कलाकारों की बात हुई तो उन्होंने DDC के खाते में ही आखिरी गेंद डाली और कहा कि बड़े साहब तो वही हैं वो जो आदेश देंगे वही हम आपको बता देंगे. कलाकारों का समझ मे आ गया कि नौकरशाही में कला की कोई जगह ही नही होती. उन्होनें तो मन बनाया की जब उन्हें कोई सूचना ही नही मिल रही तो ऐसे में वे कैसे जाएंगे. लेकिन उनका मानसिक संतुलन अब जवाब देने लगा क्योंकि कई दिनों की हाड़तोड़ मेहनत और घण्टों पूर्वाभ्यास और तकनीकी जटिलताओं के बाद उनका समय से लेकर पैसा तक बर्बाद हो चुका था, जिसका न तो उन्हें कोई रिटर्न मिला था और ना ही सम्मान रूपी कोई पुरस्कार या उसकी सम्मानित राशि ही.

प्रशासनिक अधिकारियों का जवाब

कलाकारों ने उक्त बात की सूचना सबसे पहले “पटना नाउ” को दी. पटना नाउ ने कलाकारों की इस समस्या को सुलझाने के लिए अधिकारियों से बात करना शुरू किया क्योंकि खबर से पहले जिले के सम्मान को बचाने की बात थी, कला के सम्मान की बात थी. पटना नाउ ने सबसे पहले DEO से बात कर यह जानना चाहा कि वो लिस्ट कहाँ है जिसमे चयनित कलाकारों का नाम है? और अगर लिस्ट में नाम है तो फिर कलाकारों को सूचित क्यों नही किया गया? इसका जवाब DEO साहब के सिमसीमाते आवाज ने दे दी कि DDC साहब ही न बताएंगे. लिस्ट तो बन गया है लेकिन वो बोल देंगे तो सूचना दे दी जाएगी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि CM साहब को छोड़ने साहब गए हैं तो फ्री होते ही सबको सूचना शाम तक मिल जाएगी. मतलब साफ हो गया कि लिस्ट जनाब के पास नही थी वर्ना वो फ़ोन पर ही उस टीम या कलाकारों का नाम बता देते.

निर्णायक सदस्य का जवाब
पटना नाउ ने इसकी पड़ताल के लिए प्रतियोगिता के लिए एक निर्णायक सदस्य को फोन कर जब जानना चाहा कि क्या निर्णायकों ने अपना निर्णय प्रशासन को नही सौंपा था तो उस निर्णायक मंडल की सदस्या ने बताया कि उन्होंने अपना निर्णय प्रतियोगिता खत्म होने के बाद ही उसी समय संबंधित अधिकारी को सौंप दिया था. उन्होंने यहां तक कि विजेताओं में से दो के नाम भी बता दिए. साथ उन्होंने जो व्यवस्था में खामियां बताना शुरू किया तो हैरानी हुई कि इतने बड़े कार्यक्रम में निर्णायकों के लिए कुर्सी और पानी की व्यवस्था तक प्रशासन ने नही किया था. जब निर्णायको ने DPRO को जिले की इज्जत की दुहाई दी तो उन्होंने हाथ जोड़कर 18 मार्च को पानी की व्यवस्था करने का वादा किया,लेकिन अगले दिन भी वही स्थिति. मजेदार बात तो यह थी कि समिति में ऐसे लोगो को रखा गया था जिन्हें कला का कोइ ज्ञान ही नही था. डॉ सतीश कुमार सिन्हा डांस के प्रतियोगिता में क्या करेंगे? निर्णायकों को आयोजक यहाँ तक नही बता पाए कि कितने कैटेगरी में निर्णय देना है. इससे खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी कुव्यवस्था का आलम वहां था.

DDC ने कहा-“गाड़ी की व्यवस्था है अभी DEO को बोल दे रहा हूँ…”

DDC, भोजपुर, शशांक शुभंकर(फाइल फोटो)

हमने फिर DPRO से संपर्क साधा लेकिन उनका फोन कई प्रयासों के बाद भी नही लगा. फिर हमने बड़े साहब यानि DDC साहब से बात कर उक्त बातें रखीं तो साहब का फटाक जवाब मिला-‘DEO के पास लिस्ट है’. हमने उनसे कहा कि साहब वो तो आपको बोल रहे हैं, जैसे भी सबको सूचित कीजिये वर्ना सबको लाना मुश्किल हो जाएगा. DDC साहब ने कहा कि सभी के लिए गाड़ी की व्यवस्था है. मैं अभी DEO को बोलता हूँ.

इस बीच DEO, DDC या DPRO के बीच क्या बात हुई ये नही पता चला. देर रात पता चला कि लगभग 10 बजे कलाकरों को प्रस्तुति के लिए सूचित किया गया है. जिसमे 10 दलों को सूचना दी गयी है. अब ये सोचने वाली बात है कि विजेता और उपविजेता को ही चयनित करना था ऐसे में 10 दलों का चयन निर्णय पर सवाल तो है ही… उनकी पुरस्कार राशि के बंदरबाट का भी सवाल है. फिलहाल पटना नाउ के सवालों ने आनन-फानन  में प्रशासन को सभी को अपनी फजीहत से बचने के लिए सूचना भेज अपना पिंड छुड़ा लिया. कलाकारों को आज 3 बजे संध्या में जाना तय हुआ है. देखना यह दिलचस्प होगा कि आज प्रशासन कलाकरो को मान-सम्मान के साथ ले भी जाता है या नही. क्योंकि “राजा” साहब तो कल उद्घाटन कर के चले गए हैं. अब बागडोर उनके सिपहसलारों पर है. राजा साहब के जाने के बाद ये कितनी मुस्तैदी से काम करेंगे यह तो वक्त ही बयान करेगा. वैसे इस खबर की सूचना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है और सभी लोग प्रशासन के इस लापरवाह वर्ताव की निंदा कर रहे हैं.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट