गुंडागर्दी पर उतर आये हैं वीर कुंवर सिंह विवि के प्रतिकुलपति

छात्रों को केस में फंसाने की पूरी थी कवायद
छात्रों से भिड़ने के लिए विवि ने बुलाये प्राइवेट गार्ड

छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में आज विश्वविद्यालय में पुनः हंगामा जारी रहा. 19 दिसम्बर 2016 से प्री-पीएचडी के रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर NSUI ने प्रतिकुलपति का घेराव किया था और अपनी कई मांगों के लिए आवाज उठाया था. इसी घेराव के बाद मामले ने तूल पकड़ा था और एक सिपाही के अँधेरे के वजह से गढ्ढे में गिर जाने से भड़के पुलिस ने अँधेरे में खिसियाई बिल्ली की तरह ताबड़तोड़ लाठी चार्ज किया था जिसमे कई छात्रों और मीडियाकर्मियों को चोटें आयीं थी. फिर तो अगले दिन से सभी संगठनो ने इस घटना की निंदा करते हुए विश्विद्यालय का काम ठप्प किया था और तब से लेकर अबतक छात्रों का यह संघर्ष जारी है.




बड़ा दिन होने की वजह से 25 दिसम्बर से 5 दिसम्बर तक विवि की छुट्टी थी. लेकिन जैसे ही नए साल में विवि खुला छात्र आज पुनः विवि में शांति पूर्ण प्रदर्शन के लिए विवि पहुँचे. लेकिन छात्रों से पहले विवि कैम्पस में लगभग 50 प्राइवेट गार्ड पहले से ही मुस्तैद थे. जिन्होंने छात्र नेताओं को प्रदर्शन करने को मना किया. लेकिन छात्र नेता अपने प्रदर्शन को ले विवि के प्रशासनिक गेट पर अड़े रहे. इस बीच गार्डों से उनकी तू-तू मैं-मैं होती रही और छात्रों को उसकाने के लिए विवि प्रशासन द्वारा बुलाये गये प्राइवेट गार्डों ने कोई कसर नही छोड़ी. पूरा परिसर काले रंग के गार्डों से भरा ऐसा लग रहा था मानो छात्रों से लड़ने के लिए प्राइवेट कमांडो बुलाये गए हों. चारो तरफ मीडियाकर्मियों ने भी कैमरे से अपना मोर्चा संभाल रखा था. लेकिन छात्रों ने अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हुए अपनी ओर से कोई गलती नहीं की. सूत्रों की माने तो विवि प्रशासन की यह एक सोची समझी रणनीति थी कि गार्डों से छात्र नेताओं को उलझाया जाएगा और छात्र नेता अगर उत्तेजित होकर हमलावर मुद्रा में आएंगे तो उन्हें मुक़दमे में फंसा दिया जायेगा.

इस बीच छुटियों में विवि में प्रशासनिक भवन के मुख्यगेट पर एक और चैनल गेट लगा दिया. इस तरह दो गेट को लगाकर विवि प्रशासन ने प्रशासनिक भवन में अपनी सुरक्षा पुख्ता कर लिया है. इधर NSUI के जिलाध्यक्ष अभिषेक द्विवेदी ने बताया कि छुट्टी के दिनों में विश्वविद्यालय में नामांकन और प्रमाण-पत्रों की खूब अवैध तरीके से बिक्री हुई है. छात्र नेताओं को भी आज हुए आंदोलन में टकराव की उम्मीद थी इसलिए उन्होंने अपने शांतिपूर्ण धरना के लिए सदर अनुमंडलाधिकारी को इस संबंध में आवेदन दे दिया था. टकराव के समय छात्रों ने बिना गार्डों से उलझे जोर जोर से नारा लगाना शुरू किया. इसी बीच जिला प्रशासन ने पुलिस बल नियाज अहमद के नेतृत्व में भेजा. विवि में सदर अनुमंडलाधिकारी और एसडीपीओ भी आये और उनलोगों ने विवि प्रशासन से मिलकर बातें की और गार्डो और छात्रों के टकराव को रोक दिया. इस बारे में क्या बातें हुइ इस पर किसी टिप्पणी से अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया.

 सुबह ही आकर चले गए प्रतिकुलपति

पटना नाउ को मिले सूत्रों से खबर के अनुसार प्रतिकुलपति आन्दोलन के बाद से तो जैसे अंडरग्राउंड हो गए है. जिसे लेकर किसी ने लापता होने का एक पोस्टर भी चिपकाया था और उस पोस्टर पर अपना मोबाइल नम्बर भी दिया था ताकि खोज कर लाने वाले को इनाम दिया जा सके. आज अहले सुबह लगभग 8 बजे प्रतिकुलपति विवि आये अपने कार्यालय में कुछ काम निपटाया और 9.30 के करीब विवि परिसर से गायब भी हो गये. क्योंकि उन्हें हंगामे का अंदाजा जो था और 50 गार्डों को फिट कर ही दिया था. इस हंगामे के बीच विवि कर्मियों को अंदर प्रवेश करने की हिम्मत नहीं हुई.

 

कहाँ से आये प्राइवेट गार्डों के लिए पैसे

इतनी भारी संख्या में गार्डों को देखने के बाद पुरे शहर में आज यही चर्चा थी कि प्राइवेट गार्डों को विवि में बुलाने के बाद किस मद से इन गार्डो का भुगतान विवि करेगा? कहीं गार्डो के भुगतान की राशि का मामला भी प्रतिकुलपति के गले की हड्डी न बन जाये. उक्त मामले पर बात करने की कोशिश के बावजूद प्रति कुलपति ने फोन तक उठाना उचित नहीं समझा.

रिपोर्ट -आरा से ओ  पी पाण्डेय