हर बच्चे के अंदर होता है एक फिल्मकारः डाॅ. श्रवण

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हर बच्चे के पास एक कहानी होती है और उसे कहने का तरीका भी उसके पास होता है. अगर उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियों से परिचय कराया जाय तो बच्चे भी एक समझदार फिल्मकार हो सकते हैं. इसी परिकल्पना को आधार बनाकर चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी, इंडिया द्वारा ‘लिटिल डायरेक्टर्स’ कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके माध्यम से स्कूल के बच्चे अपनी कहानी पर फिल्म बनायेंगे और फिर उसे विभिन्न जगहों पर दिखाया जायेगा. उक्त बातें चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी, इंडिया(सीएफएसआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. श्रवण कुमार ने कही. वे सीएफएसआई एवं विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बाल फिल्म महोत्सव ‘फिल्म बोनांजा’ के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. डाॅ. कुमार ने कहा कि सीएफएसआई का प्रयास है कि बच्चों के लिए बनने वाली फिल्में विधिवत रिलीज हों तथा मुख्य धारा के सिनेमा की भांति उन्हें देखने के लिए लोग थियेटर तक जायें. सिनेमा ने बच्चों के मन को प्रभावित किया है, इसका उदाहरण यहां उपस्थित बच्चों के उत्साह को देखकर पता चलता है. विश्व संवाद केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ‘फिल्म बोनांजा’ कार्यक्रम की सफलता यह उम्मीद जगाती है कि आने वाले समय में उम्दा किस्म की बाल फिल्मों का निर्माण होगा और उसका व्यापक रूप से प्रदर्शन होगा. डाॅ. कुमार ने कहा कि बच्चों के उत्साह को देखकर हमारा प्रयास होगा कि अगली बार से बड़े आयोजन स्थल का चयन किया जाय, जहां कई सौ बच्चें एक साथ बैठकर फिल्म देख सकें.




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आयोजन समिति की ओर से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य आनंद प्रकाश नारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सिनेमा अत्यंत ही प्रभावशाली माध्यम है जो हरेक उम्र के दर्शकों के मन को प्रभावित करता है विशेषकर बाल मन को. सिनेमा में इतनी शक्ति है कि वह समाज के एक बड़े वर्ग की जीवन शैली में परिवर्तन ला सकता है. इसलिए यह आवश्यक है कि बाल फिल्म महोत्सव के माध्यम से सकारात्मक एवं सार्थक फिल्मों को बढ़ावा दिया जाये ताकि बाल मन पर सिनेमा का अनुकूल असर हो.
इससे पूर्व स्वागत संबोधन करते हुए विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने कहा कि विश्व संवाद केंद्र का सदैव प्रयास रहा है कि नकारात्मक चीजों को परे रखकर समाज की जो सकारात्मक गतिविधियां हैं उनको रेखांकित कर उद्घाटित किया जाए.आधुनिक समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करने के दिशा में संस्था सदैव प्रयासरत है. इसकी एक इकाई पाटलिपुत्र सिने सोसायटी बिहार में स्वस्थ सिनेमा की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयत्नशील है. पिछले महीने आयोजित लघु फिल्म महोत्सव तथा आज संपन्न हो रहे बाल फिल्म महोत्सव इसी प्रयास की कड़ियां हैं. दर्शकों के मिल रहे प्रतिक्रिया से हम उत्साहित हैं और उम्मीद करते हैं कि आगे इससे भी बड़े पैमाने पर बाल फिल्मोत्सव का आयोजन करेंगे.

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धन्यवाद ज्ञापन करते हुए फिल्म विश्लेषक प्रो. जय देव ने कहा कि सीएफएसआई की यह अनूठी पहल निश्चित रूप से इस मायने में सराहनीय है कि इसने अच्छी फिल्मों के द्वार बाल दर्शकों के लिए खोल दिया है। ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर होते रहे तो यह उम्मीद की जानी चाहिए कि शिक्षकों तथा अभिभावकों के मन में सिनेमा को लेकर एक अच्छी सोच विकसित होगी। फिल्मोत्सव के दौरान पूरे तीन दिन तक स्कूली बच्चों की सक्रिय भागीदारी यह बताती है कि बच्चे मस्ती-मजाक के अतिरिक्त समझ-बूझ वाली फिल्मों को देखने और उनके मर्म को समझने का बोध रखते हैं.
कार्यक्रम का मंच संचालन पाटलिपुत्र सिने सोसायटी के संयोजक प्रशांत रंजन ने किया. इस अवसर पर दीघा के विधायक तथा विश्व संवाद केंद्र के सचिव डाॅ. संजीव चैरसिया, फिल्म शोधार्थी राहुल कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी प्रो. एन.एन. पांडेय, मो. अफजल इंजीनियर, संजय सिन्हा, छायाकर दीपक लक्ष्मी, वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकांत ओझा, सुमन कुमार आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.