बिहार में क्यों 50 फीसदी से भी कम है सीडी रेशियो!

राज्य स्तरीय बैंकिंग समिति की बैठक में सीएम नीतीश कुमार ने बैंकों को जमकर फटकार लगाई है. सीएम ने साफ कहा कि आप बिहार के लोगों से पैसे जमा कराते हैं और उसी पैसे को साउथ और वेस्ट के राज्यों में जाकर बड़े-बड़े लोगों को लोन दे देते हैं. लेकिन बिहार के लोगों को लोन देने में आनाकानी करते हैं. बैंकों से लोन लेकर कई लोगों ने हजारों करोड़ का चूना लगा दिया लेकिन बिहार के लोग लाख-दो लाख का लोन मांगते हैं तो आप बहाने बनाते हैं.




बिहार में क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 50% से भी कम रहने पर सीेएम ने नाराजगी जताई और कहा कि बिहार के लोग बैंकों पर इतना भरोसा करते हैं कि अपनी सारी जमा पूंजी बैंकों में ही जमा करते हैं, फिर आप लोन देने में क्यों उन्हें परेशान करते हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ भी लाभुकों के खाते में समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत भी मिल रही है जिसे बैंकों को गंभीरता से देखना चाहिए.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पटना में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा आयोजित 64वीं त्रैमासिक समीक्षा बैठक में बोल रहे थे. इस मौके पर एसबीआई के महाप्रबंधक ने बैंकों से संबंधित समस्या बताई, राज्य सरकार की तरफ से वित्त मंत्री एवं विभाग के प्रधान सचिव ने बैंकों से संबंधित पक्ष रखा. वहीं रिजर्व बैंक के महाप्रबंधक ने आंकड़े के मिलान में गड़बड़ी के बारे में जिक्र किया और भी बैंकों से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रखा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में बैंकों की सेवा महत्वपूर्ण होती जा रही है। हमलोगों ने वर्ष 2006 से ही कई योजनायें बैकों के माध्यम से चलाने का प्रयास किया लेकिन उसमें उनका सहयोग नहीं मिला। बिहार में नकद भुगतान के द्वारा कई योजनाओं को क्रियान्वित किया गया. 2008 में साइकिल योजना 2000 रूपये नकद भुगतान के द्वारा शुरूआत की गई. लोगों को आशंका थी कि यह रूपया साइकिल में नहीं खर्च किया जायेगा लेकिन पहले वर्ष में इस नकद वितरण के द्वारा 96 प्रतिशत साइकिल खरीद की गई.

हमलोग समाज कल्याण, वृद्धा पेंशन, छात्रवृति योजना जैसी कई अन्य योजनायें नकद भुगतान के द्वारा केन्द्र की योजना के पहले से संचालित करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार आपदा बाहुल्य राज्य है. खासकर बाढ़ यहां अक्सर आते रहता है, वर्ष 2008 में कोसी त्रासदी आई थी और उसमें आपदा पीड़ित परिवारों को नकद भुगतान किया गया था. पिछले वर्ष राज्य के सीमावर्ती जिलों में भयानक बाढ़ आई थी, यह फ्लैश फ्लड था. 38 लाख परिवारों को 6 हजार रूपये प्रति परिवार की दर से RTGS के द्वारा भुगतान कराया गया. इसके लिए हमारे अधिकारीगण बैंकों के निरंतर सम्पर्क में लगे रहे. बैंकों को इस बात का ख्याल रखना होगा कि पैसे का भुगतान समय के अंदर हो, जल्द से जल्द ट्रांसफर हो, उसके लिए निचले स्तर पर व्यवस्था को दुरूस्त करना होगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी एक बैंक कर्मचारी की हत्या के बारें में जिक्र किया गया. उसकी पूरी तहकीकात कर ली गई है, तुरंत गिरफ्तारी होगी. कोई भी नहीं बचेगा. आपको सुरक्षित रखने में हमलोग किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतेंगे. उन्होंने कहा कि ग्राहक सेवा केन्द्र के द्वारा धांधली की शिकायत अक्सर मिलती है. हम चाहेंगे कि ग्राहक सेवा केन्द्र का ठीक से गठन हो, इसमें काम करने वाले लोगों की जानकारी प्रशासन को भी दी जाये ताकि उनका फीडबैक प्रशासन भी पता कर सके और वे फर्जीवाड़ा नहीं पर पाये. सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि जो बैंकों के माध्यम से जनता को मिलती है, अगर कोई गड़बड़ी होती है तो जनता सरकार को सीधा जिम्मेदार मानती है, जबकि गड़बड़ी बैंकवालों के द्वारा होती है. इन सब चीजों पर भी आप लोगों को चर्चा करनी चाहिये.

मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि राज्य के 1/6 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कराया जा चुका है. आप चाहें तो उसमें ब्रांच खोलिये, कोई किराया नहीं लिया जायेगा. हर एक ग्राम पंचायत में अगर बैंक का ब्रांच
होगा तो लोगों को काफी सुविधा होगी.

 

राजेश तिवारी