डॉ. गौरीशंकर राजहंस के निधन पर सीएम ने जताया शोक

पूर्व सांसद, पूर्व राजनयिक,पत्रकार और लेखक थे डॉ० गौरीशंकर

दिल्ली के लोधी गार्डेन में अंतिम संस्कार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झंझारपुर के पूर्व सांसद, पूर्व राजनयिक, पत्रकार एवं लेखक डॉ० गौरीशंकर राजहंस के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की. मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि झंझारपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व सांसद डॉ. गौरीशंकर राजहंस लाओस और कम्बोडिया के भारतीय राजदूत भी रहे थे। वे हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार, स्तम्भकार एवं लेखक भी थे. डॉ० गौरीशंकर राजहंस जी का निधन अत्यंत दुःखद है. उनके निधन से राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है.




स्व डॉ. गौरीशंकर राजहंस की फ़ाइल चित्र

बिहार के सुल्तानगंज के निवासी पूर्व सांसद, पूर्व राजदूत व स्तंभकार डॉ. गौरीशंकर राजहंस का 84 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया. डॉ. गौरीशंकर कंबोडिया व लाओस में भारत के राजदूत रहने के अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के प्रबंधन से भी जुड़े रहे थे. उनके निधन से परिवार में शोक की लहर है. उनके बेटे चेतन राजहंस ने बताया कि वह 15 दिनों से बीमार थे. सोमवार सुबह उनका निधन हो गया. इससे पहले वे सफदरजंग के असश्लोक अस्पताल में भर्ती थे. दिल्ली के लोधी गार्डेन में मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा.

हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे डॉ. बहादुर मिश्र ने बताया कि डॉ. राजहंस ने एक शिक्षक से राजनयिक और राजनेता तक का सफर तय किया था. डॉ. गौरीशंकर कांग्रेस के बड़े नेता रहे जयदेव राजहंस के पुत्र थे. जयदेव राजहंस की प्रेरणा से ही रंगनाथ मुरारका ने सुल्तानगंज में मुरारका कॉलेज की स्थापना की थी. गौरीशंकर राजहंस की शिक्षा टीएनबी कॉलेज में हुई. पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जगन्नाथ मिश्र के वह बैचमेट थे. बाद में अर्थशास्त्र विषय में उन्होंने मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से एमए किया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका कैलिफोर्निया से पीएचडी की. बाद में जगन्नाथ मिश्र के बड़े भाई लड्डू मिश्र की बेटी से उनकी शादी हुई.

डॉ. राजहंस मुरारका कॉलेज में अर्थशास्त्र के व्याख्याता नियुक्त हुए थे . वह लघु उपन्यासकार भी थे. कई लघु उपन्यास उन्होंने लिखे. डॉ. गौरीशंकर की दो बेटियां और एक बेटा हैं. उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह समाज के लिए अपूरणीय क्षति है. गौरीशंकर वर्ष 1984 से 89 तक झंझारपुर से कांग्रेस के सांसद रहे थे. उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री देवेन्द्र प्रसाद यादव को पराजित किया था. झंझारपुर के पुराने लोगों की मानें तो उनके समय इस संसदीय क्षेत्र में विकास के कई मानक स्थापित किए गए.

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