नहीं रहे पीरो के गांधी,अमर रहेंगे उनके कार्य

By pnc Oct 10, 2016

नहीं लिया कोई पेंशन,आजादी के लड़ाई में सक्रिय भागेदारी निभाई 

उनकी मांग थी – समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को उनका हक मिले 




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समाजवादी आंदोलन का एक और खंभा ढह गया . प्रखर समाजवादी चिंतक, विचारक व पूर्व विधायक राम एकबाल वरसी अब नहीं रहे. रविवार की देर रात पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में उन्होंने अंतिम सांस ली . वरसी 1969 में तत्कालीन पीरो विधानसभा क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे. डॉ राम मनोहर लोहिया ने उन्हें, उनके अक्खड़ समाजवादी विचारों व जनहित के लिए समर्पण से प्रभावित होकर  एक नया नाम दिया – पीरो का गाँधी. इस नये नाम ने उनमें गजब का आवेश व जज्बा भर दिया था. इस नाम को सार्थक बनाने के लिए उन्होंनेे अपने को जन सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया.गरीबों, मजलूमों  व समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को उनका वास्तविक हक दिलाना वरसी के जीवन का लक्ष्य बन गया था. वे विधायक रहते हुए जिस तरह मुखर होकर गरीबों की आवाज उठाते रहे उसी तरह जीवन के अंतिम समय में भी उनकी यह मुहिम धीमी नहीं पड़ी .उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को उनका हक नहीं मिलता तब तक लोकतंत्र का सपना साकार नहीं होगा .1926 में तरारी प्रखंड के छोटे से गांव वरसी में जन्मे इस महा मानव ने जनसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया था तभी तो अपने तथा खुद के कुनबे के बारे में कुछ सोचा तक नहीं .वरसी एवं उनके परिजन अभावों के बीच जीते रहे पर वरसी ने पूर्व विधायक के नाम पर सरकार की ओर से मिलने वाले पेंशन को लालच का ठिकरा बताकर उसमें से फुटी कौड़ी भी लेने से इंकार कर दिया. वे कहते थे कि सरकार का यह पैसा गरीबों पर खर्च किया जाना चाहिए. वरसी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में भी सक्रिय रहे. घर परिवार की माली हालत खस्ताहाल होने के बावजूद इसकी परवाह न करते हुए वे डालमिया फैक्ट्री में मुंशी की नौकरी को लात मार कर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े थे. इस दौरान जेल में उनकी मुलाकात जय प्रकाश नारायण सहित अन्य राजनीतिक दिग्गजों से हुई जिनसे वे काफी प्रभावित हुए .वैसे वे डॉ राम मनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानते हुए उनके पदचिन्हों का आजीवन अनुसरण करते रहे. वरसी के निधन से हुई राजनीतिक जगत में आई  रिक्तता की भरपाई शायद नहीं हो सकती है.

 रिपोर्ट -आरा से ओपी पाण्डेय

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