हजार और पांच सौ के बीस हजार रुपये होने के बावजूद नहीं किया इलाज 

पुराने नोट रहने के बावजूद जेनरल स्टोर दुकानदार की मौत
गमगीन माहौल में उठा जनाजा 
लोगों ने प्रधानमंत्री के नोटबंदी को कोसा 

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने नोटबंदी से देश में लगी अराजकता की आग इसोपुर के रहमत नगर भी पहुँच गयी. इसोपुर के रहमत नगर निवासी और जेनरल स्टोर की दुकान चलाकर परिवार का भरन पोषण करने वाले वृद्ध मो मोईज (उम्र 60 वर्ष ) की मौत हजार और पांच सौ रूपये के पुराने नोट पास में होने के बावजूद इलाज नहीं हो पाने के चलते हो गया . मोइज की विधवा हुस्ना समेत पांच बेटी और चार बेटों का भरा पूरा परिवार के सामने परवरिश बड़ा संकट बनकर आ  गया हैं . मंगलवार की शाम गमगीन माहौल में मो मोइज का जनाजा उठा तो लोगों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नोट बंदी को लोगों ने जमकर कोसा और इलाज नहीं करने वाले डॉक्टर के खिलाफ भी लोगों ने जम कर अपना विरोध प्रकट किया .   

 जनरल स्टोर दुकानदार  मोइज मियां के घर परिजनों का क्रंदन इस कदर की इलाके से गुजर रहे लोगों के कदम खुद ब खुद ठिठक जाते थे क्योंकि यहाँ हुई थी एक ऐसी मौत जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.  मो मोइज की विधवा हुस्ना ने रोते कलपते हुए बताया की घर में ही फिसल जाने से गिर गए  थे जिनसे उनकी पैर की हड्डी टूट गई  थी . परिजनों ने उन्हें आनन फानन हारून नगर में डॉ एकबाल के क्लिनिक में इलाज के लिए गए. परिजनों ने बताया की डॉ एकबाल के क्लिनिक में इलाज के लिए पुराने नोट लेने से इंकार करते हुए सौ सौ के नोट या नए नोट देने को कहा गया. जब परिजनों ने कहा की उनके पास हजार और पांच पांच सौ के पुराने नोट बीस हजार हैं आप इलाज तो कीजिये. परिजनों के लाख अनुरोध  के बाद भी डॉक्टर ने इलाज नही किया.दर्द से तड़पते  इलाज के आभाव में मो मोइज की मौत हो गयी. 

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              इस सम्बन्ध में डॉ एकबाल ने कहा की मृतक की विधवा और उनके अन्य परिजनों का आरोप बेबुनियाद और गलत है. नए नोट और पुराने नोट की बात ही नही हुई थी. मरीज को ऑपरेशन करने की जरूरत है यह बात उनके परिजनों को बताया गया था लेकिन परिजनों ने ट्रेक्शन लगवाकर ही मरीज को घर लेकर चले गए.