45 दिवसीय कार्यशाला का समापन सह समर कैम्प का उद्घाटन

By Amit Verma Jun 7, 2017

ओ पी पाण्डेय को मिला भोजपुर का “नाट्य-पुत्र” सम्मान
मनोज सिंह को भोजपुरी सम्मान से नवाजा गया

 




नेशनल साइंटफिक रिसर्च एंड सोशल एनालिसिस ट्रस्ट के 45 दिवसीय कार्यशाला का आज बड़ी मठिया स्थित कार्यालय में समापन हुआ. साथ ही समर कैम्प का शुभारम्भ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्य अतिथि विधान पार्षद राधाचरण साह, संस्था के अध्यक्ष श्याम कुमार, राज्य पुरस्कार प्राप्त रुमा वर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता हरेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया. मुख्य अतिथि ने कहा कि समाज में महिलाओं को सशक्त करने की इस संस्थान के प्रति कृत संकल्पित हैं और इस सकरात्मक कार्य के लिए वे सरकारी अनुदानों को भी संस्था को उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे. समापन समारोह रंगारंग कार्यक्रमो के साथ सम्पन्न हुआ. प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि ने सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया.

संस्था की और से पिछले 45 दिनों से कशीदाकारी और ब्यूटीशियन की ट्रेनिग दी जा रही थी. जिसमे 120 लड़िकयों और महिलाओं ने भाग लिया था. यह प्रशिक्षण महिलाओं को स्वावलंबन और महिला सश्क्तीकरण के उद्देश्य से दिया जा रहा है. मंच संचालन करते हुए पत्रकार मंगलेश तिवारी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण उपलब्ध कराना अच्छी पहल है. साथ ही उन्होंने कहा कि NGO के नाम और बहुत उगाही हो रहा है लेकिन फिर भी महिलाएं अभी कमजोर है. लेकिन यह एक ऐसी संस्था है जो किसी भी सरकारी सहयोग के बिना चलती है. उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं से कहा कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में नहीं अनुस्पर्धा की दौड़ में शामिल होईये. अपने आप से प्रतिस्पर्धा करने की बात करते हुए उन्होंने
मुनव्वर की लाइन “ए अँधेरा देख लें मुह तेरा काला हो गया, माँ ने आँखे खोल दी देख उजाला हो गया” की बात महिलाओ के लिए एक उजाले के रूप में कही.

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गीत से हुआ जिसे अंजलि तिवारी,अनामिका, अनामिका रंजन,रश्मि उपाध्याय एवं आकांक्षा प्रियदर्शनी ने प्रस्तुत किया. वंदिता और नंदिता ने सयुंक्त रूप से भोजपुरी के कई लोक गीतों को कोलार्ज रूप में प्रस्तुत किया. इसके अलावे कई अन्य गायन को रश्मि उपाध्याय ने प्रस्तुत किया. वही राकेश मिश्रा और नेहा ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया. हारमोनियम वादन गोलू, तबला आयुष, नाल सूरजकान्त पाण्डेय और झाल पर अविनाश पाण्डेय ने संगत किया. श्रेया और रवीना ने संयुक्त रूप से तो साधना श्रीवास्तव ने
सोलो झूमर प्रस्तुत किया. वही अविनाश पाण्डेय और गोलू विशाल ने भोजपुरी लोक गायन से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. नृत्य अंजलि तिवारी,अनामिका और आकांक्षा प्रियदर्शनी ने प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का समापन भोजपुरी राष्ट्रगान से सम्मानित कलाकारों ने किया. धन्यबाद ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष श्याम कुमार ने किया.

विशेष सम्मान भी मिले
कार्यक्रम में जिले में कला और पत्रकारिता के लिए अनवरत काम करने वालों को भी सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया.
भोजपुरी लोक संस्कृति को देश के कोने-कोने तक फैलाने के लिए रंगकर्मी मनोज सिंह के पूरे नाट्य दल को भोजपुरी सम्मान से सम्मानित किया गया. वही ओ पी पाण्डेय को नाट्य क्षेत्र और पत्रकारिता में विशेष और साहसिक कदम के लिए नाट्य-पुत्र सम्मान से सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया. मनोज सिंह ने इस सम्मान से अविभूत होकर कहा कि ये सम्मान भोजपूर का नहीं बल्कि भोजपुरी का है. नाट्य पुत्र सम्मान मिलने के बाद स्तब्ध होकर ओ पी पाण्डेय ने कहा कि यह सम्मान अविष्मरणीय है. राष्ट्रीय छात्रवृति के चयन के बाद किसी क्षेत्र या जिले के लिए “नाट्य-पुत्र” का सम्मान मिलना मेरी जिम्मेवारी के प्रति मुझे और सजग करना है.

 

आरा से आशुतोष

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