“प्लांट फॉर प्लेनेट” पर जोर है सांसद का । बिहार में भी लगाएंगे पौधे

Dr Achyut Samant at Press Meet

पटना (पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट) | “बिहार के साथ में मेरा पुराना और विशेष लगाव है. यहाँ के करीब 10 हजार छात्रों का समूह मेरे इंस्टिट्यूट में है. – ऐसा कहना है बीजद सांसद डॉ अच्युत सामंत का, जो कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ( केआईआईटी) तथा कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस ( केआईएसएस) के संस्थापक भी हैं. वे शुक्रवार को पटना के एक होटल में मीडिया वालों के साथ मीटिंग के दौरान कही. डॉ. अच्युत सामंत ने कहा कि वे हर साल बिहार आकर मीडिया के माध्यम से बिहारवासियों को आभार व्यक्त करता रहता हूँ कि उन्होंने KIIT पर भरोसा किया तथा यहाँ से पास करके दुनिया के हरेक कोने में नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है. उनके अनुसार आज भी उनके इंस्टिट्यूट में लगभग 6 हजार बिहारी बच्चे पढ़ रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि यदि बिहार सरकार जमीन दे, तो वे यहां 1000 गरीब बच्चों के लिए स्कूल भी खोलेंगे.

https://youtu.be/B56SekmXgr4

“प्लांट फॉर प्लेनेट” के तहत पौधे लगाएंगे
पटना नाउ से बात करते हुए डॉ सामंत ने बताया कि उनका एक प्लेटफॉर्म है, ‘आर्ट ऑफ गीविंग’ जो प्रत्येक वर्ष अलग-अलग थीम पर सामाजिक कार्य करता है. इस साल का थीम है, गो ग्रीन – “प्लांट फॉर प्लेनेट”. इसके अंतर्गत 120 देशों में करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाया जाना है. “प्लांट फॉर प्लेनेट” के अंतर्गत पूरे भारतवर्ष में 12 करोड़ से लेकर 18 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें बिहार में 2 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे. इस कार्य में इंस्टिट्यूट के अलुमिनी छात्र व उनके पेरेंट्स आदि सहयोग करेंगे. 17 मई 2020 को ‘आर्ट ऑफ गीविंग’ के फाउंडेशन डे पर यह आकलन किया जाएगा कि कितने करोड़ पौधे लगाए गए.
10 गरीब बच्चों को नि:शुल्क इंजीनियरिंग
डॉ सामंत ने कहा कि हर साल बिहार के 10 गरीब बच्चों को कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में नि:शुल्क इंजीनियरिंग पढ़ाया जाएगा जिसमें उनके आवासीय व्यवस्था भी शामिल रहेगी. इसके लिए बीपीएल कैटेगरी के छात्र आवेदन कर सकते हैं. स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा स्क्रीनिंग के पश्चात इस 10 छात्रों का चयन किया जाएगा. उन्होंने आगे बताया कि देश के सभी राज्यों में गरीब बच्चों के लिए ‘कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस’ (KISS) द्वारा नि:शुल्क आवासीय स्कूल खोलने की योजना भी है. अभी ये स्कूल उड़ीसा और दिल्ली में चल रहे हैं.
ज्ञातव्य है, कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी ( केआईआईटी), पहले केआईआईटी यूनिवर्सिटी,, एक निजी संस्थान है जो ओडिसा के भुवनेश्वर में स्थित एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है. कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (KISS) उड़ीसा के अतिग्रामीण इलाके के करीब 50 हजार से अधिक गरीब आदिवासी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहा है.
बताते चलें कि डॉ अच्युत सामंत देश के सबसे गरीब लोकसभा सांसद हैं जिनके पास कोई भी जायदाद नहीं है. अपने इंस्टिट्यूट के परिसर में वे साइकिल या पैदल घूमते हैं. सबसे आश्चर्य यह है कि वे अपना ऑफिस पेड़ के नीचे बनाए गए चबूतरे पर चलाते हैं और उनके न्यूनतम जरूरतों का खर्च यूनिवर्सिटी उठाता है. 4 साल की उम्र में ही इनके पिता की मृत्यु हो गई जिसके बाद वे सब्जी बेचकर अपना जीवन यापन करते थे. उनका आरंभिक जीवन अत्यंत गरीबी और अभाव में बीता था. इस कारण शुरू से उनके मन में समाज से गरीबी और अशिक्षा को हटाने की ललक थी. मात्र 5000 की लागत और 12 छात्रों से इन्होंने 1997 में भुवनेश्वर में कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (KIIT) कि स्थापना कि थी. आज डॉ सामंत की पूंजी करींब 800 के आसपास है.