बड़हरा की घटना की न्यायिक जांच की मांग

भाकपा-माले की जांच टीम ने किया बड़हरा का दौरा, 10 मार्च को जिलाधिकारी के समक्ष धरना.

भाकपा-माले ने कहा -बड़हरा की घटना की न्यायिक जांच कराए सरकार




शराब के नाम पर गरीबों पर किया जा रहा है हमला

‘पुलिस-प्रशासन के गलत रवैये के कारण जनता हुई आक्रोशित’

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि भोजपुर जिले के बड़हरा में पिछले दिनों पुलिसकर्मियों द्वारा थाने में बर्बर पिटाई के कारण छेना ततवां की मौत हुई. प्रशासन को आज शराबबंदी एक बहाना मिल गया है और इसकी आड़ में गरीबों को लगातार उत्पीड़ित किया जा रहा है. इसके खिलाफ जनता में आज काफी आक्रोश है. इसी आक्रोश का इजहार बड़हरा में हुआ. माले राज्य सचिव ने बताया कि 8 मार्च को भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद, युवा नेता राजू यादव, ऐपवा की भोजपुर जिला सचिव इंदू सिंह, बड़हरा प्रखंड के भाकपा-माले प्रभारी नंद जी और माले के स्थानीय नेता ललन यादव ने घटनास्थल का दौरा किया और पूरे मामले की जानकारी हासिल की.

जांच टीम ने कहा है कि 4 मार्च को छेना ततवां की बेटी द्वारा बड़हरा थाने में शिकायत दर्ज की गयी कि उसके पिताजी शराब पीकर मार-पीट करते हैं.  पुलिस ने छेना ततवां को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया और मारते-पीटते थाने ले आयी. जब छेना ततवां की माँ थाने में अपने बेटे से मिलने गयी तो पुलिस ने उन्हें भगा दिया. बड़हरा थाने के अंदर छेना ततवां की बर्बर तरीके से पिटायी की गयी, फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डाॅक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

पुलिस-प्रशासन की इस ज्यादती के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़का और उन्होंने शव के साथ बड़हरा थाना पर प्रदर्शन किया.

बड़हरा में घटनास्थल का मुआयना करते DM-SDO

प्रशासन द्वारा मामले की बिना किसी जांच के उलटे 50 लोगों को नामजद अभियुक्त बना दिया गया. 6 मार्च को पुलिस द्वारा निर्दोष ग्रामीणों-महिलाओं की पिटाई की गयी और अभ्रद व्यवहार भी किया गया. जांच में माले नेताओं ने पाया कि इसमें मैट्रिके के परीक्षार्थी को भी गिरफ्तार किया गया है. सलामान खान, कृष्णा राय, शिवेश राय आदि के नाम प्रमुख हैं. भाकपा-माले ने कहा है कि नीतीश सरकार शराबबंदी की आड़ में गरीबों के खिलाफ दमन-उत्पीड़न चला रही है. आज पूरे बिहार में सत्ता के संरक्षण में शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, शराब माफियाओं की चांदी है, लेकिन गरीबों को इसकी सजा मिल रही है. जिन्हें शराब की लत है, उनके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार करना पूरी तरह से निंदनीय है.

जांच दल ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच करायी जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर अविलंब कार्रवाई की जाए. सभी निर्दोर्षों की अविलंब रिहाई, छेना ततवा के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी तथा शराबबंदी की आड़ में दलित-गरीबों पर हमले पर रोक लगाने के सवाल पर आगामी 10 मार्च को आरा में जिलाधिकारी के समक्ष धरना देगी भाकपा माले.

 

आरा से ओपी पांडे